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ग्लोबल ऑयल शॉक: ट्रंप के संबोधन के बाद कच्चे तेल में लगी आग, $106 के पार पहुँचा ब्रेंट क्रूड

02-04-2026


मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है। ट्रंप के संबोधन के कुछ ही मिनटों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया, जिससे आने वाले दिनों में दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।

बाजार की ताजा स्थिति (Key Highlights)

 * ब्रेंट क्रूड का उछाल: अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत में 5% की भारी तेजी आई है। यह अब $106.22 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।

 * बड़ी बढ़त: कल की तुलना में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग $4 प्रति बैरल का इजाफा हुआ है।

 * WTI क्रूड: अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में भी इसी अनुपात में बढ़ोत्तरी देखी गई है।

क्यों भड़की कीमतों में आग?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के संबोधन ने निवेशकों के मन में 'सप्लाई चेन' बाधित होने का डर पैदा कर दिया है:

 * कड़ी सैन्य कार्रवाई के संकेत: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ताजा बयान में ईरान और अन्य विद्रोही समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और अधिक आक्रामक बनाने की चेतावनी दी है। युद्ध का दायरा बढ़ने की आशंका ने बाजार को अस्थिर कर दिया है।

 * ऊर्जा केंद्रों पर खतरा: ट्रंप के रुख से यह अंदेशा बढ़ गया है कि मिडिल ईस्ट के प्रमुख तेल कुओं या रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा सकता है।

 * हॉर्मुज जलडमरूमध्य का डर: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। ट्रंप के बयान के बाद इसके बंद होने या प्रभावित होने का जोखिम बढ़ गया है।

भारत और आम आदमी पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का करीब 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है:

 * पेट्रोल और डीजल: यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह $100 के ऊपर बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर से बढ़ सकते हैं।

 * महंगाई का खतरा: ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई (Logistics) की लागत बढ़ेगी, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

 * शेयर बाजार: तेल की कीमतों में उछाल के कारण आज भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा सकती है, विशेषकर पेंट, टायर और एयरलाइंस सेक्टर की कंपनियों पर दबाव रहेगा।

आगे क्या?

बाजार अब ओपेक (OPEC) देशों और अन्य तेल उत्पादक राष्ट्रों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो विश्लेषकों का मानना है कि कच्चा तेल $110-$115 प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकता है।

> विशेषज्ञों की राय: ट्रंप की नीति अब पूरी तरह से "दबाव बनाने" की है, लेकिन ऊर्जा बाजार के लिए यह नीति काफी महंगी साबित हो रही है। फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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