• aayushfoundation@navnews.in

ईरान के जंजान में दर्दनाक हादसा: बारूदी सुरंगों को हटाने के दौरान IRGC के 14 जवानों की शहादत

02-05-2026

ईरान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत जंजान से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एक बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में सेना के 14 जवानों की जान चली गई है, जबकि दो अन्य जवान गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब सेना की एक विशेष टीम दशकों पुराने अनफटे बमों और विस्फोटक सामग्री को हटाने का कार्य कर रही थी।

हादसे का विवरण: एक खतरनाक मिशन

घटना की जानकारी देते हुए IRGC के प्रवक्ता ने बताया कि जंजान प्रांत के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में यह हादसा हुआ। यह क्षेत्र 1980 के दशक के दौरान हुए ईरान-इराक युद्ध के बाद से ही सैन्य अवशेषों और बमों से प्रभावित रहा है। IRGC की इंजीनियरिंग इकाई के जवान उस क्षेत्र में ‘ऑर्डिनेंस क्लीयरेंस’ (विस्फोटक सफाई) अभियान चला रहे थे, ताकि उस भूमि को कृषि योग्य बनाया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, जब जवान जमीन में दबे एक पुराने क्लस्टर बम को सावधानीपूर्वक हटाने का प्रयास कर रहे थे, तभी अचानक एक श्रृंखला विस्फोट हुआ। यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के 50 मीटर के दायरे में मौजूद सभी जवान इसकी चपेट में आ गए।

जंजान प्रांत की चुनौती: 1200 हेक्टेयर का 'मौत का जाल'

जंजान प्रांत के इस इलाके में लगभग 1,200 हेक्टेयर भूमि ऐसी है, जिसे अभी भी असुरक्षित घोषित किया गया है। यहाँ बिखरे हुए बमों और माइंस के कारण स्थानीय किसान और नागरिक अक्सर खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

• खतरे की प्रकृति: दशकों पहले के ये विस्फोटक अपनी मारक क्षमता आज भी बरकरार रखते हैं। जंग के निशान के रूप में मौजूद ये सामग्री न केवल मानवीय गतिविधियों को बाधित करती है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

• कृषि का संकट: जंजान का यह क्षेत्र कृषि के दृष्टिकोण से समृद्ध है, लेकिन बारूदी सुरंगों के कारण यह जमीन पिछले कई वर्षों से बंजर पड़ी है। IRGC का यह सफाई अभियान इस उम्मीद के साथ शुरू किया गया था कि आने वाले बुवाई के मौसम तक स्थानीय किसानों को उनकी जमीन वापस सौंपी जा सकेगी।

IRGC का रुख और सुरक्षा चिंताएं

इस हादसे ने एक बार फिर ईरान के सैन्य इंजीनियरिंग कोर के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर कर दिया है। IRGC के कमांडर ने शहीद जवानों को 'देश के गुमनाम नायक' करार देते हुए कहा कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।

ईरानी सेना का कहना है कि:

1. तकनीकी जटिलता: पुराने बमों की स्थिति बेहद नाजुक होती है। जरा सी हलचल या तापमान में बदलाव भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकता है।

2. संसाधनों की कमी: ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण, उन्नत रोबोटिक तकनीक और आधुनिक माइन-स्वीपिंग उपकरणों की भारी कमी है, जिससे जवानों को शारीरिक रूप से अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है।

क्षेत्रीय और मानवीय दृष्टिकोण

हालांकि यह एक सैन्य दुर्घटना है, लेकिन इसने ईरान के भीतर इस मुद्दे पर बहस छेड़ दी है कि क्या देश के भीतर पड़े हुए इन युद्धकालीन अवशेषों को हटाने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग या विशेष उपकरणों की आवश्यकता है। जंजान के स्थानीय निवासियों ने शहीदों के सम्मान में शोक सभाएं आयोजित की हैं और मांग की है कि इस खतरनाक क्षेत्र को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाए ताकि भविष्य में और कोई परिवार अपने सदस्य को न खोए।

निष्कर्ष: युद्ध के घाव जो भर नहीं रहे

ईरान के जंजान प्रांत की यह घटना यह याद दिलाती है कि युद्ध का प्रभाव केवल मोर्चे पर लड़ते हुए सैनिकों तक सीमित नहीं रहता। युद्ध समाप्त होने के दशकों बाद भी जमीन के भीतर दबी हुई विस्फोटक सामग्री आम नागरिकों और सफाई कार्य में लगे जवानों के लिए मौत बनकर छिपी रहती है।

14 जवानों की यह क्षति ईरान के लिए एक गहरा सदमा है। जहाँ एक तरफ ईरान क्षेत्रीय भू-राजनीति में अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगा है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपने घर के भीतर ही दशकों पुराने युद्ध के इन भयावह अवशेषों से निपटते हुए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। यह हादसा दर्शाता है कि शांति केवल सीमाओं पर गोलीबारी रुकने का नाम नहीं है, बल्कि उस जमीन को सुरक्षित करने का भी है जिस पर आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित चल सकें।

इस घटना के बाद, IRGC ने पूरे प्रांत में चल रहे क्लीयरेंस कार्यों को फिलहाल रोक दिया है और एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई चूक हुई थी या ये विस्फोट तकनीक की विफलता के कारण थे।

पूरे ईरान में इन जवानों की शहादत पर सम्मान व्यक्त किया जा रहा है, जो देश की सुरक्षा और निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाजों की वीरता को समर्पित है।

Share This News On Social Media

Facebook Comments

Related News