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पड़ी फूट, इतिहास बन जाएगी AIADMK?

11-05-2026

1. विजय फैक्टर: द्रविड़ राजनीति का नया ध्रुव

विजय की राजनीति में एंट्री ने तमिलनाडु के पारंपरिक 'द्वि-ध्रुवीय' ढांचे को हिलाकर रख दिया है। विजय ने अपनी रैलियों में जिस तरह का जनसैलाब उमड़ाया है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि युवा मतदाता अब एक विकल्प की तलाश में हैं। विजय का "सेक्युलर सोशल जस्टिस" और "भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन" का नारा सीधे तौर पर द्रविड़ पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगा रहा है।

2. AIADMK के अंदरूनी कलह की जड़ें

AIADMK में फूट की खबर नई नहीं है, लेकिन इस बार का संकट "विचारधारा" से ज्यादा "अस्तित्व" से जुड़ा है। पार्टी के भीतर दो गुट बन चुके हैं:

• षणमुगम गुट (प्रो-गठबंधन): पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम और कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि AIADMK को DMK को हराना है और बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकना है, तो उसे TVK के साथ गठबंधन करना ही होगा।

• पलानीस्वामी (EPS) गुट (एकला चलो रे): पार्टी के वर्तमान प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) किसी भी नए खिलाड़ी (विजय) के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्हें डर है कि विजय के साथ गठबंधन करने से AIADMK 'जूनियर पार्टनर' बनकर रह जाएगी और विजय राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित हो जाएंगे।

3. आंकड़ों का खेल: 47 बनाम 11

सूत्रों के हवाले से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे पलानीस्वामी की रातों की नींद उड़ाने वाले हैं। वर्तमान में AIADMK के पास विधानसभा में 47 विधायक हैं।

• कहा जा रहा है कि इनमें से 36 विधायक षणमुगम के संपर्क में हैं और विजय की पार्टी TVK के साथ हाथ मिलाने के पक्ष में हैं।

• यदि यह बगावत हकीकत में बदलती है, तो EPS के पास केवल 11 विधायक रह जाएंगे।

कानूनी और राजनीतिक संकट: यदि 36 विधायक अलग होते हैं, तो वे दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए "दो-तिहाई" बहुमत का तर्क दे सकते हैं या एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांग सकते हैं। इससे पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न (दो पत्तियां) भी फ्रीज हो सकता है।

4. षणमुगम की रणनीति और पलानीस्वामी की जिद

सी.वी. षणमुगम एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ हैं। उनका तर्क सरल है: “अकेले चुनाव लड़ने पर AIADMK का वोट शेयर गिर रहा है। विजय के पास युवाओं का समर्थन है और हमारे पास कैडर है। यह मेल DMK को सत्ता से बाहर कर सकता है।”

वहीं, पलानीस्वामी को लगता है कि जयललिता की विरासत को किसी 'फिल्मी सितारे' के कदमों में डालना पार्टी के गौरव के खिलाफ है। ईपीएस को अपनी संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा है, लेकिन विधायकों का असंतोष यह बता रहा है कि जमीन खिसक रही है।

5. क्या AIADMK का अस्तित्व खतरे में है?

अन्नाद्रमुक के लिए यह 'करो या मरो' वाली स्थिति है।

1. वोट बैंक का बिखराव: यदि पार्टी टूटती है, तो कैडर बंट जाएगा। इसका सीधा फायदा DMK को होगा।

2. बीजेपी का प्रवेश: राज्य में बीजेपी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। AIADMK की कमजोरी बीजेपी के लिए स्पेस बनाएगी।

3. विजय की बढ़ती ताकत: विजय की TVK के लिए यह "पका हुआ फल" गिरने जैसा है। यदि AIADMK के 36 विधायक उनका समर्थन करते हैं, तो विजय रातों-रात राज्य के सबसे बड़े विपक्षी नेता बन जाएंगे।

6. भविष्य की संभावनाएं

तमिलनाडु की राजनीति अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। आने वाले कुछ हफ्तों में हमें निम्नलिखित परिदृश्य देखने को मिल सकते हैं:

निष्कर्ष

तमिलनाडु की जनता ने हमेशा 'करिश्माई नेतृत्व' को पसंद किया है। एमजीआर और जयललिता के बाद AIADMK के पास उस स्तर का कोई चेहरा नहीं रहा। विजय उसी शून्यता को भरने की कोशिश कर रहे हैं। यदि षणमुगम और अन्य वरिष्ठ नेता बगावत करते हैं, तो यह 50 साल पुरानी पार्टी के अंत की शुरुआत हो सकती है

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