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अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग हो गया
वैश्विक स्वास्थ्य राजनीति में एक बड़े उलटफेर के रूप में, 22 जनवरी 2026 को अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन (20 जनवरी 2025) इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी एक साल की नोटिस अवधि कल पूरी हो गई।
अमेरिका के बाहर निकलने के 3 मुख्य कारण
* कोविड-19 प्रबंधन में विफलता: ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि WHO ने महामारी की शुरुआत में चीन का पक्ष लिया और दुनिया को चेतावनी देने में देरी की, जिससे अमेरिका को खरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
* सुधारों का अभाव: अमेरिका लंबे समय से संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा था। विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के अनुसार, संगठन ने जरूरी सुधारों को नजरअंदाज किया।
* असमान फंडिंग: अमेरिका का तर्क है कि वह संगठन का सबसे बड़ा डोनर रहा है, जबकि चीन जैसे देश कम योगदान देकर भी संगठन पर अनुचित प्रभाव डालते हैं।
बकाया राशि का विवाद: ₹2300 करोड़+ का पेंच
अमेरिका के इस फैसले के साथ एक बड़ा वित्तीय विवाद भी जुड़ा है:
* बकाया राशि: WHO के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका पर वर्ष 2024 और 2025 के लिए लगभग 260 से 280 मिलियन डॉलर (करीब 2100 से 2380 करोड़ रुपये) का बकाया है।
* अमेरिका का रुख: अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ कर दिया है कि वह इस राशि का भुगतान नहीं करेगा। उनका कहना है कि "अमेरिकी करदाताओं ने पहले ही इस संगठन को पर्याप्त भुगतान कर दिया है, जिसकी विफलता की कीमत बहुत भारी रही है।"
* कानूनी अड़चन: WHO के नियमों के अनुसार, सदस्यता छोड़ने से पहले सभी वित्तीय देनदारियों को पूरा करना अनिवार्य है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे मानने से इनकार कर दिया है।
अब आगे क्या?
* प्रभाव: अमेरिका के हटने से WHO के कुल बजट का लगभग 20% हिस्सा कम हो जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन और टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों पर बुरा असर पड़ सकता है।
* विकल्प: व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि वह अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में सीधे अन्य देशों (Bilateral Agreements) के साथ मिलकर काम करेगा, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय 'मिडलमैन' (WHO) के जरिए।
* आर्टेमिस और स्वास्थ्य: अमेरिका अब अपना ध्यान 'बायो-सिक्योरिटी' और स्वतंत्र स्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित करेगा।
निष्कर्ष
1948 में स्थापना के बाद से अमेरिका WHO का सबसे प्रभावशाली सदस्य रहा है। उसका बाहर निकलना वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग (Global Health Cooperation) के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है।
