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19 मई को लेकर देश के एक बड़े हिस्से में मौसम के बेहद आक्रामक रुख की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 19 मई को लेकर देश के एक बड़े हिस्से में मौसम के बेहद आक्रामक रुख की चेतावनी जारी की है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच, देश के करीब 17 राज्यों में अचानक मौसम पलटने वाला है। उत्तर पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के ऊपर एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण विकसित हुआ है। इस प्रणाली के प्रभाव के कारण पूर्वी भारत सहित देश के 17 राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक, और तीव्र धूल भरी आंधी चलने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस मौसमी उथल-पुथल के दौरान हवाओं की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस चेतावनी को देखते हुए किसानों, मछुआरों और पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतने और बिना आपातकालीन कारणों के घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
मुख्य प्रभावित क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण का असर
इस मौसमी बदलाव का मुख्य केंद्र पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी आ रही है। इसके साथ ही दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के पास भी एक अन्य परिसंचरण सक्रिय है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से मैदानी इलाकों में हवा का दबाव तेजी से बदला है।
इन 17 राज्यों के लिए जारी हुआ अलर्ट:
मौसम विभाग द्वारा चिन्हित किए गए प्रभावित राज्यों की सूची में उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक के राज्य शामिल हैं:
• उत्तर और मध्य भारत: उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़।
• पहाड़ी क्षेत्र: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, और लद्दाख।
• पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, और नागालैंड।
• दक्षिण भारत: तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश।
इन सभी राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों के भीतर मौसम में तीव्र बदलाव, आसमान में काले बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।
उत्तर प्रदेश और बिहार में विशेष चेतावनी
उत्तर प्रदेश और बिहार इस चक्रवाती परिसंचरण के सीधे प्रभाव क्षेत्र में हैं। जहाँ एक तरफ इन राज्यों के कुछ पश्चिमी हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ कई जिलों में तेज आंधी-तूफान तबाही मचा सकता है।
उत्तर प्रदेश का हाल:
यूपी के पूर्वांचल और मध्य इलाकों जैसे वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, मऊ, रायबरेली, कानपुर और बांदा में हल्की से मध्यम बारिश और 30 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी यूपी (मेरठ, मथुरा, अलीगढ़) में धूल भरी आंधी चलने की आशंका है।
बिहार में भारी तबाही की आशंका:
बिहार के लिए मौसम विभाग ने बेहद गंभीर अलर्ट जारी किया है। राज्य के गया, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में भारी बारिश के साथ 70 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने यहाँ वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की भी भारी आशंका जताई है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
किसानों, मछुआरों और पहाड़ी यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी
मौसम में होने वाले इस अचानक और तीव्र बदलाव के मद्देनजर प्रशासन और मौसम विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
1. किसानों के लिए सलाह
इस समय खेतों में रबी की फसलों की मड़ाई का काम अंतिम चरणों में है, और कई किसान गर्मियों की सब्जियों या बागवानी (जैसे आम और लीची) की फसलों की देखरेख में लगे हैं। 80 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
• किसान भाई कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों या मंडियों में पहुंचाएं।
• कटी फसल को तिरपाल या वाटरप्रूफ शीट से ढक कर रखें।
• आंधी-तूफान के दौरान खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव या सिंचाई का काम पूरी तरह रोक दें।
• आम और लीची के बागवानों को सलाह है कि वे तैयार फलों को समय से पहले तोड़ लें, क्योंकि तेज आंधी से फल टूटकर गिर सकते हैं।
2. मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी
आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में समुद्र के भीतर तेज हलचल और ऊंची लहरें उठने की आशंका है।
• मछुआरों को 19 और 20 मई को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
• जो मछुआरे पहले से गहरे समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत निकटतम तट पर लौटने का निर्देश दिया गया है।
• तटीय पर्यटन और नौकायन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
3. पहाड़ी यात्रियों और पर्यटकों के लिए निर्देश
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में प्री-मानसून की तेज बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।
• पर्यटकों को पहाड़ी राजमार्गों (जैसे गंगटोक, चेरापूंजी, शिमला या श्रीनगर मार्ग) पर यात्रा टालने की सलाह दी गई है।
• अचानक आने वाली बाढ़ की स्थिति से बचने के लिए नदी और झरनों के किनारे टेंट लगाने या रुकने से बचें।
• यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के 'Nowcast' पोर्टल से लाइव अपडेट जरूर लें।
आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली से बचाव के उपाय
चक्रवाती परिसंचरण के कारण बड़े पैमाने पर गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। खुद को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
महत्वपूर्ण सुरक्षा नियम:
• घरों के अंदर रहें: जब आंधी या बिजली कड़कने की शुरुआत हो, तो तुरंत किसी पक्के मकान या शेल्टर में शरण लें।
• पेड़ों और खंभों से दूर रहें: आंधी के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर इमारतों के नीचे कतई खड़े न हों। ये हवा के दबाव से गिर सकते हैं।
• इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग बंद करें: घर के भीतर रहने पर टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे उपकरणों के प्लग निकाल दें। बिजली कड़कने के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल खिड़की के पास खड़े होकर न करें।
• वाहनों को सुरक्षित पार्क करें: यदि आप गाड़ी चला रहे हैं, तो उसे किसी खुले स्थान पर रोक लें, लेकिन किसी बड़े होर्डिंग या पेड़ के नीचे पार्क न करें।
निष्कर्ष: राहत और आफत का मिलाजुला असर
यह मौसमी बदलाव देश के लिए दोतरफा साबित होने वाला है। एक तरफ जहाँ उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाके (जैसे दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश) 45°C से 47°C की भीषण गर्मी और गंभीर हीटवेव से झुलस रहे हैं, वहाँ इस आंधी-बारिश से तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी, जिससे लोगों को चुभती गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
