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भारत-यूरोपीय संघ FTA: समझौतों की जटिल राह और एक साल का लंबा इंतज़ार

29-01-2026

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। लेकिन, जैसा कि हालिया रिपोर्टों से स्पष्ट है, यह प्रक्रिया जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही जटिल भी। 900 शब्दों के विस्तार में इस समझौते की प्रक्रिया, बाधाओं और इसके महत्व का विश्लेषण यहाँ प्रस्तुत है:

भारत-यूरोपीय संघ FTA: समझौतों की जटिल राह और एक साल का लंबा इंतज़ार

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चर्चा पिछले कई दशकों से चल रही है। 2013 में रुकी हुई बातचीत के 2022 में पुनर्जीवित होने के बाद, अब यह अपने निर्णायक चरण में पहुँचती दिख रही है। हालाँकि, यूरोपीय आयोग के हालिया बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हस्ताक्षर होने और इसके वास्तविक कार्यान्वयन (Implementation) के बीच अभी कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

1. कानूनी और भाषाई प्रक्रिया: एक बड़ी बाधा

यूरोपीय संघ कोई एक देश नहीं, बल्कि 27 देशों का एक संघ है। यहाँ किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को लागू करने के लिए एक बेहद सख्त और विस्तृत प्रक्रिया का पालन करना होता है।

 * कानूनी मसौदा (Legal Scrubbing): बातचीत पूरी होने के बाद, सबसे पहले एक विस्तृत ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाता है। इस ड्राफ्ट के हर शब्द और कानूनी पहलू की बारीकी से जांच की जाती है ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।

 * बहुभाषी अनुवाद: यूरोपीय संघ की 24 आधिकारिक भाषाएं हैं। नियम के अनुसार, किसी भी समझौते को तभी अंतिम रूप दिया जा सकता है जब उसका अनुवाद इन सभी भाषाओं में हो जाए। यह एक समय लेने वाली और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें महीनों का समय लगता है।

2. अनुमोदन की संवैधानिक प्रक्रिया

ड्राफ्ट तैयार होने और अनुवाद होने के बाद, फाइल यूरोपीय परिषद (European Council) के पास जाती है।

 * परिषद की भूमिका: परिषद में सभी 27 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यहाँ समझौते पर मुहर लगना अनिवार्य है। कई बार सदस्य देशों के बीच कृषि उत्पादों या श्रम कानूनों जैसे मुद्दों पर मतभेद होने के कारण यहाँ देरी की संभावना बनी रहती है।

 * यूरोपीय संसद का समर्थन: परिषद की मंजूरी के बाद, इसे यूरोपीय संसद में मतदान के लिए रखा जाता है। संसद यह देखती है कि क्या यह समझौता यूरोपीय संघ के मानवाधिकार, पर्यावरण और डिजिटल मानकों के अनुरूप है।

3. प्रमुख विवादित मुद्दे (Stumbling Blocks)

भारत और EU के बीच बातचीत में कुछ ऐसे बिंदु हैं जो अक्सर देरी का कारण बनते हैं:

 * कार्बन टैक्स (CBAM): यूरोपीय संघ का 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' भारतीय निर्यातकों (विशेषकर स्टील और एल्युमिनियम) के लिए एक चुनौती है। भारत इसे व्यापार बाधा के रूप में देखता है।

 * डेयरी और कृषि: भारत अपने छोटे किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी क्षेत्र को खोलने में संकोच करता है, जबकि EU यहाँ बाजार पहुंच चाहता है।

 * वीजा और श्रम गतिशीलता: भारत चाहता है कि उसके पेशेवरों (IT और हेल्थकेयर) के लिए यूरोप के बाजार आसान हों, जिसे लेकर EU के कुछ देशों में संरक्षणवादी रुख देखा जाता है।

4. आर्थिक महत्व: क्यों है यह समझौता जरूरी?

देरी के बावजूद, यह समझौता दोनों पक्षों के लिए 'विन-विन' स्थिति है।

 * भारत के लिए: EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। FTA लागू होने से भारतीय कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण उद्योग को यूरोपीय बाजारों में शून्य शुल्क (Zero Duty) पर पहुंच मिलेगी। यह 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक स्तर पर मजबूती देगा।

 * EU के लिए: यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे विशाल और बढ़ते मध्यम वर्ग वाले बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, वाइन और उच्च तकनीक वाली मशीनों के निर्यात में बड़ी वृद्धि की संभावना है।

5. आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण (Supply Chain Diversification)

वैश्विक राजनीति के बदलते दौर में, EU अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। भारत को एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक भागीदार (Trusted Partner) के रूप में देखा जा रहा है। यह FTA केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के बारे में भी है।

6. निष्कर्ष: धैर्य की आवश्यकता

यूरोपीय आयोग का यह कहना कि इसमें एक साल लग सकता है, दरअसल एक यथार्थवादी आकलन है। भारत के लिए यह समय अपनी घरेलू नीतियों और उत्पादन मानकों को यूरोपीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने का एक अवसर है। भले ही शुक्रवार या अगले कुछ महीनों में कागजी कार्रवाई पूरी न हो, लेकिन इस समझौते की दिशा सही है।

अगले एक साल में हम देखेंगे कि कैसे नौकरशाही की परतें हटती हैं और दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक बाजार एक-दूसरे के करीब आते हैं।


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