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खाड़ी से वतन वापसी: 7 दिनों में 52,000 भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी, MEA ने जारी किया डेटा
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीयों को निकालने का अभियान तेज गति से चल रहा है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते युद्ध के बीच भारत सरकार ने एक विशाल बचाव अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि 1 मार्च से 7 मार्च 2026 के बीच 52,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से खाड़ी देशों से स्वदेश लौट आए हैं।
यह अभियान विशेष रूप से उन लोगों के लिए चलाया गया जो वहां कम समय के लिए (Transit or Short-term visit) गए थे या युद्ध के कारण फंस गए थे।
वतन वापसी के आंकड़े: एक नजर में
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हवाई मार्ग के आंशिक रूप से खुलने के बाद वाणिज्यिक और विशेष उड़ानों का संचालन सुचारू रूप से किया गया:
* कुल वापसी: 52,000+ भारतीय।
* भारतीय एयरलाइंस का योगदान: लगभग 32,107 लोग एयर इंडिया, इंडिगो और अन्य भारतीय विमानों के जरिए लौटे।
* अन्य माध्यम: बाकी लोग विदेशी कमर्शियल फ्लाइट्स और नॉन-शेड्यूल्ड (Repatriation) उड़ानों के माध्यम से भारत पहुँचे।
* प्रमुख हब: सबसे ज्यादा वापसी दुबई, अबू धाबी, दोहा, मस्कट और कुवैत सिटी जैसे शहरों से हुई है।
सरकारी सहायता प्रणाली: 24x7 कंट्रोल रूम
विदेश मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली में एक 'विशेष कंट्रोल रूम' स्थापित किया है, जो 24 घंटे काम कर रहा है।
संपर्क सूत्र (Helpline Details):
* टोल फ्री नंबर: 1800118797
* फोन: +91-11-23012113, +91-11-23014104, +91-11-23017905
* WhatsApp: +91-9968291988
* ईमेल: situationroom@mea.gov.in
इसके अलावा, खाड़ी के हर देश में भारतीय दूतावासों ने अपनी स्थानीय हेल्पलाइन जारी की हैं। ईरान में फंसे छात्रों और श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं।
युद्ध का असर: क्यों जरूरी हुई जल्द वापसी?
मिडिल ईस्ट में तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर है:
* एयरस्पेस क्लोजर: ईरान और इराक के ऊपर हवाई मार्ग बार-बार बंद होने से सैकड़ों उड़ानें रद्द हो रही हैं।
* मिसाइल हमले: हाल ही में कुवैत और दुबई एयरपोर्ट के पास गिरे मिसाइल मलबे ने नागरिक उड़ानों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।
* लाखों की आबादी: खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ (10 Million) भारतीय रहते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौती है।
निष्कर्ष: 'ऑपरेशन सिंधु' की ओर बढ़ते कदम?
हालांकि अभी सरकार इसे पूरी तरह से 'इवैक्युएशन' (निकासी) नहीं कह रही है, लेकिन 2025 में चले 'ऑपरेशन सिंधु' की तरह ही इस बार भी नौसेना और वायुसेना को 'स्टैंडबाय' पर रखा गया है। यदि हवाई मार्ग पूरी तरह बंद होते हैं, तो समुद्र के रास्ते भारतीयों को लाने की योजना भी तैयार है।
