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रसोइया-सह-सहायकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक राहत भरा और सख्त आदेश जारी किया
बिहार के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के तहत काम करने वाले रसोइया-सह-सहायकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक राहत भरा और सख्त आदेश जारी किया है। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्कूलों में रसोइयों से उनके निर्धारित कार्यों के अलावा अन्य काम भी लिए जा रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।
रसोइयों के लिए 'क्या करना है' और 'क्या नहीं'
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट रूप से उनके कार्यक्षेत्र को परिभाषित कर दिया है:
* अनुमत कार्य: केवल मध्याह्न भोजन बनाना, बच्चों को सम्मानपूर्वक भोजन परोसना और भोजन के बाद बर्तनों व रसोई क्षेत्र की सफाई करना।
* प्रतिबंधित कार्य: स्कूलों में झाड़ू लगवाना, दफ्तर के काम करना, शिक्षकों के निजी काम या मिड-डे मील के अलावा अन्य किसी भी प्रकार की साफ-सफाई में उन्हें शामिल नहीं किया जा सकता।
क्यों लिया गया यह फैसला?
* वेतन और पद की गरिमा: रसोइया-सह-सहायक को एक विशेष मानदेय (Honorarium) पर केवल भोजन संबंधी कार्यों के लिए नियुक्त किया गया है। अन्य काम करवाना उनके सेवा शर्तों का उल्लंघन है।
* शिकायतों का अंबार: रसोइया संघों ने शिकायत की थी कि कुछ स्कूलों में प्रधानाध्यापक (HM) उनसे चपरासी या सफाईकर्मी की तरह काम लेते हैं, जिससे उनके मूल काम (भोजन की गुणवत्ता) पर असर पड़ता है।
* सख्त निर्देश: विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि यदि किसी स्कूल में रसोइयों से अतिरिक्त काम लेते हुए पाया गया, तो संबंधित प्रधानाध्यापक पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में रसोइयों की वर्तमान स्थिति
* संख्या: बिहार के करीब 70 हजार से अधिक प्रारंभिक स्कूलों में लाखों रसोइया कार्यरत हैं।
* चुनौती: रसोइयों का मानदेय काफी कम है और वे लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हाल के महीनों में 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल पर उनकी उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
निष्कर्ष
शिक्षा विभाग का यह कदम रसोइयों के शोषण को रोकने और स्कूलों में कार्य संस्कृति को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रसोइया अपना पूरा ध्यान बच्चों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर लगा सकें।
