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भारत को झटका: SEZ आवंटन रद्द
बांग्लादेश से आ रही यह खबर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। शेख हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का झुकाव चीन की ओर बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है।
भारत को झटका: SEZ आवंटन रद्द
चटगांव (Mirsharai) में लगभग 850 एकड़ जमीन भारत को 'स्पेशल इकोनॉमिक जोन' (SEZ) विकसित करने के लिए दी गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को वहां निवेश करने और लॉजिस्टिक्स सुविधा प्रदान करना था।
* ताजा स्थिति: यूनुस सरकार ने इस जमीन का आवंटन रद्द कर दिया है।
* चीन का प्रवेश: अब यह जमीन चीन को सौंप दी गई है, जहाँ वह एक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री स्थापित करेगा।
रक्षा क्षेत्र में चीन की बढ़ती पैठ
सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि रक्षा सौदों में भी चीन ने बांग्लादेश के साथ अपनी पकड़ मजबूत की है:
* ड्रोन फैक्ट्री: इस 850 एकड़ की जमीन पर ड्रोन उत्पादन इस साल (2026) के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
* फाइटर जेट डील: चीन बांग्लादेश को 20 J-10CE फाइटर जेट की आपूर्ति करेगा। यह डील पहले ही हो चुकी है और इसकी डिलीवरी भी इसी साल के अंत से शुरू होने वाली है।
भारत के लिए रणनीतिक चिंताएं (Strategic Concerns)
बांग्लादेश का यह कदम भारत के लिए "चिकन नेक" (Siliguri Corridor) और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है:
* मिरसराय की स्थिति: चटगांव का यह इलाका बंगाल की खाड़ी के बेहद करीब है। यहाँ चीन की मौजूदगी का मतलब है कि वह भारतीय नौसेना की गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकेगा।
* ड्रोन तकनीक: चीन द्वारा बांग्लादेश की धरती पर ड्रोन बनाना भारत की सीमा सुरक्षा (Border Security) के लिए नया खतरा पैदा कर सकता है।
* चीन की 'मोतियों की माला' (String of Pearls): यह कदम भारत को चारों तरफ से घेरने की चीन की पुरानी रणनीति का हिस्सा नजर आता है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य
| पक्ष | स्थिति |
| बांग्लादेश (यूनुस सरकार) | "संतुलन" बनाने के नाम पर चीन के निवेश और सैन्य तकनीक को प्राथमिकता दे रही है। |
| चीन | बांग्लादेश की आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर अपनी सैन्य और औद्योगिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। |
| भारत | फिलहाल "इंतजार करो और देखो" (Wait and Watch) की स्थिति में है, लेकिन राजनयिक स्तर पर इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। |
यह घटनाक्रम दिखाता है कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। चीन की यह सक्रियता न केवल व्यापारिक है, बल्कि गहरे रक्षा हितों से जुड़ी है।
