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छत्तीसगढ़: वेदांता पावर प्लांट हादसे में अनिल अग्रवाल समेत 8 पर FIR, अब तक 20 की मौत
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस औद्योगिक दुर्घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित 8 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
1. हादसे का विवरण और वर्तमान स्थिति
यह दुखद घटना 14 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 2:33 बजे हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यूनिट-1 के बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दबाव वाली भाप ले जाने वाली एक स्टील ट्यूब अचानक फट गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि प्लांट में मौजूद कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए।
• मृतकों की संख्या: हादसे के दिन 13 लोगों की मृत्यु हुई थी, जो अब बढ़कर 20 हो गई है।
• घायलों की स्थिति: 16 मजदूरों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है, जिनमें से कुछ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।
2. जांच में सामने आई 'गंभीर लापरवाही'
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और बॉयलर मुख्य निरीक्षक की प्रारंभिक तकनीकी जांच में प्रबंधन की बड़ी खामियां उजागर हुई हैं:
• उत्पादन बढ़ाने का दबाव: रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादन को लगभग दोगुना करने के लिए बॉयलर लोड को अचानक 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट कर दिया गया था। इस त्वरित वृद्धि से सिस्टम अस्थिर हो गया।
• तकनीकी विफलता: बॉयलर की भट्ठी के भीतर ईंधन का अत्यधिक संचय हो गया था, जिससे दबाव तेजी से बढ़ा। सुरक्षा बैकअप और 'प्राइमरी एयर फैन' में खराबी के कारण इस दबाव को नियंत्रित नहीं किया जा सका।
• रखरखाव में कमी: जांच दल ने पाया कि मशीनरी के रखरखाव और परिचालन मानकों (SOP) का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा था।
3. कानूनी कार्रवाई: FIR और SIT का गठन
सक्ती के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर डभरा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
• पंजीकृत धाराएं: धारा 106 (लापरवाही से मौत), 289 (मशीनरी के संबंध में लापरवाही) और 3(5) (साझा इरादा)।
• आरोपी: अनिल अग्रवाल (चेयरमैन, वेदांता ग्रुप), देवेंद्र पटेल (प्लांट हेड) और अन्य प्रबंधन अधिकारी।
• विशेष जांच दल (SIT): मामले की गहन जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में एक SIT का गठन किया गया है, जो फॉरेंसिक और तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी।
4. मुआवजा और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हादसे के बाद राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने न्यायिक जांच की मांग की है।
• मुआवजा: छत्तीसगढ़ सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अनुग्रह राशि का एलान किया है।
• मजिस्ट्रियल जांच: सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
निष्कर्ष
वेदांता प्लांट का यह हादसा सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक भयावह उदाहरण है। 20 परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्यों को खो दिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी औद्योगिक आपदाओं को रोका जा सके।
