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पटना हॉस्टल कांड: DGP का सख्त फैसला

05-02-2026

बिहार के पटना में नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने एक कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाया है। यह मामला न केवल एक छात्रा की जान जाने से जुड़ा है, बल्कि पटना जैसे बड़े कोचिंग हब में चल रहे हॉस्टलों की सुरक्षा और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

पटना हॉस्टल कांड: DGP का सख्त फैसला

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई इस घटना ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे हॉस्टल प्रबंधन की घोर लापरवाही की ओर इशारा करते हैं।

1. लाइसेंस रद्द करने का आदेश

DGP विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल का संचालन अब पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

 * कार्रवाई: हॉस्टल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 * ब्लैकलिस्टिंग: हॉस्टल संचालिका को न केवल इस मामले में आरोपी बनाया गया है, बल्कि उन्हें भविष्य में पटना के किसी भी हिस्से में कोई भी हॉस्टल या लॉज चलाने से प्रतिबंधित (Blacklist) कर दिया गया है।

2. पुलिस को सूचना देने में देरी (Critical Delay)

पुलिस की जांच में यह सबसे संवेदनशील बिंदु बनकर उभरा है।

 * लापरवाही: घटना घटने और पुलिस को सूचित करने के बीच एक लंबा 'टाइम गैप' था।

 * गंभीरता: DGP ने इसे "अक्षम्य लापरवाही" माना है। कानूनी रूप से, किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में प्रबंधन का पहला कर्तव्य पुलिस और परिजनों को सूचित करना होता है। देरी को साक्ष्य मिटाने या मामले को दबाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पटना के हॉस्टलों के लिए 'वेक-अप कॉल'

पटना का बोरिंग रोड, राजीव नगर और कंकड़बाग इलाका हजारों छात्रों का घर है। इस कार्रवाई के बाद पूरे शहर के हॉस्टल संचालकों के लिए नए मानक तय किए जा रहे हैं।

| जांच के बिंदु | अब क्या अनिवार्य होगा? |

| पंजीकरण (Registration) | प्रत्येक हॉस्टल का विधिवत पंजीकरण और पुलिस वेरिफिकेशन। |

| सीसीटीवी (CCTV) | प्रवेश और निकास द्वार के साथ-साथ गलियारों में कैमरों की अनिवार्यता। |

| वार्डन की जवाबदेही | 24x7 वार्डन की उपस्थिति और आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन। |

| स्थानीय थाना संपर्क | हर हॉस्टल को संबंधित थाने के 'बीट ऑफिसर' के सीधे संपर्क में रहना होगा। |

कानूनी कार्रवाई का स्वरूप

हॉस्टल संचालिका के खिलाफ केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि आपराधिक धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया जा रहा है:

 * धारा 201 (IPC): साक्ष्य छुपाने या गलत सूचना देने के संदेह में।

 * लापरवाही से मौत (संभावित): यदि जांच में यह पाया गया कि समय पर अस्पताल ले जाने या मदद मिलने से छात्रा की जान बच सकती थी, तो धाराएं और सख्त की जाएंगी।

निष्कर्ष और संदेश

DGP विनय कुमार का यह एक्शन एक "नज़ीर" पेश करने की कोशिश है ताकि बिहार के किसी भी शैक्षणिक केंद्र में छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न हो। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि हॉस्टल चलाना केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि वहां रह रहे छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रबंधन की है।

> विशेष नोट: इस घटना के बाद, पटना प्रशासन अब शहर के सभी गर्ल्स हॉस्टलों का 'सेफ्टी ऑडिट' करने की योजना बना रह

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