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अगले 9 दिन मौसम के लिहाज से बेहद खतरनाक, जानिए भीषण गर्मी और लू से बचने के अचूक उपाय
उत्तर और मध्य भारत के लोगों के लिए आगामी 9 दिन मौसम के लिहाज से बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं। 25 मई से इस साल का 'नौतपा' शुरू हो रहा है, जो 2 जून तक जारी रहेगा। भारतीय खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान के अनुसार, यह साल का वह समय होता है जब सूरज की तपिश और धरती का तापमान अपने चरम पर पहुंच जाते हैं। नौतपा के दौरान चलने वाली भीषण लू और चिलचिलाती धूप न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक साबित होती है। हर साल नौतपा के इन नौ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से हीट स्ट्रोक (लू लगना) के कारण कई लोगों की मौत की दुखद खबरें सामने आती हैं। यही कारण है कि मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस अवधि के लिए विशेष एडवायजरी जारी की है। इस दौरान घर से बाहर निकलने से लेकर खान-पान तक, हर स्तर पर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
क्या होता है नौतपा? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
'नौतपा' शब्द का सीधा अर्थ है—नौ दिनों तक तपना। सनातन ज्योतिष और खगोलीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव चंद्रमा के नक्षत्र 'रोहिणी' में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा की शुरुआत होती है। सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिनों में पृथ्वी पर सूर्य की किरणें बिल्कुल सीधी और अत्यधिक तीव्र पड़ती हैं।
इसके पीछे का वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण निम्नलिखित है:
• सूर्य की सीधी किरणें: मई के आखिरी हफ्ते में सूर्य उत्तरायण में होते हुए भूमध्य रेखा के उत्तर में आ जाता है, जिससे उत्तर और मध्य भारत के ऊपर सूर्य की स्थिति लगभग लंबवत हो जाती है।
• समुद्री हवाओं का रुकना: इस दौरान मैदानी इलाकों में वायुदाब कम हो जाता है और समुद्र से आने वाली ठंडी हवाएं मैदानी भागों तक नहीं पहुंच पातीं। इसके परिणामस्वरूप, राजस्थान के थार मरुस्थल से उठने वाली बेहद गर्म और सूखी हवाएं (जिन्हें हम 'लू' कहते हैं) उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों को भट्टी की तरह तपा देती हैं।
नौतपा के दौरान स्वास्थ्य पर मंडराता 'हीट स्ट्रोक' का खतरा
नौतपा के दिनों में तापमान अक्सर या उससे भी ऊपर चला जाता है। इतने उच्च तापमान में मानव शरीर का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम (तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली) प्रभावित होता है। इस दौरान सबसे बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक का होता है।
हीट स्ट्रोक क्या है? जब शरीर का आंतरिक तापमान या उससे अधिक हो जाता है, और शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखने में असमर्थ हो जाता है, तो उसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत इलाज न मिलने पर अंगों को नुकसान पहुंच सकता है या जान भी जा सकती है।
हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण:
• तेज बुखार और शरीर का अत्यधिक गर्म होना।
• सिर में तेज दर्द, चक्कर आना या बेहोशी छाना।
• पसीना आना बंद हो जाना और त्वचा का लाल व सूखी हो जाना।
• उल्टी होना या जी मिचलाना।
• धड़कन और सांस की गति का बेहद तेज हो जाना।
नौतपा से खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें और क्या न करें?
अगले 9 दिनों के इस मौसमी संकट से बचने के लिए हमें अपनी दिनचर्या में कुछ बेहद जरूरी बदलाव करने होंगे। सुरक्षा के लिहाज से निम्नलिखित सावधानियों को अपनाना अनिवार्य है:
1. खान-पान और शरीर में पानी की कमी पर ध्यान दें
• पानी को बनाएं हथियार: प्यास न भी लगी हो, तब भी हर आधे घंटे में पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी (Dehydration) ही लू का मुख्य कारण बनती है।
• पारंपरिक पेय पदार्थों का सेवन: सादे पानी के अलावा नींबू पानी, ओआरएस का घोल, छाछ, लस्सी, नारियल पानी, और आम का पन्ना (कच्चे आम का शरबत) पिएं। ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं।
• हल्का भोजन करें: नौतपा के दौरान गरिष्ठ, तैलीय, मसालेदार और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसे पानी से भरपूर फलों का सेवन अधिक करें।
2. बाहर निकलते समय बरतें ये सावधानियां
• समय का चयन: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तीखी होती है, बहुत जरूरी न होने पर घर या दफ्तर से बाहर निकलने से बचें।
• सही कपड़ों का चुनाव: बाहर जाते समय हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते और शरीर को ज्यादा गर्म करते हैं।
• सुरक्षा कवच: धूप में निकलते समय अपने सिर और चेहरे को सूती कपड़े या गमछे से ढकें। धूप का चश्मा, छाता और पैरों में जूते-चप्पल जरूर पहनें। खाली पेट कभी भी धूप में न निकलें।
3. क्या करने से सख्त परहेज करें?
• कैफीन और अल्कोहल से दूरी: चाय, कॉफी, अत्यधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स और शराब का सेवन कम से कम करें, क्योंकि ये चीजें शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करती हैं।
• गाड़ी में बच्चों/पालतू जानवरों को न छोड़ें: बंद खड़ी कार के भीतर का तापमान बाहर के मुकाबले कुछ ही मिनटों में दोगुना हो जाता है। इसलिए धूप में खड़ी गाड़ी के अंदर किसी को भी न छोड़ें।
निष्कर्ष
25 मई से शुरू हो रहा नौतपा प्रकृति का एक चक्र है, जिससे हम बच नहीं सकते, लेकिन अपनी सजगता और सही सावधानियों के जरिए हम इसके खतरों को शून्य जरूर कर सकते हैं। आने वाले 9 दिन बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और उन मजदूरों के लिए सबसे कठिन हैं जो धूप में काम करने को मजबूर हैं। हमारी थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए खुद भी सुरक्षित रहें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, और अपने आसपास के पशु-पक्षियों के लिए भी किसी बर्तन में पानी रखना न भूलें। सतर्कता ही नौतपा की इस भीषण जंग में आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
