Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
लेबनान में इजराइली हवाई हमला: संघर्ष विराम के बीच 6 पैरामेडिक्स समेत 10 लोगों की मौत
लेबनान और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका की अथक मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों के बीच एक युद्ध विराम समझौता हुआ था, जिसने दुनिया को इस क्षेत्र में शांति बहाली की एक उम्मीद दी थी। लेकिन, जमीनी हकीकत इस समझौते के दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। हाल ही में दक्षिणी लेबनान पर हुए भीषण इजराइली हवाई हमलों ने इस नाजुक संघर्ष विराम की धज्जियां उड़ा दी हैं।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन नए हवाई हमलों में छह पैरामेडिक्स (स्वास्थ्य कर्मी) और एक निर्दोष सीरियाई बच्ची समेत कम से कम 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध विराम की घोषणा के बावजूद दोनों पक्षों की ओर से लगभग हर दिन हमले जारी हैं, जिससे इस शांति समझौते पर पूरी तरह से संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हनूइयेह गांव पर पहला हमला और तबाही का मंजर
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के रिहायशी और नागरिक इलाकों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हवाई हमले किए। इनमें से सबसे पहला और घातक हमला हनूइयेह गांव पर हुआ।
इस गांव पर हुए हमले में इजराइली मिसाइलों ने सीधे तौर पर नागरिक बुनियादी ढांचे और बचाव कार्य में जुटे लोगों को निशाना बनाया। हमले के समय वहां स्थानीय लोग और राहत कर्मी मौजूद थे। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। इस पहले हमले ने ही कई मासूम जिंदगियों को लील लिया और पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
पैरामेडिक्स और मासूम बच्चों को बनाया गया निशाना
इस हमले की सबसे दुखद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदनीय बात यह रही कि इसमें मानवीय सहायता और चिकित्सा सेवा में लगे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
• छह पैरामेडिक्स की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि मलबे से घायलों को निकालने और आपातकालीन चिकित्सा सहायता पहुंचाने के दौरान छह पैरामेडिक्स इजराइली बमबारी की चपेट में आ गए और मौके पर ही शहीद हो गए। युद्ध के नियमों के तहत चिकित्सा कर्मियों पर हमला करना एक गंभीर युद्ध अपराध माना जाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
• सीरियाई लड़की की मौत: इस हमले में अपनी जान गंवाने वालों में एक सीरियाई शरणार्थी लड़की भी शामिल है। वह अपने परिवार के साथ लेबनान में शरण लिए हुए थी, लेकिन युद्ध की विभीषिका से खुद को नहीं बचा सकी। इसके अलावा अन्य 3 नागरिकों की भी इस बमबारी में मौत हुई है, जिससे कुल मृतकों की संख्या 10 हो गई है।
अमेरिका की मध्यस्थता और नाजुक संघर्ष विराम की विफलता
कुछ समय पहले ही संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के भारी दबाव के बाद इजराइल और लेबनान (विशेष रूप से हिजबुल्लाह) के बीच एक संघर्ष विराम समझौता लागू हुआ था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सीमा पर जारी गोलाबारी को रोकना, विस्थापित नागरिकों को उनके घरों तक वापस लाना और क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति का रास्ता साफ करना था।
संघर्ष विराम पर संकट: अमेरिकी मध्यस्थों ने दोनों पक्षों को मेज पर लाकर एक फ्रेमवर्क तैयार किया था, लेकिन यह समझौता कागज पर जितना मजबूत दिख रहा था, जमीन पर उतना ही कमजोर साबित हुआ है। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि मामूली सी उकसावे की कार्रवाई भी बड़े हमलों में बदल जा रही है। दक्षिणी लेबनान में हुआ यह हालिया हमला इस बात का पुख्ता सबूत है कि संघर्ष विराम अब केवल नाम का रह गया है।
इस लगातार जारी गोलाबारी के कारण सीमा के दोनों ओर रहने वाले लाखों नागरिक जो अपने घरों को लौटने की उम्मीद कर रहे थे, वे अब भी खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवीय संकट
दक्षिणी लेबनान में पैरामेडिक्स और नागरिकों की मौत के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) और लेबनान सरकार ने इजराइल की कड़ी निंदा की है। लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने कहा है कि इजराइल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संघर्ष विराम की शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी युद्ध क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। लेबनान पहले से ही एक अभूतपूर्व आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं और पैरामेडिक्स पर होने वाले ये हमले लेबनान के चरमराते मेडिकल सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष: क्या क्षेत्र फिर से बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
हनूइयेह गांव और दक्षिणी लेबनान के अन्य हिस्सों में हुए इन ताजा हमलों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका द्वारा तैयार किया गया शांति का ढांचा बेहद कमजोर है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी मध्यस्थों ने तुरंत हस्तक्षेप करके दोनों पक्षों को सख्त हिदायत नहीं दी, तो यह नाजुक संघर्ष विराम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
6 पैरामेडिक्स और एक मासूम सीरियाई बच्ची सहित 10 लोगों की यह मौत इस बात की गवाही है कि युद्ध की आग ठंडी नहीं हुई है, बल्कि अंदर ही अंदर सुलग रही है। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष एक बार फिर से पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसकी भारी कीमत निर्दोष नागरिकों को चुकानी पड़ेगी।
