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आरबीआई का नया प्रस्ताव: उच्च मूल्य वाले UPI लेनदेन को सुरक्षित बनाने की ओर क्रांतिकारी कदम।
आरबीआई (RBI) द्वारा प्रस्तावित नया यूपीआई नियम डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाने और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। हाल ही में (अप्रैल 2026) आरबीआई ने एक चर्चा पत्र जारी कर उच्च मूल्य के लेनदेन के लिए नए सुरक्षा मानकों का प्रस्ताव रखा है।
समय का अंतराल ; ₹10,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन (जैसे UPI या IMPS) पर एक घंटे का अनिवार्य 'कुलिंग पीरियड' या विलंब प्रस्तावित किया गया है। (ध्यान दें: कुछ शुरुआती चर्चाओं में यह 4 घंटे था, लेकिन आधिकारिक प्रस्ताव में मुख्य फोकस एक घंटे के बफर पर है)।
किन पर लागू होगा: यह नियम मुख्य रूप से दो व्यक्तियों के बीच (P2P) होने वाले उन लेनदेन पर लागू हो सकता है जो पहली बार किए जा रहे हैं या जो संदिग्ध श्रेणी में आते हैं।
रद्द करने का विकल्प: इस एक घंटे के दौरान भेजने वाले के पास लेनदेन को सत्यापित करने या धोखाधड़ी का संदेह होने पर उसे रद्द करने का विकल्प रहेगा।
छूट : यह नियम मर्चेंट पेमेंट्स (दुकानों पर भुगतान), ई-मैंडेट, चेक और विश्वसनीय संपर्कों के लिए लागू नहीं होगा।
इस नियम की आवश्यकता क्यों?
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल धोखाधड़ी का मूल्य वर्ष 2025 में लगभग ₹22,931 करोड़ तक पहुँच गया है।
| विवरण | सांख्यिकी (डाटा) |
| धोखाधड़ी का मूल्य | ₹10,000+ के लेनदेन कुल धोखाधड़ी के मूल्य का 98.5% हिस्सा हैं। |
| धोखाधड़ी की संख्या | ₹10,000+ के लेनदेन कुल केसों का लगभग 45% हैं। |
| कारण | तकनीकी खराबी के बजाय सोशल इंजीनियरिंग (डरा-धमका कर या लालच देकर पैसे ट्रांसफर करवाना)। |
सुरक्षा के अन्य आगामी उपाय (अप्रैल 2026 से प्रभावी)
आरबीआई ने 1 अप्रैल 2026 से 'डिजिटल भुगतान लेनदेन के लिए प्रमाणीकरण तंत्र' के तहत कुछ और कड़े नियम भी लागू किए हैं:
1. बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण ; अब केवल यूपीआई पिन काफी नहीं होगा। उच्च जोखिम वाले लेनदेन के लिए बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/फेस आईडी) या डिवाइस-आधारित अप्रूवल जैसे दो अलग-अलग कारकों की आवश्यकता होगी।
2. किल स्विच : ग्राहकों को एक ऐसा 'किल स्विच' दिया जाएगा जिससे वे एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों (यूपीआई, नेट बैंकिंग आदि) को तुरंत बंद कर सकेंगे।
3. वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा: ₹50,000 से अधिक के ट्रांसफर के लिए वरिष्ठ नागरिकों को एक 'विश्वसनीय व्यक्ति' से अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता का प्रस्ताव भी दिया गया है।
