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12 अगस्त 2026: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण

25-02-2026

खगोल विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 की खगोलीय घटनाएं काफी महत्वपूर्ण होने वाली हैं। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को बीत चुका है, जो भारत में अदृश्य था। अब सबकी नजरें साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर टिकी हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि खगोलीय घटना के रूप में भी बेहद खास होने वाला है।

12 अगस्त 2026: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इस दिन हरियाली अमावस्या भी है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होने की संभावना है, जो दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा।

ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)

भारत में यह ग्रहण रात के समय शुरू होगा, इसलिए मुख्य दृश्यता (Visibility) अन्य देशों में अधिक होगी, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसका समय इस प्रकार है:

 * ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त, रात 9:45 बजे

 * ग्रहण का मध्य (चरम): 12 अगस्त की मध्यरात्रि के आसपास

 * ग्रहण का समापन: 13 अगस्त, सुबह 4:25 बजे

क्या भारत में दिखेगा असर?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह भारत में दिखाई देगा? 17 फरवरी के ग्रहण के विपरीत, 12 अगस्त को होने वाले इस ग्रहण का आंशिक असर भारत के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है।

 * सूतक काल: चूंकि यह ग्रहण रात में शुरू होकर अगली सुबह तक चलेगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य होगा।

 * सूतक का समय: आमतौर पर सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है। ऐसे में 12 अगस्त की सुबह से ही सूतक के नियम लागू हो सकते हैं।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का लगना एक दुर्लभ संयोग है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या तिथि पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

 * सूतक काल में सावधानियां: सूतक लगने के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ वर्जित होता है, हालांकि मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

 * गर्भवती महिलाओं के लिए: ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर निकलने या नुकीली चीजों (चाकू, कैंची) का उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है।

 * ग्रहण के बाद: 13 अगस्त की सुबह ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य अनुसार दान करना शुभ माना जाएगा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। खगोलविद इस दौरान सूर्य के कोरोना (Corona) का अध्ययन करने के लिए विशेष तैयारी कर रहे हैं।

प्रमुख जानकारी एक नजर में:

| विवरण | जानकारी |

|---|---|

| तारीख | 12 अगस्त 2026 |

| दिन | बुधवार (हरियाली अमावस्या) |

| प्रारंभ समय | रात 09:45 PM |

| समापन समय | सुबह 04:25 AM (13 अगस्त) |

| सूतक काल | मान्य होगा |

निष्कर्ष

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय प्रेमियों और आस्था रखने वालों, दोनों के लिए बड़ा अवसर है। यदि आप इसे टेलीस्कोप या विशेष चश्मे से देखना चाहते हैं, तो भारत के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में इसके कुछ अंश दिखाई दे सकते हैं, बशर्ते मौसम साफ रहे।


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