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नूंह की कुख्यात साइबर गैंग के दो सदस्य गिरफ्तार, 7 बैंक खातों से 4.27 करोड़ की ठगी का खुलासा

16-05-2026

कोटा ग्रामीण पुलिस की बड़ी कामयाबी: नूंह की कुख्यात साइबर गैंग के दो सदस्य गिरफ्तार, 7 बैंक खातों से 4.27 करोड़ की ठगी का खुलासा

कोटा। देश भर में पैर पसार चुके साइबर अपराधियों के खिलाफ कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने हरियाणा के नूंह (मेवात) इलाके की एक बेहद शातिर और कुख्यात साइबर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए इसके दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जावेद और इरशाद के रूप में हुई है।

यह गैंग इन्वेस्टमेंट (निवेश) के नाम पर भारी रिटर्न का झांसा देकर, 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर और ऑनलाइन टास्क के जरिए लोगों को घर बैठे मोटी कमाई का लालच देकर देशव्यापी ठगी को अंजाम दे रही थी। पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। आरोपियों के महज 7 बैंक खातों की जांच में 4.27 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन (धोखाधड़ी) का रिकॉर्ड सामने आया है।

कैसे हुआ इस बड़ी गैंग का भंडाफोड़?

कोटा ग्रामीण जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की एक विशेष टीम लगातार ऑनलाइन ठगी के मामलों पर नजर रख रही थी। हाल ही में कोटा ग्रामीण इलाके के एक पीड़ित ने निवेश और ऑनलाइन टास्क के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान शुरू किया। ठगी की रकम जिस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी, उसके आईपी एड्रेस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को खंगाला गया। कड़ियों से कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस टीम हरियाणा के नूंह जिले तक जा पहुंची, जिसे देश में साइबर अपराध का एक नया गढ़ माना जाता है। वहां स्थानीय स्तर पर रेकी करने और जाल बिछाने के बाद पुलिस ने दोनों शातिर अपराधियों, जावेद और इरशाद को धर दबोचा।

ठगी के तीन मुख्य तरीके 

पुलिस पूछताछ और जांच में सामने आया है कि यह गैंग मुख्य रूप से तीन तरीकों से लोगों को अपनी जाल में फंसाती थी:

1. इन्वेस्टमेंट के नाम पर धोखाधड़ी 

आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और टेलीग्राम) पर फर्जी विज्ञापन चलाते थे, जिसमें कम समय में पैसा दोगुना करने या शेयर मार्केट/क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का दावा किया जाता था। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए ये लोग पीड़ित को थोड़ा प्रॉफिट (लाभ) भी दिखाते थे। जब पीड़ित बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट कर देता, तो ये उसके अकाउंट को ब्लॉक कर देते थे।

2. डिजिटल अरेस्ट का खौफ 

यह वर्तमान समय का सबसे खतरनाक साइबर ट्रेंड बन चुका है। गैंग के सदस्य खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED), पुलिस या ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कॉल करते थे। वे पीड़ितों को डराते थे कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है, जिसमें ड्रग्स या फर्जी पासपोर्ट हैं, या उनके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर वे पीड़ित को घंटों स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' रखते थे और मामला रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेते थे।

3. ऑनलाइन टास्क और वर्क फ्रॉम होम 

बेरोजगार युवाओं और गृहिणियों को निशाना बनाने के लिए ये लोग "घर बैठे यूट्यूब वीडियो लाइक करें", "गूगल मैप पर रेटिंग दें" या "होटल रिव्यू करें" जैसे पार्ट-टाइम जॉब का ऑफर देते थे। शुरुआत में कुछ सौ रुपये का भुगतान कर वे पीड़ित का भरोसा जीतते थे। इसके बाद 'प्रिपेड टास्क' या 'वीआईपी मेंबरशिप' के नाम पर उनसे मोटी रकम जमा करवा ली जाती थी और अंत में पैसे लेकर गायब हो जाते थे।


7 बैंक खातों से 4.27 करोड़ का खेल: 'खच्चर खातों' का जाल

पुलिस जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है इनके बैंक खातों में मौजूद रकम। पुलिस ने जब पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद और उनसे जुड़े केवल 7 बैंक खातों की 'बैंक स्टेटमेंट' निकलवाई, तो उसमें 4.27 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन पाया गया।

क्या होते हैं म्यूल या खच्चर खाते?

साइबर अपराधी सीधे अपने निजी बैंक खातों में ठगी की रकम नहीं मंगाते। वे गरीब, सीधे-साधे ग्रामीणों या मजदूरों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं या उनके एटीएम कार्ड और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स किराए पर ले लेते हैं। जावेद और इरशाद भी इसी तरह के फर्जी और किराए के खातों का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके। इन 7 खातों में देश के अलग-अलग राज्यों से ठगी का पैसा आया था।

देशव्यापी नेटवर्क और आगे की जांच

कोटा ग्रामीण पुलिस के अनुसार, इस गैंग का नेटवर्क केवल राजस्थान या हरियाणा तक सीमित नहीं है। इन 7 खातों में आए 4.27 करोड़ रुपये देश के विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के पीड़ितों से ठगे गए हैं।

पुलिस अब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) के जरिए देश के अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क साध रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन खातों के खिलाफ देश में कुल कितनी शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस को अंदेशा है कि आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ करने पर कई अन्य बैंक खातों, लॉकर और उनके गिरोह के अन्य सदस्यों (जो मुख्य मास्टरमाइंड हो सकते हैं) का खुलासा हो सकता है।

कोटा ग्रामीण पुलिस की आम जनता से अपील

इस बड़ी कार्रवाई के बाद कोटा ग्रामीण पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी (सचेत रहने के निर्देश) भी जारी की है:

• डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं: कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। ऐसा कॉल आने पर तुरंत फोन काटें।

• कम समय में ज्यादा मुनाफे से बचें: शेयर बाजार या क्रिप्टो के नाम पर व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप पर मिलने वाले "टिप्स" और "ज्यादा रिटर्न" के झांसे में न आएं। हमेशा सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें।

• टास्क के नाम पर पैसा न दें: अगर कोई नौकरी देने के बदले आपसे ही पैसे की मांग कर रहा है, तो वह पूरी तरह फ्रॉड है।

• तुरंत करें शिकायत: यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना डरे या शरमाए तुरंत केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। घटना के शुरुआती 1-2 घंटों (गोल्डन ऑवर) में शिकायत करने पर पैसे वापस मिलने की संभावना काफी अधिक होती है।

कोटा ग्रामीण पुलिस की इस तत्परता और बड़ी कामयाबी ने मेवात के साइबर अपराधियों को यह साफ संदेश दे दिया है कि वे चाहे कितनी भी तकनीकी चालाकी कर लें, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे सघन पूछताछ जारी है।

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