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नए साल में लोन होगा सस्ता: RBI दे सकता है 0.50% की राहत, होम और ऑटो लोन की EMI घटेगी
नए साल में लोन होगा सस्ता: RBI दे सकता है 0.50% की राहत, होम और ऑटो लोन की EMI घटेगी
मध्यम वर्ग और कर्जदारों के लिए साल 2026 की शुरुआत बड़ी खुशखबरी के साथ होने वाली है। वित्तीय विशेषज्ञों और IIFL कैपिटल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नए साल की पहली छमाही में ब्याज दरों (Repo Rate) में 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) की और कटौती कर सकता है।
यह कटौती उन लोगों के लिए बड़ी राहत होगी जो लंबे समय से महंगी EMI का बोझ सह रहे हैं। आइए समझते हैं कि IIFL कैपिटल की रिपोर्ट क्या कहती है और रेट कट की संभावना क्यों इतनी प्रबल है।
2025 का सफर और 2026 की उम्मीदें
गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने पहले ही उदार रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में कुल 1.25% की कटौती की थी। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था के मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि अभी और कटौती की गुंजाइश बाकी है। IIFL कैपिटल के अनुसार, 2026 के मध्य तक रेपो रेट अपने पिछले 3 सालों के निचले स्तर पर आ सकता है।
रेट कट के पीछे का गणित: इन्फ्लेशन और रेपो रेट का अंतर
रिपोर्ट में इस कटौती के पीछे सबसे बड़ा तर्क रेपो रेट (Repo Rate) और कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) के बीच का अंतर बताया गया है।
* मौजूदा स्थिति: वर्तमान में रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर 2.8% है।
* ऐतिहासिक औसत: पिछले 7 सालों का डेटा देखें तो यह औसत अंतर केवल 1.1% के करीब रहता था।
* निष्कर्ष: चूंकि यह अंतर (Gap) ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा है, इसलिए RBI के पास विकास दर को गति देने के लिए ब्याज दरें घटाने का पर्याप्त अवसर है। जब रेपो रेट इन्फ्लेशन से बहुत ऊपर होता है, तो इसे 'प्रतिबंधात्मक' माना जाता है, जिसे अब 'न्यूट्रल' करने की जरूरत है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
ब्याज दरों में 0.50% की संभावित कटौती का सीधा फायदा आम लोगों की जेब पर पड़ेगा:
* होम लोन: यदि आपका 50 लाख रुपये का होम लोन 15 साल के लिए है, तो 0.50% की कटौती से आपकी मासिक EMI में लगभग 1,500 से 2,000 रुपये की बचत हो सकती है।
* ऑटो और पर्सनल लोन: नई कार या पर्सनल लोन लेना सस्ता हो जाएगा, जिससे बाजार में मांग (Demand) बढ़ेगी।
* रियल एस्टेट में तेजी: लोन सस्ता होने से घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी, जिससे सुस्त पड़े रियल एस्टेट सेक्टर को संजीवनी मिलेगी।
अगली RBI बैठक पर नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI अपनी फरवरी या अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC Meeting) में इस कटौती का ऐलान कर सकता है। हालांकि, यह काफी हद तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर भी निर्भर करेगा।
निष्कर्ष:
IIFL कैपिटल की यह रिपोर्ट उन करोड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो अपने सपनों का घर या कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। यदि कोर इन्फ्लेशन स्थिर रहता है, तो 2026 निश्चित रूप से 'सस्ते कर्ज' का साल साबित होगा।
