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PDS में बड़ा बदलाव: अब डिजिटल मुद्रा (CBDC) के जरिए मिलेगी खाद्य सब्सिडी, जानें नई व्यवस्था

04-05-2026

केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, कुशल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठा रही है। सरकार अब अपनी खाद्य सब्सिडी वितरण प्रणाली में सुधार करते हुए 'सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी' (CBDC) यानी ई-रुपी पर आधारित कार्यक्रम का विस्तार करने जा रही है। गुजरात और पुडुचेरी में इसके सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद, अब इस नई व्यवस्था को जून 2026 तक चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली तथा दमन और दीव में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

क्या है यह नई व्यवस्था और कैसे काम करेगी?

पारंपरिक PDS व्यवस्था में लाभार्थियों को राशन की दुकानों से सीधे खाद्यान्न (जैसे गेहूं, चावल, चीनी) प्राप्त होता है। नई CBDC-आधारित प्रणाली में इसमें एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया गया है:

• डिजिटल टोकन का हस्तांतरण: लाभार्थियों को अब भौतिक राशन के स्थान पर उनके आरबीआई (RBI) द्वारा संचालित डिजिटल मुद्रा वॉलेट में 'डिजिटल टोकन' प्रदान किए जाएंगे।

• सीधा लाभ: यह डिजिटल टोकन सीधे लाभार्थी के डिजिटल वॉलेट में जमा होंगे, जिसे वे अपनी पसंद के आधार पर निर्दिष्ट राशन दुकानों पर इस्तेमाल कर सकेंगे।

• स्वतंत्रता और पारदर्शिता: इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ लाभार्थियों को मिलने वाली स्वतंत्रता है। वे अब अपनी आवश्यकतानुसार डिजिटल टोकन का उपयोग करके राशन खरीद सकेंगे, जिससे भ्रष्टाचार और लीकेज की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और विस्तार का आधार

गुजरात और पुडुचेरी में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट्स ने सरकार का भरोसा बढ़ाया है। इन क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों के दौरान यह पाया गया कि:

1. लीकेज में कमी: बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से सब्सिडी का लाभ सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँच रहा है।

2. बेहतर रिकॉर्ड कीपिंग: ब्लॉकचेन और डिजिटल लेजर तकनीक पर आधारित होने के कारण, प्रत्येक लेनदेन का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध है, जिससे ऑडिट प्रक्रिया बेहद सरल हो गई है।

3. उपयोग में आसानी: लाभार्थियों ने डिजिटल वॉलेट और टोकन के माध्यम से लेनदेन को सुरक्षित और सुविधाजनक पाया है।

वैश्विक स्तर पर भारत की डिजिटल क्रांति

भारत की यह पहल वैश्विक स्तर पर 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) के क्षेत्र में एक मिसाल बन रही है। CBDC का उपयोग केवल वित्तीय लेनदेन तक सीमित न रखकर इसे खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्र से जोड़ना भारत की दूरदर्शिता को दर्शाता है। इससे सरकार को खाद्य सब्सिडी के प्रबंधन में वास्तविक समय (real-time) डेटा मिलेगा, जिससे भविष्य की नीतियों को और अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।

चुनौतियां और तैयारी

हालांकि, इस प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए सरकार कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान दे रही है:

• डिजिटल साक्षरता: दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लाभार्थियों को डिजिटल वॉलेट का उपयोग सिखाना एक प्राथमिकता है।

• इंटरनेट और बुनियादी ढांचा: राशन दुकानों पर निर्बाध डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सरकार स्थानीय स्तर पर तकनीकी अपग्रेडेशन कर रही है।

• सुरक्षा: लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट की सुरक्षा और साइबर हमलों से बचाव के लिए आरबीआई और संबंधित मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।

निष्कर्ष

यह बदलाव न केवल सरकारी सब्सिडी वितरण में आधुनिकीकरण लाएगा, बल्कि भारत को 'कैशलेस' और 'पेपरलेस' अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है। जून 2026 तक चंडीगढ़ और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में इसका कार्यान्वयन पूरे देश के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम करेगा। यदि यह विस्तार सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में संपूर्ण भारत में PDS का स्वरूप पूरी तरह डिजिटल हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा का दायरा और अधिक मजबूत होगा।

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