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शराब का नशा और ममता का अंत: चंद्रपुर में चलती बाइक से गिरा 4 महीने का मासूम, 700 मीटर तक माता-पिता को नह

27-06-2026

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भिसी क्षेत्र से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं, माता-पिता के दायित्वों और नशे की जानलेवा लत पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। शराब के अत्यधिक नशे में धुत एक माता-पिता की घोर लापरवाही के कारण उनका महज चार महीने का मासूम बच्चा चलती हुई मोटरसाइकिल से सड़क पर गिर गया।

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली और दिल को दहला देने वाली बात यह रही कि नशे में पूरी तरह होश खो चुके इस दंपति को करीब 700 मीटर तक इस बात का अहसास ही नहीं हुआ कि उनका जिगर का टुकड़ा उनके पास नहीं है, बल्कि सड़क पर मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहा है। इस पूरी घटना में अगर देवदूत बनकर आए राहगीर और स्थानीय पुलिस मुस्तैद न होती, तो आज एक बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा हो चुका होता। आइए विस्तार से जानते हैं कि उस दिन भिसी क्षेत्र की सड़क पर क्या हुआ था।

घटनाक्रम: नशे की धुत में चलती बाइक पर मासूम

यह पूरी घटना चंद्रपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण और कस्बाई इलाके भिसी की है। जानकारी के अनुसार, एक दंपति अपने चार महीने के नवजात बच्चे को लेकर मोटरसाइकिल (बाइक) से कहीं जा रहे थे। बाइक चला रहा पति और पीछे बैठी पत्नी, दोनों ही शराब के अत्यधिक नशे में चूर थे। नशा इस कदर हावी था कि उन्हें इस बात का जरा भी भान नहीं था कि उनके हाथ में एक बेहद नाजुक और चार महीने की नन्हीं जान थमी हुई है।

जैसे ही उनकी बाइक भिसी क्षेत्र की एक मुख्य सड़क से गुजरी, अचानक बाइक को एक झटका लगा। मां की गोद में ठीक से न संभल पाने और नशे की शिथिलता के कारण वह चार महीने का मासूम बच्चा चलती हुई बाइक से सीधे नीचे पक्की सड़क पर गिर गया।

700 मीटर का खौफनाक सफर

आमतौर पर किसी भी मां की गोद से अगर बच्चा जरा सा भी सरकता है, तो मां की ममता और सुरक्षा चक्र तुरंत जाग जाता है। लेकिन यहाँ नशे ने ममता और होश दोनों पर ताला लगा दिया था। बच्चा सड़क पर गिरकर रो रहा था, लेकिन बाइक सवार माता-पिता अपनी ही धुन में आगे बढ़ते रहे। वे लगभग 700 मीटर (आधा किलोमीटर से भी ज्यादा) आगे निकल गए और उन्हें यह पता ही नहीं चला कि उनका बच्चा सड़क पर ही पीछे छूट गया है।

आगे जाकर फिसली बाइक, राहगीर बने देवदूत

नशे की हालत में बाइक की रफ्तार और संतुलन वैसे भी भगवान भरोसे था। बच्चे के गिरने के 700 मीटर आगे जाने के बाद, अनियंत्रित होकर दंपति की मोटरसाइकिल सड़क पर बुरी तरह फिसल गई। बाइक फिसलने के कारण दोनों पति-पत्नी सड़क पर गिर पड़े और उन्हें हल्की चोटें आईं। इस दुर्घटना के बाद जब वे जमीन से उठे, तब कहीं जाकर उनके धुंधले दिमाग में यह बात आई कि उनका बच्चा उनके पास नहीं है।

दूसरी तरफ, जहां मासूम बच्चा सड़क पर गिरा था, वहां से गुजरने वाले राहगीरों की नजर उस तड़पते और रोते हुए नवजात पर पड़ी। बीच सड़क पर चार महीने के बच्चे को इस तरह अकेला देखकर राहगीर सन्न रह गए।

• राहगीरों की सतर्कता: स्थानीय लोगों और वहां से गुजर रहे वाहन चालकों ने तुरंत अपनी गाड़ियां रोकीं। उन्होंने सबसे पहले बच्चे को सुरक्षित सड़क के किनारे किया और उसे गोद में उठाकर चुप कराने का प्रयास किया। गनीमत यह रही कि गिरने के बावजूद बच्चे को कोई जानलेवा चोट नहीं आई थी, जो कि किसी चमत्कार से कम नहीं था।

• पुलिस को सूचना: राहगीरों ने बिना एक पल गंवाए इस अजीबोगरीब और गंभीर घटना की सूचना स्थानीय भिसी पुलिस को दी।

पुलिस की तत्परता और बच्चे का सुरक्षित रेस्क्यू

सूचना मिलते ही भिसी पुलिस स्टेशन की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया। इसी दौरान पुलिस को कुछ ही दूरी पर बाइक फिसलने से दुर्घटनाग्रस्त हुए उस शराबी दंपति के बारे में भी जानकारी मिली।

पुलिस ने जब कड़ियों को जोड़ा, तो पूरा मामला साफ हो गया। पुलिस ने तस्दीक की कि जो दंपति आगे जाकर गिरा है, यह बच्चा उन्हीं का है। पुलिस कर्मियों ने जब माता-पिता से पूछताछ की, तो वे इतने नशे में थे कि ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और न ही अपनी सफाई में कुछ बोल पा रहे थे।

चश्मदीदों और पुलिस का बयान:

"हमने अपने पूरे जीवन में ऐसी लापरवाही नहीं देखी। शराब के नशे में लोग खुद को नुकसान पहुंचाते हैं, यह सुना था। लेकिन कोई अपनी चार महीने की औलाद को सड़क पर गिराकर आगे निकल जाए और उसे पता भी न चले, यह क्रूरता और लापरवाही की पराकाष्ठा है। पुलिस और जनता की सतर्कता ने आज एक मां की गोद सूनी होने से बचा ली।"

सामाजिक चिंताएं: नशे की गर्त में डूबती जिम्मेदारी

यह घटना चंद्रपुर ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की आंखें खोलने वाली है। यह इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे अत्यधिक शराब का सेवन इंसानी दिमाग को पूरी तरह सुन्न कर देता है, यहाँ तक कि प्राकृतिक प्रवृत्तियां (जैसे अपने बच्चे की रक्षा करना) भी काम करना बंद कर देती हैं।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में इस दंपति के प्रति भारी आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे गैर-जिम्मेदार माता-पिता के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में वे अपने बच्चे की जान को दोबारा इस तरह जोखिम में न डाल सकें। बाल कल्याण समिति भी इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चा आगे सुरक्षित हाथों में रहेगा या नहीं।

निष्कर्ष: एक नया जीवन और कानून का सबक

इस पूरे घटनाक्रम में यह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था कि चलती बाइक से कंक्रीट की सड़क पर गिरने के बाद भी चार महीने के मासूम की जान बच गई। इसके लिए भिसी क्षेत्र के सजग राहगीर और पुलिस की त्वरित कार्रवाई शत-प्रतिशत बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने समय रहते बच्चे को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

भिसी पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। शराबी माता-पिता के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, बच्चे की जान जोखिम में डालने और बाल संरक्षण अधिनियम के तहत उचित धाराओं में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए एक कड़ा सबक है जो नशे की हालत में वाहन चलाते हैं या अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को दांव पर लगा देते हैं। कानून की सजा तो इस दंपति को मिलेगी ही, लेकिन समाज में उन्हें जो शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है, वह शायद उनके नशे को हमेशा के लिए उतार देगी।

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