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बिहार की राजनीति में नया उबाल: राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस और '10 सर्कुलर रोड' का इतिहास

30-05-2026

बिहार की राजनीति और पटना के वीवीआईपी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल की वरिष्ठ नेत्री राबड़ी देवी को एक बार फिर उनका प्रसिद्ध सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। राज्य की वर्तमान सम्राट चौधरी सरकार (एनडीए गठबंधन) के कार्यकाल में भवन निर्माण विभाग ने यह कदम उठाया है।

विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, पटना के अति-विशिष्ट इलाके में स्थित '10 सर्कुलर रोड' बंगले को अब राज्य सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। यह बंगला पिछले लगभग दो दशकों से लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनके परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। इस नोटिस के बाद बिहार की सियासत में 'बंगला पॉलिटिक्स' एक बार फिर गरमा गई है।

दो दशकों के इतिहास का अंत: लालू परिवार का पावर सेंटर रहा है '10 सर्कुलर रोड'

पटना का '10 सर्कुलर रोड' केवल एक सरकारी आवास नहीं है, बल्कि यह पिछले 20 वर्षों से बिहार की राजनीति का एक सबसे बड़ा 'पावर सेंटर' (सत्ता का केंद्र) रहा है।

• 20 साल का सफर: साल 2005 में जब राबड़ी देवी की सरकार चली गई, उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से उन्हें यह बंगला आवंटित किया गया था। तब से लेकर आज तक, लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सहित पूरा परिवार इसी परिसर में रह रहा है।

• ऐतिहासिक फैसलों का गवाह: राष्ट्रीय जनता दल के तमाम बड़े गठबंधन, चुनावी रणनीतियां, विधायकों की बैठकें और इफ्तार पार्टियां इसी बंगले के लॉन में आयोजित होती रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बंगले के साथ लालू परिवार और राजद कार्यकर्ताओं का गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।

नोटिस की पृष्ठभूमि: पहले भी मिल चुके हैं आदेश

भवन निर्माण विभाग द्वारा राबड़ी देवी को आवास खाली करने का यह पहला नोटिस नहीं है। इससे पहले भी जब-जब बिहार की सत्ता के समीकरण बदले हैं, इस बंगले के आवंटन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक खींचतान देखने को मिली है।

विभाग का तर्क है कि नियमों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों के आजीवन सरकारी बंगला पाने के अधिकार को देश की शीर्ष अदालतों के फैसलों के बाद सीमित कर दिया गया है। वर्तमान में राबड़ी देवी बिहार विधान परिषद की सदस्य हैं, और एक एमएलसी के नाते उन्हें इस श्रेणी का (अति-विशिष्ट) बंगला आवंटित नहीं रखा जा सकता। यही वजह है कि सम्राट सरकार के निर्देश पर विभाग ने अब इस बंगले को वरिष्ठ मंत्री नंदकिशोर राम के नाम पर अलॉट कर दिया है।

39 हार्डिंग रोड: नीतीश कुमार ने दिया था नया विकल्प

इस विवाद का एक पहलू यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान लालू परिवार की सुरक्षा और वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए एक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई थी।

39 हार्डिंग रोड का आवंटन: नीतीश सरकार ने राबड़ी देवी के परिवार के लिए '39 हार्डिंग रोड' पर एक नया और आलीशान बंगला आवंटित किया था। प्रशासन की योजना थी कि लालू परिवार '10 सर्कुलर रोड' को खाली कर इस नए पते पर शिफ्ट हो जाए।

क्यों नहीं हुआ शिफ्टिंग?

सरकारी दस्तावेजों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, 39 हार्डिंग रोड पर बंगला तैयार होने और आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लालू परिवार अभी तक वहां शिफ्ट नहीं हुआ है। इसके पीछे सुरक्षा कारणों, वास्तु, और पुराने बंगले से जुड़े दो दशक पुराने राजनीतिक व व्यक्तिगत जुड़ाव को मुख्य वजह माना जाता रहा है। लेकिन अब नए मंत्री को आवंटन होने के बाद, प्रशासन का दबाव काफी बढ़ गया है।

आगे क्या होगा? कानूनी और राजनीतिक विकल्प

इस नोटिस के बाद राष्ट्रीय जनता दल और सत्ताधारी गठबंधन के बीच जुबानी जंग तेज होना तय है। राबड़ी देवी और उनके विधिक सलाहकारों के पास इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ सीमित विकल्प मौजूद हैं:

1. न्यायालय का रुख करना: लालू परिवार इस बेदखली नोटिस के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकता है, जिसमें वे राबड़ी देवी की सुरक्षा (Z+ श्रेणी) और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर स्टे (रोक) की मांग कर सकते हैं।

2. सम्राट सरकार से अतिरिक्त समय की मांग: प्रशासनिक स्तर पर आवेदन देकर परिवार शिफ्टिंग के लिए कुछ महीनों की अतिरिक्त मोहलत मांग सकता है।

3. नई जगह पर शिफ्ट होना: यदि कानूनी राहत नहीं मिलती है, तो परिवार को आखिरकार 39 हार्डिंग रोड स्थित नए बंगले में जाना ही होगा।

निष्कर्ष

प्रशासनिक नियमों के तहत सरकारी बंगलों का आवंटन और रद्दीकरण एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जब बात लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी जैसे कद्दावर नेताओं की हो, तो यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। '10 सर्कुलर रोड' से लालू परिवार की विदाई बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय के बदलने जैसी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष में बैठी राजद इस प्रशासनिक कार्रवाई का जवाब सड़क पर और आगामी चुनावों में किस तरह देती है।

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