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ISRO ने AST SpaceMobile के लिए 'BlueBird Block-2' सैटेलाइट

28-12-2025

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी धाक जमाते हुए इतिहास रच दिया है। 24 दिसंबर 2025 को इसरो के सबसे भारी रॉकेट LVM3-M6 ने अमेरिकी कंपनी 'एएसटी स्पेसमोबाइल' (AST SpaceMobile) के 'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' (BlueBird Block-2) उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया। यह मिशन न केवल इसरो के लिए तकनीकी रूप से एक बड़ी जीत है, बल्कि यह वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में भारत के बढ़ते दबदबे का भी प्रमाण है।

🚀 मिशन की मुख्य विशेषताएं
इस मिशन को LVM3-M6/BlueBird Block-2 नाम दिया गया था। यह इसरो की वाणिज्यिक शाखा 'न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड' (NSIL) और अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौते का परिणाम है।
| विवरण | जानकारी |
| लॉंच तिथि | 24 दिसंबर 2025 |
| लॉन्च वाहन | LVM3-M6 (बाहुबली रॉकेट) |
| उपग्रह का वजन | लगभग 6,100 किलोग्राम (6.1 टन) |
| कक्षा (Orbit) | लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) - ~520 किमी |
| लॉन्च स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
🛰️ ब्लूबर्ड ब्लॉक-2: क्या है यह 'सुपर सैटेलाइट'?
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 कोई साधारण संचार उपग्रह नहीं है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह कहा जा रहा है।
 * विशाल आकार: इस उपग्रह का एंटीना एरे लगभग 2,400 वर्ग फुट (223 वर्ग मीटर) में फैला है, जो लगभग एक टेनिस कोर्ट के बराबर है।
 * डायरेक्ट-टू-मोबाइल तकनीक: इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सीधे आपके सामान्य स्मार्टफोन पर 4G और 5G कनेक्टिविटी प्रदान कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष सैटेलाइट फोन या बाहरी हार्डवेयर (जैसे डिश एंटीना) की आवश्यकता नहीं होगी।
 * वैश्विक कवरेज: यह उपग्रह उन दुर्गम क्षेत्रों, समुद्रों और ग्रामीण इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाएगा जहां मोबाइल टावर लगाना असंभव है।
🏗️ इसरो का 'बाहुबली' रॉकेट: LVM3 का रिकॉर्ड
LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3), जिसे 'बाहुबली' के नाम से भी जाना जाता है, इसरो का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इस मिशन के साथ इसने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए:
 * सबसे भारी पेलोड: 6,100 किलोग्राम का यह उपग्रह अब तक का सबसे भारी पेलोड है जिसे किसी भारतीय रॉकेट ने भारतीय धरती से लॉन्च किया है। इससे पहले का रिकॉर्ड लगभग 5.7 टन (OneWeb मिशन) का था।
 * लगातार सफलता: यह LVM3 की छठी परिचालन उड़ान (Operational Flight) थी। इसने साबित कर दिया कि भारत अब भारी उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए दुनिया का सबसे भरोसेमंद और किफायती केंद्र बन गया है।
 * तकनीकी सटीकता: इसरो प्रमुख के अनुसार, रॉकेट ने उपग्रह को निर्धारित कक्षा से मात्र कुछ मीटर के अंतर पर बिल्कुल सटीक तरीके से इंजेक्ट किया।
🌍 भारत और वैश्विक बाजार के लिए महत्व
यह मिशन केवल एक सफल लॉन्च नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम हैं:
 * विदेशी मुद्रा की कमाई: NSIL के माध्यम से इस तरह के बड़े वाणिज्यिक ऑर्डर भारत के लिए करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा लाते हैं।
 * SpaceX को चुनौती: भारी उपग्रहों के लॉन्च के लिए अब तक दुनिया मुख्य रूप से एलन मस्क की कंपनी SpaceX पर निर्भर थी। इसरो ने अब दिखा दिया है कि वह बड़े मिशनों को सफलतापूर्वक और कम लागत में पूरा कर सकता है।
 * स्मार्टफोन क्रांति: एएसटी स्पेसमोबाइल के इस मिशन से भविष्य में 'डेड जोन' (जहां सिग्नल नहीं आते) खत्म हो जाएंगे। यह आपदा प्रबंधन और आपातकालीन संचार के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
🏁 निष्कर्ष
इसरो द्वारा ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का सफल प्रक्षेपण भारतीय वैज्ञानिकों की अटूट मेहनत और भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक है। जिस तरह भारत ने चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई थी, उसी तरह अब 'कमर्शियल स्पेस मार्केट' में भी भारत एक ग्लोबल लीडर के रूप में उभरा है।

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