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हाईकोर्ट में CBI की दलीलें: "निचली अदालत ने किया मिनी-ट्रायल"

09-03-2026

दिल्ली शराब नीति मामले में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 9 मार्च 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच CBI की उस याचिका पर सुनवाई शुरू कर रही है, जिसमें निचली अदालत द्वारा सभी 23 आरोपियों को छोड़े जाने (Discharge) के फैसले को चुनौती दी गई है।

हाईकोर्ट में CBI की दलीलें: "निचली अदालत ने किया मिनी-ट्रायल"

CBI ने अपनी अपील में राउज एवेन्यू कोर्ट के 27 फरवरी 2026 के आदेश को "अवैध और तर्कहीन" बताया है। CBI के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

 * गलत मानक का प्रयोग: CBI का कहना है कि 'आरोप तय करने' (Charge framing) के चरण में अदालत को केवल यह देखना चाहिए था कि क्या प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कोई मामला बनता है, न कि सबूतों की गहराई से जांच (Mini-trial) करनी चाहिए थी।

 * साक्ष्यों की अनदेखी: एजेंसी का आरोप है कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सबूतों को चुनिंदा तरीके से पढ़ा और साजिश के व्यापक संदर्भ को नजरअंदाज कर दिया।

 * सरकारी गवाहों (Approvers) पर टिप्पणी: CBI ने उन टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई है जिनमें अदालत ने सरकारी गवाहों के बयानों को अविश्वसनीय माना था।

निचली अदालत का 'ऐतिहासिक' फैसला: क्या था आधार?

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने 598 पन्नों के फैसले में CBI की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे:

 * कोई साजिश नहीं: कोर्ट ने माना कि शराब नीति बनाने की प्रक्रिया एक प्रशासनिक विचार-विमर्श था, न कि कोई आपराधिक साजिश।

 * सबूतों का अभाव: अदालत ने कहा कि CBI का मामला केवल "अनुमानों और कयासों" (Conjectures) पर आधारित था और उनके पास कोई ठोस कानूनी सबूत नहीं था।

 * IO के खिलाफ जांच के आदेश: कोर्ट ने जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की, यह कहते हुए कि जांच "पूर्व-नियोजित और कोरियोग्राफ्ड" (Choreographed) थी।

डिस्चार्ज (Discharge) और बरी (Acquittal) में अंतर

कानूनी रूप से यह समझना जरूरी है कि केजरीवाल और अन्य नेता अभी 'बरी' नहीं हुए हैं, बल्कि 'डिस्चार्ज' हुए हैं:

 * डिस्चार्ज: इसका मतलब है कि कोर्ट को शुरुआती जांच में इतने सबूत भी नहीं मिले कि मुकदमा (Trial) शुरू किया जा सके।

 * असर: यदि हाईकोर्ट CBI की अपील स्वीकार कर लेता है, तो इन नेताओं के खिलाफ दोबारा आरोप तय किए जा सकते हैं और मुकदमा शुरू हो सकता है।

राजनीतिक हलचल और ED का मामला

जहाँ आम आदमी पार्टी इसे अपनी "कट्टर ईमानदारी" की जीत बता रही है, वहीं यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मनी लॉन्ड्रिंग मामला अभी भी अलग से चल रहा है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CBI का मुख्य (Predicate) मामला गिर जाता है, तो ED के केस पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।


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