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बेंगलुरु CET परीक्षा विवाद: जनेऊ उतरवाने पर बड़ी कार्रवाई, तीन कर्मचारी निलंबित
बेंगलुरु के एक परीक्षा केंद्र पर कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) 2026 के दौरान हुई एक घटना ने राज्यभर में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले एक अभ्यर्थी को उसका 'जनेऊ' (पवित्र धागा) उतारने के लिए मजबूर किए जाने के मामले ने धार्मिक संवेदनाओं को आहत किया है, जिसके परिणामस्वरूप कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) को सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी है।
घटना का विवरण
घटना बेंगलुरु के एक प्रमुख कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र की है। रिपोर्ट के अनुसार, जब परीक्षार्थी CET 2026 की परीक्षा देने के लिए केंद्र पर पहुंचा, तो वहां तैनात परीक्षा पर्यवेक्षकों और सुरक्षा कर्मियों ने उसे परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले अपने शरीर पर धारण किए हुए जनेऊ को हटाने के लिए कहा। अभ्यर्थी का कहना था कि यह उसकी धार्मिक आस्था का प्रतीक है और इसे उतारना उसके लिए कठिन था, लेकिन परीक्षा में बैठने की मजबूरी के कारण उसे बहुत अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब अभ्यर्थी के परिजनों ने इस घटना की शिकायत सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों से की। देखते ही देखते यह खबर आग की तरह फैल गई और विभिन्न छात्र संगठनों तथा सामाजिक समूहों ने परीक्षा केंद्र के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) की त्वरित प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को समझते हुए और सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए, कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने बिना किसी देरी के जांच के आदेश दिए। परीक्षा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि परीक्षार्थी के साथ जो व्यवहार किया गया, वह KEA की गाइडलाइन्स के बिल्कुल विपरीत है।
• निलंबन की कार्रवाई: KEA ने तत्काल प्रभाव से घटना में शामिल तीन परीक्षा केंद्र कर्मचारियों (इनविजिलेटर्स और पर्यवेक्षकों) को निलंबित कर दिया है।
• विभागीय जांच: प्राधिकरण ने इन तीनों कर्मचारियों के खिलाफ एक विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच समिति यह पता लगाएगी कि क्या इन कर्मचारियों ने जानबूझकर ऐसा किया या वे नियमों की गलत व्याख्या कर रहे थे।
• आश्वासन: KEA के अधिकारियों ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि किसी भी अभ्यर्थी को उसकी धार्मिक आस्था या पारंपरिक परिधान के कारण परेशान नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह परीक्षा की पवित्रता को प्रभावित न करता हो।
विवाद के मुख्य बिंदु
यह घटना न केवल बेंगलुरु, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। विवाद के पीछे मुख्य कारण हैं:
1. धार्मिक स्वतंत्रता और संवेदनशीलता: जनेऊ हिंदू धर्म में एक पवित्र प्रतीक माना जाता है। इसे उतारने के लिए दबाव डालना लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं को सीधे तौर पर आहत करने जैसा है।
2. परीक्षा नियमों का दुरुपयोग: हालांकि, परीक्षा में नकल रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा और ड्रेस कोड के नियम होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अभ्यर्थी के साथ दुर्व्यवहार किया जाए। अधिकांश परीक्षाओं में ऐसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति पहले से ही होती है, बशर्ते वे किसी प्रकार की आपत्तिजनक वस्तु न हों।
3. प्रशासनिक जवाबदेही: लोगों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को सामान्य शिष्टाचार और धार्मिक संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
यह घटना परीक्षा प्रणाली में मानवीय संवेदनाओं की कमी को दर्शाती है। कर्नाटक सरकार ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है और शिक्षा विभाग को निर्देशित किया है कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात स्टाफ को बेहतर ट्रेनिंग दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
