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ट्रंप का 'ऑपरेशन आर्कटिक': JSOC को मिला ग्रीनलैंड पर कब्जे का ब्लूप्रिंट बनाने का निर्देश
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व) की सफलता के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम ने दुनिया भर के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
ट्रंप का 'ऑपरेशन आर्कटिक': JSOC को मिला ग्रीनलैंड पर कब्जे का ब्लूप्रिंट बनाने का निर्देश
अमेरिकी मीडिया (Daily Mail और Times of India) की रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वरिष्ठ कमांडरों को ग्रीनलैंड पर संभावित सैन्य हमले (Invasion) के लिए 'कंटिंजेंसी प्लान' तैयार करने का औपचारिक निर्देश दिया है। ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण अनिवार्य है।
सैन्य नेतृत्व और ट्रंप के बीच 'शीत युद्ध'
इस निर्देश ने पेंटागन और व्हाइट हाउस के बीच एक बड़ा गतिरोध पैदा कर दिया है।
* JSOC को जिम्मेदारी: ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को यह जिम्मा सौंपा है, जो दुनिया के सबसे गुप्त और खतरनाक मिशनों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है।
* जनरलों का विरोध: 'जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' (Joint Chiefs of Staff) के वरिष्ठ जनरल इस योजना से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे इसे "बेतुका" (Crazy) और "गैरकानूनी" मान रहे हैं।
* कानूनी अड़चन: सैन्य अधिकारियों का तर्क है कि बिना 'कांग्रेस' (संसद) की मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के, एक नाटो (NATO) सहयोगी (डेनमार्क) के क्षेत्र पर हमला करना असंभव है।
> "जनरल ट्रंप को इस योजना से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। वे उन्हें रूस के 'घोस्ट शिप्स' को रोकने या ईरान पर स्ट्राइक जैसे कम विवादास्पद विकल्पों की ओर मोड़ने की रणनीति अपना रहे हैं।"
> — राजनयिक सूत्रों का हवाला (Daily Mail)
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क्यों जल्दबाजी में हैं ट्रंप?
ट्रंप के सलाहकारों, विशेष रूप से स्टीफन मिलर, का मानना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को जिस तरह तेजी से पकड़ा गया, वैसी ही फुर्ती ग्रीनलैंड के मामले में भी दिखाई जानी चाहिए।
* चीन-रूस का डर: ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड के तटों पर रूसी और चीनी जहाजों का जमावड़ा बढ़ रहा है। वे नहीं चाहते कि मॉस्को या बीजिंग अमेरिका के "पड़ोसी" बनें।
* राष्ट्रीय सुरक्षा: ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड को "नेशनल सिक्योरिटी प्रायोरिटी" घोषित कर दिया है।
डेनमार्क और यूरोप की 'तैयारी'
इस बीच, डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने अपनी रक्षात्मक मुद्रा और कड़ी कर दी है:
* पहले गोली मारने का आदेश: डेनमार्क ने अपनी सेना को स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई विदेशी सेना ग्रीनलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन करती है, तो वे सीधे कार्रवाई करें।
* नाटो पर खतरा: फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी अमेरिकी कार्रवाई नाटो (NATO) गठबंधन के अंत की शुरुआत होगी।
निष्कर्ष
स्थिति अब केवल 'खरीद-बिक्री' (Real Estate Deal) की चर्चा से आगे बढ़कर सैन्य रणनीति तक पहुँच गई है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे 20 दिनों के भीतर इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए है कि क्या अमेरिकी सेना अपने राष्ट्रपति के इस आदेश को मानेगी या कूटनीति इस संभावित संघर्ष को टाल पाएगी।
