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आकाश का नया रक्षक: भारत का VSHORADS परीक्षण सफल, अब दुश्मन के ड्रोन और जेट का बचना नामुमकिन

28-02-2026

आकाश का नया रक्षक: भारत का VSHORADS परीक्षण सफल, अब दुश्मन के ड्रोन और जेट का बचना नामुमकिन

नई दिल्ली/चांदीपुर | 28 फरवरी, 2026

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित 'वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम' (VSHORADS) का एक और सफल परीक्षण कर अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया है।

ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से किए गए इस परीक्षण ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेना अब ऊंचाइयों पर उड़ने वाले दुश्मन के विमानों और छोटे ड्रोन्स को पलक झपकते ही मिट्टी में मिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दोहरा परीक्षण: सटीकता की गारंटी

VSHORADS की मारक क्षमता और तकनीकी बारीकियों को परखने के लिए डीआरडीओ ने कड़ा रुख अपनाया है।

 * प्रथम परीक्षण: इस महीने की शुरुआत में 3 फरवरी को सिस्टम का पहला सफल परीक्षण किया गया था।

 * पुनः सत्यापन (Verification): कल, 27 फरवरी को एक बार फिर से इस मिसाइल प्रणाली का परीक्षण किया गया ताकि इसके रडार ट्रैकिंग, कंट्रोल सिस्टम और टारगेट हिटिंग क्षमता को अंतिम रूप से वेरिफाई किया जा सके। दोनों ही परीक्षणों में मिसाइल ने अपने लक्ष्य को पूरी सटीकता के साथ नष्ट किया।

कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मौत: क्या है VSHORADS?

VSHORADS (Very Short Range Air Defence System) एक 'मैन-पोर्टेबल' (Man-Portable) एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका मतलब है कि इसे एक या दो सैनिक आसानी से अपने कंधे पर रखकर युद्ध के मैदान में कहीं भी ले जा सकते हैं और दाग सकते हैं।

 * प्रेरणा: यह प्रणाली अमेरिका के मशहूर 'स्टिंगर' (Stinger) मिसाइल सिस्टम की तरह काम करती है, जिसका उपयोग यूक्रेन युद्ध में रूसी विमानों के खिलाफ काफी प्रभावी रहा है।

 * तकनीक: इसमें अत्याधुनिक 'इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर' (IIR Seeker) लगा है, जो दुश्मन के विमान से निकलने वाली गर्मी (Heat) को पहचान कर उसका पीछा करता है।

 * विशेषता: यह हाई-स्पीड जेट, हेलीकॉप्टर और आज के दौर के सबसे बड़े खतरे यानी छोटे ड्रोन्स (Small Drones) को पल भर में मार गिराने में सक्षम है।

S-400 की बचत और रणनीतिक फायदा

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि VSHORADS के आने से भारतीय सेना की युद्ध नीति में बड़ा बदलाव आएगा।

 * किफायती समाधान: वर्तमान में भारत के पास S-400 जैसी दुनिया की सबसे महंगी और घातक मिसाइल प्रणालियां हैं। लेकिन छोटे ड्रोन्स या कम दूरी के लक्ष्यों के लिए करोड़ों रुपये की S-400 मिसाइल दागना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा है। VSHORADS इस गैप को भरेगा।

 * हिमालयी क्षेत्रों में वरदान: एलएसी (LAC) जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भारी मशीनें ले जाना मुश्किल होता है। वहां सैनिक इस हल्के वजन वाली मिसाइल को कंधे पर रखकर किसी भी चोटी से दुश्मन का विमान गिरा सकते हैं।

 * सुरक्षा की कई परतें: यह भारत के 'मल्टी-लेयर' एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे महत्वपूर्ण और आखिरी परत (Last line of defense) होगी।

स्वदेशी ताकत का उदय

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मिसाइल को विशेष रूप से भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह अत्यधिक ठंडे सियाचिन के तापमान से लेकर रेगिस्तान की तपती गर्मी तक, हर मौसम में सटीक वार करने के लिए डिजाइन की गई है।

प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों की टीम को बधाई देते हुए इसे 'मेक इन इंडिया' की एक शानदार मिसाल बताया है। अब जल्द ही इस सिस्टम के बड़े पैमाने पर उत्पादन और सेना में शामिल होने (Induction) की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।


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