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उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E22 से E30) पर एक्साइज ड्यूटी शून्य करने के ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय प
हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने देश के ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर उच्च मात्रा में एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल के नए वेरिएंट्स पर लगने वाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से समाप्त (शून्य) कर दिया है।
यह टैक्स छूट मुख्य रूप से पेट्रोल की E22, E25, E27 और E30 श्रेणियों पर लागू होगी। सरकार का यह रणनीतिक कदम देश के 'एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम' (EBP) को वर्तमान E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) के स्तर से आगे ले जाने और हरित जैव-ईंधन के वाणिज्यिक उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए उठाया गया पहला बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन है।
अधिसूचना के मुख्य बिंदु और ईंधन की नई श्रेणियां
केंद्रीय राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और रोड व इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) से दी गई यह छूट उन ईंधनों पर लागू होगी जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के विशिष्ट मानक (IS 19850) के अनुरूप तैयार किए जाएंगे।
लागू होने की शर्त: यह छूट तभी मान्य होगी जब मिश्रण में इस्तेमाल होने वाले मूल पेट्रोल पर उचित कर चुकाया गया हो और मिश्रित किए जाने वाले एथेनॉल पर नियमानुसार वस्तु एवं सेवा कर (GST) का भुगतान किया गया हो।
इस नीतिगत निर्णय के बहुआयामी लाभ और दूरगामी प्रभाव
सरकार के इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आम नागरिकों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है:
1. कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी
भारत वर्तमान में अपनी कुल जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच, घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल का मिश्रण बढ़ाना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। E20 का लक्ष्य समय से पहले हासिल करने के बाद, E22 से E30 के इस नए कदम से सालाना अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
2. कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती
पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल एक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन है क्योंकि यह स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन (जैसे गन्ना, मक्का और क्षतिग्रस्त अनाज) से बनता है। पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिक्स होने से वाहनों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर सहित देश के बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता (AQI) सुधारने में मदद मिलेगी।
3. किसानों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि
एथेनॉल का उत्पादन पूरी तरह कृषि आधारित होता है। गन्ने के रस, शीरे, मक्का, टूटे चावल और खराब आलू जैसी फसलों से एथेनॉल की मांग बढ़ने से देश की डिस्टिलरीज की क्षमता बढ़ेगी। इससे देश के करोड़ों किसानों को उनकी फसलों का न केवल सही मूल्य मिलेगा, बल्कि उनकी आय के नए स्रोत खुलेंगे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बनेगा।
4. तेल कंपनियों और ग्राहकों को दोहरा फायदा
• तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को लाभ: एक्साइज ड्यूटी खत्म होने से इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों के लिए उच्च-ब्लेंड वाले इन ईंधनों की उत्पादन और वितरण लागत कम होगी।
• ग्राहकों को राहत: कच्चे तेल की वैश्विक महंगाई के इस दौर में, टैक्स छूट के कारण आने वाले समय में E22 से E30 श्रेणियों का पेट्रोल आम उपभोक्ताओं के लिए किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे उनके मासिक ईंधन खर्च में कमी आएगी।
निष्कर्ष और भविष्य का रोडमैप
भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा हाल ही में इन श्रेणियों के तकनीकी मानक तय किए जाने के बाद, अब सरकार द्वारा दी गई यह टैक्स छूट ऑटोमोबाइल उद्योग (फ्लेक्स-फ्यूल इंजन निर्माता) और तेल कंपनियों दोनों के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक का काम करेगी। सरकार का यह कदम यह साफ करता है कि भारत अब तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनने और शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन के अपने वैश्विक संकल्प को समय से पहले पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
