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यूपीएससी नियम 2026: एक युगांतरकारी बदलाव
यह जानकारी यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 के नवीनतम नोटिफिकेशन (CSE 2026) के साथ आयोग ने 'सर्विसेज' और 'अटेम्प्ट्स' को लेकर जो बड़े बदलाव किए हैं, वे भविष्य की नौकरशाही के ढांचे और कार्यकुशलता को गहराई से प्रभावित करेंगे।
यूपीएससी नियम 2026: एक युगांतरकारी बदलाव
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने हाल ही में सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए नियमों में कड़े संशोधन किए हैं। ये बदलाव मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों को लक्षित करते हैं जो पहले से ही किसी न किसी सेवा में चयनित हो चुके हैं और अपनी रैंक सुधारने के लिए बार-बार परीक्षा देते हैं। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है: प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना और सेवा में शामिल होने के बाद अधिकारियों का ध्यान पूरी तरह से उनके कार्यों पर केंद्रित करना।
1. कार्यरत IAS और IFS अधिकारियों पर पूर्ण प्रतिबंध
अब तक, यदि कोई उम्मीदवार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो जाता था, तो उसे सेवा में रहते हुए दोबारा परीक्षा देने की अनुमति नहीं थी, जब तक कि वह इस्तीफा न दे दे। हालांकि, अब इस नियम को और अधिक स्पष्ट और सख्त बना दिया गया है।
* नियम: यदि आप पहले से ही IAS या IFS अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, तो आप परीक्षा के लिए पात्र ही नहीं हैं।
* तात्पर्य: यह उन मेधावी उम्मीदवारों के लिए है जो IAS मिलने के बाद भी केवल 'होम कैडर' या अपनी पसंद के अन्य कारणों से बार-बार परीक्षा देते थे। अब "IAS से IAS" की दौड़ पूरी तरह समाप्त हो गई है।
2. IPS अधिकारियों के लिए विशेष 'कैप' (पॉइंट ऑफ नो रिटर्न)
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों के लिए एक बड़ा बदलाव यह है कि वे परीक्षा तो दे सकते हैं, लेकिन वे दोबारा IPS का विकल्प नहीं चुन पाएंगे।
* नियम: यदि कोई सेवारत IPS अधिकारी दोबारा परीक्षा देता है, तो वह अपनी प्राथमिकता सूची में IPS को नहीं रख सकता। उसे केवल IAS, IFS या अन्य ग्रुप-A सेवाओं के लिए ही प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
* कारण: इसका उद्देश्य उन अधिकारियों को रोकना है जो पहले से ही पुलिस सेवा में हैं और केवल बेहतर कैडर या रैंक सुधारने के लिए उसी सेवा की सीट दोबारा घेरते हैं।
3. चयन और मुख्य परीक्षा (Mains) के बीच का पेंच
यह नियम उन उम्मीदवारों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण है जो वर्तमान में प्रक्रिया के बीच में हैं।
* नियम: यदि किसी उम्मीदवार का चयन पिछली परीक्षा के आधार पर IAS या IFS के लिए हो जाता है, और यह नियुक्ति मुख्य परीक्षा (Mains) शुरू होने से पहले होती है, तो उसे मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
* जोखिम: यदि नियुक्ति मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद होती है, तो उसे उस वर्ष की परीक्षा के माध्यम से किसी भी सेवा के लिए विचार नहीं किया जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि एक बार शीर्ष सेवा मिलने के बाद, उम्मीदवार तुरंत सेवा के प्रति समर्पित हो जाए।
4. पुराने बैचों (2025 तक) के लिए 'एग्जिट विंडो'
आयोग ने उन उम्मीदवारों के प्रति सहानुभूति दिखाई है जो पुराने नियमों के तहत पहले ही किसी सेवा में शामिल हो चुके हैं।
* नियम: जो उम्मीदवार CSE 2025 या उससे पहले की परीक्षाओं के माध्यम से किसी सेवा (जैसे IRS, IRTS आदि) में आ चुके हैं, उन्हें अपने शेष प्रयासों का उपयोग करने के लिए 2026 या 2027 में एक अंतिम अवसर दिया गया है।
* शर्त: वे बिना इस्तीफा दिए परीक्षा दे सकते हैं। लेकिन 2028 से, किसी भी सेवारत अधिकारी को दोबारा बैठने के लिए इस्तीफा देना अनिवार्य हो सकता है या वे पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकते हैं।
इन बदलावों का व्यापक प्रभाव (Impact Analysis)
| श्रेणी | पहले क्या था? | अब क्या है? |
|---|---|---|
| IAS/IFS | इस्तीफा देकर दोबारा दे सकते थे। | सेवारत रहते हुए परीक्षा में बैठने पर पूर्ण प्रतिबंध। |
| IPS | दोबारा IPS बन सकते थे (कैडर बदलने के लिए)। | दोबारा IPS विकल्प चुनने पर प्रतिबंध। |
| वेटिंग लिस्ट/नियुक्ति | परीक्षा प्रक्रिया जारी रख सकते थे। | नियुक्ति मिलते ही मौजूदा मेन्स परीक्षा से बाहर। |
| अन्य सेवाएं (Group A) | बार-बार प्रयास की अनुमति थी। | 2027 के बाद कड़े प्रतिबंध संभव। |
निष्कर्ष और भविष्य की राह
ये नियम न केवल 'सीटों की बर्बादी' को रोकेंगे, बल्कि वेटिंग लिस्ट वाले उम्मीदवारों को भी बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। इससे मसूरी (LBSNAA) और हैदराबाद (SVPNPA) जैसे प्रशिक्षण संस्थानों में बार-बार आने-जाने वाले उम्मीदवारों (जिन्हें 'Academic Tourists' कहा जाता था) की संख्या कम होगी।
