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चंद्रपुर का सनसनीखेज हत्याकांड: रामनगर पुलिस ने चंद घंटों में सुलझाई संतोष भेंडे की मर्डर मिस्ट

27-06-2026

महाराष्ट्र के चंद्रपुर शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्थानीय कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के व्यस्त और रिहायशी इलाकों में से एक, मित्रनगर चौक में 48 वर्षीय संतोष भेंडे की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में डर और सनसनी का माहौल फैल गया। हालांकि, इस पेचीदा और खौफनाक मामले में चंद्रपुर की रामनगर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर न सिर्फ मामले का पर्दाफाश किया, बल्कि मुख्य आरोपी को भी बेड़ियों में जकड़ लिया।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक और पुलिस की सूझबूझ से अपराधियों को भागने का मौका नहीं मिलता। आइए विस्तार से जानते हैं कि उस रात मित्रनगर चौक पर क्या हुआ था और पुलिस ने किस तरह इस मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ा।

घटनाक्रम: मित्रनगर चौक पर खूनी खेल

मृतक की पहचान संतोष भेंडे (उम्र 48 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, घटना की रात संतोष भेंडे और आरोपी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। मित्रनगर चौक जैसे इलाके में हुई इस वारदात ने शुरुआत में पुलिस के सामने कई सवाल खड़े किए थे।

शुरुआती जांच और आरोपी के कबूलनामे के अनुसार, संतोष भेंडे और आरोपी के बीच पुराना या तात्कालिक आपसी विवाद था। यह विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि बात हाथापाई तक पहुंच गई। गुस्से में अंधा हो चुके आरोपी ने पहले संतोष भेंडे पर लात-घूंसों की बरसात कर दी। जब संतोष बेदम होकर जमीन पर गिर पड़ा, तब भी आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने पास में ही पड़े एक भारी पत्थर को उठाया और संतोष के सिर पर जोरदार वार कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने और अत्यधिक खून बह जाने के कारण संतोष भेंडे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से फरार हो गया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी कौशल

सुबह होते ही जब स्थानीय लोगों ने संतोष भेंडे का रक्तरंजित शव देखा, तो तुरंत रामनगर पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना दी गई। हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए रामनगर पुलिस की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में तुरंत हरकत में आई। पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि आरोपी का कोई सुराग मौके पर नहीं छूटा था, और शुरुआती घंटों में कोई चश्मदीद भी सामने नहीं आ रहा था।

ऐसे में रामनगर पुलिस ने अपनी जांच को डिजिटल और तकनीकी दिशा में मोड़ा। पुलिस ने निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम किया:

• सीसीटीवी फुटेज की खंगाली: पुलिस ने मित्रनगर चौक और उसके आसपास के रास्तों पर लगे सभी निजी और सरकारी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। देर रात के फुटेज में एक संदिग्ध युवक की गतिविधियां नजर आईं।

• तकनीकी कौशल : पुलिस की साइबर और तकनीकी टीम ने मोबाइल टावर लोकेशन, डंप डेटा और संदिग्ध के रूट ट्रैक का विश्लेषण किया।

• गुप्तचरों का जाल: तकनीकी इनपुट मिलते ही पुलिस ने अपने स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय किया, जिससे संदिग्ध के हुलिए और उसके छिपने के ठिकाने की पुष्टि हो सकी।

वडगांव क्षेत्र से दबोचा गया 'ऐपल पोहनकर'

तकनीकी कौशल और सीसीटीवी फुटेज से मिले ठोस सुरागों के आधार पर रामनगर पुलिस ने आरोपी की घेराबंदी शुरू की। पुलिस को सटीक जानकारी मिली कि आरोपी चंद्रपुर के ही वडगांव क्षेत्र में छिपा हुआ है। पुलिस की एक विशेष टीम ने बिना वक्त गंवाए वडगांव में छापेमारी की और महज कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को हिरासत में ले लिया।

गिरफ्तार आरोपी की प्रोफाइल:

• नाम: अजय उर्फ ऐपल पोहनकर

• उम्र: 19 वर्ष

• निवासी: वडगांव क्षेत्र, चंद्रपुर

• आरोप: हत्या (भारतीय न्याय संहिता/आईपीसी की संबंधित धाराएं)

मात्र 19 साल की उम्र में इस तरह की नृशंस हत्या को अंजाम देने की बात ने पुलिस और समाज दोनों को चौंका दिया। पुलिस स्टेशन लाकर जब आरोपी अजय उर्फ ऐपल से कड़ी पूछताछ की गई, तो वह ज्यादा देर तक पुलिस को गुमराह नहीं कर सका। उसने आपसी विवाद के चलते लात-घूंसों और भारी पत्थर से सिर पर वार कर संतोष भेंडे की हत्या करने की बात पूरी तरह कबूल कर ली।

हत्याकांड के पीछे की वजह और सामाजिक चिंताएं

इस हत्याकांड ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते गुस्से, असहनशीलता और अपराध की प्रवृत्ति को उजागर किया है। महज 19 साल का एक युवक मामूली या आपसी विवाद में इस कदर हिंसक हो जाता है कि वह किसी की जान ले लेता है, यह बेहद चिंताजनक है।

पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या आरोपी और मृतक के बीच कोई पुराना लेन-देन का विवाद था, या फिर घटना के वक्त दोनों के बीच किसी तात्कालिक बात (जैसे गाली-गलौज या नशा) को लेकर झगड़ा हुआ था। आरोपी 'ऐपल पोहनकर' का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं, इसकी भी पड़ताल रामनगर पुलिस द्वारा की जा रही है।

निष्कर्ष: रामनगर पुलिस की कामयाबी

इस पूरे मामले में रामनगर पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। यदि पुलिस पारंपरिक तरीके से ही जांच करती रहती, तो शायद आरोपी को शहर से बाहर भागने या सबूत मिटाने का मौका मिल जाता। लेकिन पुलिस ने आधुनिक तकनीकी कौशल और सीसीटीवी नेटवर्क का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए अंधेरे में तीर चलाने के बजाय सीधे निशाने पर हाथ डाला।

संतोष भेंडे हत्याकांड का कुछ ही घंटों में पर्दाफाश करके रामनगर पुलिस ने न केवल अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है, बल्कि चंद्रपुर के नागरिकों के बीच कानून-व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी मजबूत किया है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी अजय उर्फ ऐपल पोहनकर को अदालत में पेश करने और आगे की पीसीआर (पुलिस कस्टडी रिमांड) लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए पत्थर और अन्य साक्ष्यों को कानूनी तौर पर पुख्ता किया जा सके।

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