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CM पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को मिलेगी जेड+ सुरक्षा: सत्ता बदलेगी, सुरक्षा नहीं

02-04-2026

बिहार की राजनीति में एक युग का अंत और एक नई शुरुआत होने जा रही है। लंबे समय तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार अब राज्य की राजनीति से निकलकर देश की संसद यानी राज्यसभा के सफर पर निकलने को तैयार हैं। लेकिन इस सत्ता हस्तांतरण के बीच जो एक चीज स्थिर रहने वाली है, वह है उनकी सुरक्षा। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार 'जेड प्लस' (Z+) श्रेणी की सुरक्षा घेरे में रहेंगे। गृह विभाग की विशेष शाखा ने बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के प्रावधानों के तहत इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।

क्या है नया आदेश और इसका आधार?

नीतीश कुमार वर्तमान में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और ऐसी प्रबल संभावना है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। सामान्यतः पद छोड़ने के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव होता है, लेकिन नीतीश कुमार के मामले में नियमों को उनकी सुरक्षा संवेदनशीलता के आधार पर बरकरार रखा गया है।

गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नीतीश कुमार को यह सुरक्षा बिहार विशेष सुरक्षा समूह (BSG) और राज्य पुलिस के समन्वय से प्रदान की जाएगी। इसका मुख्य आधार उनकी सुरक्षा को लेकर खुफिया एजेंसियों का 'थ्रेट परसेप्शन' (खतरे का आकलन) है। एक मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कई कड़े फैसले लिए हैं, जिसके कारण उन्हें पद पर न रहने की स्थिति में भी उच्च स्तरीय सुरक्षा की आवश्यकता महसूस की गई है।

बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 की भूमिका

बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों और महत्वपूर्ण हस्तियों की सुरक्षा का निर्धारण बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत होता है। इस कानून में यह प्रावधान है कि राज्य सरकार सुरक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को उसकी सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जेड प्लस या अन्य उच्च श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

नीतीश कुमार के मामले में यह तर्क दिया गया है कि:

 * वे राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक हैं।

 * उनके कार्यकाल के दौरान नक्सली आंदोलनों और संगठित अपराध के खिलाफ कड़े अभियान चलाए गए।

 * वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में उनकी जान को जोखिम का स्तर 'अत्यधिक उच्च' श्रेणी में आता है।

क्या होती है जेड प्लस (Z+) सुरक्षा?

जेड प्लस सुरक्षा भारत में सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। इसमें सुरक्षा का जो चक्र होता है, उसे भेद पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है। नीतीश कुमार के लिए प्रस्तावित सुरक्षा घेरे में निम्नलिखित विशेषताएं होंगी:

| सुरक्षा के घटक | विवरण |

|---|---|

| कुल सुरक्षाकर्मी | लगभग 36 से 55 सशस्त्र जवान। |

| विशेष कमांडो | इसमें एनएसजी (NSG) या बिहार पुलिस के विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो शामिल होते हैं। |

| एस्कॉर्ट वाहन | काफिले में दो से तीन पायलट और एस्कॉर्ट वाहन हमेशा तैनात रहते हैं। |

| निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) | चौबीसों घंटे साये की तरह साथ रहने वाले हथियारबंद सुरक्षाकर्मी। |

| तकनीकी गैजेट्स | काफिले में जैमर और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस वाहन। |

नीतीश कुमार का नया सफर: पटना से दिल्ली तक

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। उनके इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनेंगे, लेकिन एक सांसद के तौर पर भी दिल्ली और पटना के बीच उनकी आवाजाही बनी रहेगी। गृह विभाग के इस आदेश का अर्थ यह है कि वे चाहे बिहार में रहें या दिल्ली में, उनकी सुरक्षा का स्तर 'जेड प्लस' ही रहेगा।

राज्य सरकार के इस फैसले को राजनीतिक गलियारों में "सम्मान और सुरक्षा के संतुलन" के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर सेवानिवृत्त या पद छोड़ने वाले नेताओं की सुरक्षा कम कर दी जाती है, लेकिन नीतीश कुमार की विशिष्ट स्थिति और राज्य में उनके प्रभाव को देखते हुए नियमों के दायरे में रहकर यह फैसला लिया गया है।

सुरक्षा पर आने वाला खर्च और व्यवस्था

इतनी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करती है। इसमें न केवल जवानों का वेतन, बल्कि वाहनों का रखरखाव, आवास की सुरक्षा और यात्रा के दौरान सुरक्षा इंतजाम भी शामिल हैं। विशेष शाखा (Special Branch) समय-समय पर इस सुरक्षा की समीक्षा करती रहेगी। यदि भविष्य में खतरे का स्तर कम होता है, तो सुरक्षा समिति इसमें बदलाव कर सकती है, लेकिन फिलहाल के लिए नीतीश कुमार के लिए अभेद्य दुर्ग तैयार कर दिया गया है।

निष्कर्ष

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटना महज एक पद का त्याग नहीं, बल्कि बिहार के राजनीतिक इतिहास के एक अध्याय का समापन है। गृह विभाग का यह आदेश स्पष्ट करता है कि राज्य अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहा है। जेड प्लस सुरक्षा का यह कवच न केवल उन्हें शारीरिक सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि यह उनके राजनीतिक कद और उनके द्वारा किए गए कार्यों की संवेदनशीलता को भी रेखांकित करता है।

अब सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हैं, जहाँ नीतीश कुमार अपना इस्तीफा सौंपेंगे और उसके बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में, लेकिन 'जेड प्लस' सुरक्षा के साथ, अपनी नई पारी का आगाज करेंगे।

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