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PM आवास के साये में बसी बस्तियों पर 'बेदखली' का संकट: 717 परिवारों के सामने होली से पहले अंधेरा

21-02-2026

PM आवास के साये में बसी बस्तियों पर 'बेदखली' का संकट: 717 परिवारों के सामने होली से पहले अंधेरा

देश की सबसे सुरक्षित सड़कों में से एक, लोक कल्याण मार्ग (7, LKM) जहां प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है, के ठीक बगल में बसी तीन झुग्गी बस्तियों को हटाने का आदेश जारी कर दिया गया है। 20 फरवरी 2026 को जारी इस नोटिस ने यहाँ रहने वाले 717 परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है।

आदेश के अनुसार, राम कैंप (Bhai Ram Camp), मस्जिद कैंप और DID कैंप के निवासियों को 6 मार्च 2026 तक अपनी जगह खाली करनी होगी।

प्रशासन का तर्क: सरकारी जमीन और पुनर्वास की योजना

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने यह स्पष्ट किया है कि ये बस्तियाँ केंद्र सरकार की जमीन पर स्थित हैं। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

 * पुनर्वास (Rehabilitation): अधिकारियों का कहना है कि वे इन परिवारों को 'बेघर' नहीं छोड़ रहे हैं। सभी 717 पात्र परिवारों को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सावदा घेवरा (Savda Ghevra) स्थित DUSIB कॉलोनी में पक्के फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं।

 * सर्वे और पात्रता: जनवरी 2024 में DDA और L&DO द्वारा एक संयुक्त सर्वे किया गया था, जिसके आधार पर इन परिवारों की पात्रता तय की गई थी।

 * अंतिम चेतावनी: नोटिस में साफ कहा गया है कि यदि 6 मार्च तक कब्जा नहीं छोड़ा गया, तो सुरक्षा कारणों और अतिक्रमण हटाने के लिए कानूनी बल का प्रयोग किया जाएगा।

निवासियों की पीड़ा: 'होली' और 'बोर्ड परीक्षाओं' के बीच उजाड़ने की तैयारी

बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए यह नोटिस किसी त्रासदी से कम नहीं है। निवासियों ने अपनी चिंताओं को कुछ इस तरह साझा किया है:

 * दूरी का संकट: सावदा घेवरा वर्तमान बस्ती से करीब 45 किलोमीटर दूर है। यहाँ रहने वाले ज्यादातर लोग आसपास के बंगलों में घरेलू सहायिका (Maid), धोबी या रेस कोर्स में काम करते हैं। इतनी दूर जाने का मतलब है उनकी आजीविका का पूरी तरह खत्म हो जाना।

 * बच्चों की पढ़ाई: मार्च का महीना बोर्ड परीक्षाओं और वार्षिक परीक्षाओं का होता है। निवासियों का कहना है कि 6 मार्च को घर टूटने का मतलब है बच्चों का पूरा साल बर्बाद होना।

 * त्योहार का समय: 3 मार्च को होली है। खुशियों के इस त्योहार के ठीक बाद अपने दशकों पुराने घरों को छोड़ने का आदेश मिलने से पूरे इलाके में मातम और गुस्से का माहौल है।

> "हम 40-50 सालों से यहाँ रह रहे हैं। हमारे आधार कार्ड, वोटर कार्ड सब यहीं के हैं। अचानक हमें शहर के दूसरे कोने पर फेंक देना कहाँ का न्याय है?" — एक स्थानीय निवासी

हाईकोर्ट में मामला और कानूनी पेंच

यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले 29 अक्टूबर 2025 को भी इन बस्तियों को हटाने का नोटिस दिया गया था, जिसे निवासियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

 * कोर्ट का रुख: नवंबर 2025 में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि बिना उचित प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों के निवासियों को बेदखल न किया जाए।

 * वर्तमान स्थिति: हालांकि सरकार ने अब फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सावदा घेवरा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और यह उनकी आजीविका के अधिकार का हनन है।

निष्कर्ष: सुरक्षा और संवेदना के बीच का संघर्ष

प्रधानमंत्री आवास के निकट होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इन बस्तियों को 'हाई रिस्क' मानती हैं। लेकिन सवाल उन हजारों जिंदगियों का है जो सालों से लुटियंस दिल्ली की सेवा में लगी हैं। क्या प्रशासन को विस्थापन के लिए गर्मियों की छुट्टियों या परीक्षाओं के खत्म होने का इंतजार नहीं करना चाहिए था?

फिलहाल, 6 मार्च की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, राम कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों की नजरें अब अदालत और सरकार की संवेदनशीलता पर टिकी हैं।


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