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NCERT का बड़ा फैसला: 2.25 लाख किताबें बाजार से वापस, 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाला चैप्टर हटाया
NCERT का बड़ा फैसला: 2.25 लाख किताबें बाजार से वापस, 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाला चैप्टर हटाया
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताबों को लेकर मचे बवाल के बाद एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति और शिक्षा मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद, विवादित सामग्री वाली सभी प्रतियों को बाजार और स्कूलों से वापस मंगा लिया गया है।
यह मामला भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के दो महत्वपूर्ण स्तंभों—न्यायपालिका और शिक्षा व्यवस्था के बीच उपजे तनाव को दर्शाता है।
क्या था पूरा विवाद?
NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 8 की राजनीति विज्ञान (Civics) की किताब में कुछ बदलाव किए थे। विवाद की मुख्य जड़ 'न्यायपालिका' (The Judiciary) नामक अध्याय में जोड़ा गया एक नया हिस्सा था:
* विवादित अंश: किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' और 'न्यायाधीशों की नियुक्ति में पारदर्शिता की कमी' जैसे विषयों पर एक विस्तृत सेक्शन शामिल किया गया था।
* सुप्रीम कोर्ट का ऐतराज: सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट का तर्क था कि बिना किसी ठोस डेटा या न्यायिक संदर्भ के, स्कूली बच्चों को न्यायपालिका के प्रति अविश्वास सिखाना 'संस्थागत गरिमा' के खिलाफ है।
* दलील: कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका के भीतर की कमियों पर बहस के लिए कॉलेज और कानून की पढ़ाई सही मंच है, न कि 13-14 साल के बच्चों की बुनियादी शिक्षा।
रिकॉल (Recall) के आंकड़े: मिशन मोड में कार्रवाई
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, NCERT ने इस गलती को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया है। किताबों की वापसी का विवरण कुछ इस प्रकार है:
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल छपी हुई प्रतियां | 2,25,000 |
| वेयरहाउस में वापस आई प्रतियां | 2,24,962 |
| बाजार/स्कूलों में पहुंची प्रतियां | 38 |
| रिकवरी का प्रतिशत | 99.98% |
नोट: प्रशासन उन 38 प्रतियों को भी ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है जो पहले ही बेची जा चुकी थीं, ताकि कोई भी बच्चा विवादित सामग्री न पढ़े।
अब आगे क्या होगा?
* संशोधित संस्करण (Revised Edition): NCERT अब इस विवादित हिस्से को हटाकर 'न्यायपालिका की कार्यप्रणाली' और 'कानूनी जागरूकता' पर केंद्रित नए पन्ने प्रिंट कर रही है।
* डिजिटल अपडेट: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध E-Books (PDF) से इस सेक्शन को तुरंत हटा दिया गया है।
* जिम्मेदारी तय करना: शिक्षा मंत्रालय ने एक आंतरिक समिति का गठन किया है जो यह जांच करेगी कि यह सामग्री 'रिव्यू कमेटी' की नजरों से कैसे बच निकली।
निष्कर्ष: शिक्षा में 'तथ्य बनाम धारणा' की बहस
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि स्कूली पाठ्यक्रम कितना संवेदनशील विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहाँ बच्चों को आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) सिखानी चाहिए, वहीं यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वे संवैधानिक संस्थाओं के प्रति नकारात्मक धारणा लेकर बड़े न हों।
