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पेट्रोल-डीजल पर बड़ा फैसला
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयानों और भारत सरकार की भावी योजनाओं के आलोक में, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की अपार सफलता के बाद अब डीजल के क्षेत्र में भी एक बड़े क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी चल रही है। सरकार का लक्ष्य जनता को सस्ता, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन उपलब्ध कराना है। इस दिशा में डीजल में 15% 'आइसोब्यूटिनोल' मिलाने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
1. क्या है 'आइसोब्यूटिनोल' और यह कैसे काम करता है?
आइसोब्यूटिनोल चार कार्बन वाला एक अल्कोहल है, जिसे गन्ने के रस, मक्के, कृषि अवशेषों और अन्य बायोमास से फर्मेंटेशन (किण्वन) की प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
इथेनॉल (जो दो कार्बन वाला अल्कोहल है) मुख्य रूप से पेट्रोल में मिलाया जाता है, लेकिन डीजल के साथ उसकी अनुकूलता उतनी बेहतर नहीं होती। इसके विपरीत, आइसोब्यूटिनोल के गुण डीजल से काफी मिलते-जुलते हैं:
• उच्च ऊर्जा घनत्व : इथेनॉल की तुलना में आइसोब्यूटिनोल में ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है, जो इसे डीजल इंजनों के लिए अधिक सक्षम बनाती है।
• कम नमी सोखना: यह पानी को आसानी से नहीं सोखता, जिससे ईंधन टैंक और इंजन में जंग लगने का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
• मौजूदा इंजनों के अनुकूल: इसे बिना किसी बड़े तकनीकी बदलाव के मौजूदा डीजल इंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. आम उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभ
डीजल में 15% आइसोब्यूटिनोल के मिश्रण का सफल क्रियान्वयन भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
ए. डीजल की कीमतों में भारी कमी
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
• जब डीजल में 15% स्थानीय स्तर पर उत्पादित आइसोब्यूटिनोल मिलाया जाएगा, तो कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी।
• चूंकि बायो-इंधन का उत्पादन घरेलू स्तर पर कृषि अपशिष्टों से होगा, इसकी लागत कम आएगी, जिससे डीजल की कीमतों में प्रति लीटर उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
बी. महंगाई पर लगाम
भारत में माल ढुलाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। सब्जियों, खाद्यान्न और रोजमर्रा की चीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले ट्रक डीजल से चलते हैं। डीजल सस्ता होने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे बाजार में सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कम होंगी और महंगाई से राहत मिलेगी।
सी. किसानों की आय में वृद्धि
आइसोब्यूटिनोल का उत्पादन पूरी तरह कृषि पर आधारित है। गन्ने, मक्के और पराली (कृषि अवशेष) का उपयोग इसके कच्चे माल के रूप में होगा।
• किसानों को उनकी फसलों और कचरे का सही दाम मिलेगा।
• ग्रामीण क्षेत्रों में नए इथेनॉल और आइसोब्यूटिनोल प्लांट लगेंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
3. पर्यावरणीय लाभ: प्रदूषण से मुक्ति
भारत के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, जिसमें डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं बड़ा कारक है।
• कम कार्बन उत्सर्जन: आइसोब्यूटिनोल एक स्वच्छ ईंधन है। इसके जलने से पर्यावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है।
• पराली की समस्या का समाधान: किसान जिस पराली को खेतों में जला देते हैं, उसका उपयोग आइसोब्यूटिनोल बनाने में हो सकेगा, जिससे सर्दियों में होने वाले स्मॉग से राहत मिलेगी।
निष्कर्ष
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह दृष्टिकोण भारत को 'ऊर्जा आत्मनिर्भर' बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के सफल मॉडल (जो 10% से ऊपर पहुंच चुका है और 20% का लक्ष्य है) को देखते हुए, डीजल में 15% आइसोब्यूटिनोल का मिश्रण पूरी तरह व्यावहारिक प्रतीत होता है।
