Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
मणिपुर में कुकी-नागा तनाव और 6 नागा नागरिकों के शव बरामद होने के बाद उपजे संकट पर
पूर्वोत्तर राज्य में एक नया सुरक्षा संकट
मणिपुर राज्य, जो पहले से ही पिछले तीन वर्षों से मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहा है, अब एक नए और बेहद गंभीर सुरक्षा संकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है। मई 2026 में शुरू हुआ कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र गुटों के बीच का तनाव अब एक हिंसक मोड़ ले चुका है। लगभग एक महीने से लापता 6 नागा नागरिकों के शव बरामद होने के बाद राज्य के पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों में भारी आक्रोश और तनाव व्याप्त हो गया है।
इस घटना के बाद नागा समुदाय के शीर्ष संगठनों ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया है, जिससे इम्फाल सहित कई जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति नाजुक हो गई है। स्थिति को अनियंत्रित होने से रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि: मई 2026 का बंधक संकट
इस ताजा विवाद की शुरुआत 13 मई 2026 को हुई थी, जब कोटलेन क्षेत्र में हुए एक घातक हमले और आपसी हिंसक झड़पों के बाद दोनों समुदायों के सशस्त्र गुटों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद बदले की भावना से दोनों तरफ से बड़े पैमाने पर अपहरण और बंधक बनाने का दौर शुरू हुआ।
• सशस्त्र गुटों की संलिप्तता: सशस्त्र समूहों द्वारा दोनों समुदायों के 48 से अधिक लोगों (नागरिकों और पादरियों सहित) को अलग-अलग क्षेत्रों से बंधक बना लिया गया था।
• वार्ता और आंशिक रिहाई: केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) के कड़े प्रयासों के बाद बातचीत का दौर चला। इसके परिणामस्वरूप, 9 जून 2026 को नागा समूहों द्वारा अपनी हिरासत में रखे गए सभी 14 कुकी बंधकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया था, जिससे शांति की उम्मीदें जगी थीं।
ताजा घटनाक्रम: कांगपोकपी में 6 शवों की बरामदगी
शांति बहाली की उम्मीदों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब 14 कुकी बंधकों की रिहाई के ठीक 24 घंटे के भीतर, 10 जून 2026 को मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और सीआरपीएफ (CRPF) के 450 से अधिक जवानों के एक संयुक्त तलाशी अभियान में कांगपोकपी जिले के लीलोन वाइफेई क्षेत्र के पास से 6 लापता नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए।
मृतकों की पहचान: मारे गए लोगों में कोंसाखुल नागा गांव के दो पादरी —केनपीबौ चावांग और मनु थिउमई के साथ-साथ फेनरोंगविबो थिउमई, दिलीप थिउमई, कालीवांगबौ एबोनमई और सीएच फेन्रीलुंग शामिल हैं। ये सभी 13 मई से ही लापता थे।
आक्रोश, झड़पें और वर्तमान जमीनी स्थिति
शवों को पोस्टमार्टम और डीएनए पहचान के लिए इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल लाया गया। इस खबर के फैलते ही अस्पताल परिसर और राज्य के नागा बहुल इलाकों में भारी भीड़ जमा हो गई।
1. सुरक्षा बलों से टकराव: अस्पताल के बाहर उमड़ी आक्रोशित भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिसमें कई नागरिकों और जवानों के घायल होने की सूचना है।
2. यूनाइटेड नागा काउंसिल का बंद: शीर्ष नागा निकाय UNC ने इस जघन्य कृत्य के खिलाफ 11 जून की सुबह 6 बजे से 24 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठन ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे शवों को स्वीकार नहीं करेंगे।
3. राजनीतिक दबाव: नागा संगठनों ने कुकी उग्रवादी समूहों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समझौते को तुरंत रद्द करने, दोषियों की गिरफ्तारी और मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग की है।
सुरक्षा और प्रशासनिक कदम
गृह मंत्रालय और मणिपुर राज्य प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए आपातकालीन कदम उठाए हैं:
निष्कर्ष और शांति की अपील
मणिपुर में कुकी-नागा तनाव का यह पुनरुत्थान बेहद चिंताजनक है, जो 1990 के दशक के काले दौर की यादें ताजा करता है। नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और कुकी नागरिक समाज संगठनों (जैसे कुकी इनपी) ने भी इस सामूहिक हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वर्तमान नाजुक मोड़ पर किसी भी तरह की अफवाह या जवाबी हिंसा पूरे राज्य को एक और विनाशकारी जातीय संघर्ष में धकेल सकती है, इसलिए सरकार की प्राथमिकता तुरंत न्याय सुनिश्चित करने और दोनों समुदायों के बीच संवाद के रास्ते दोबारा खोलने की है।
