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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $693.3 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर: आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में एक और बड़ा

27-12-2025

मुंबई | 27 दिसंबर 2025

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। 19 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 4.36 अरब डॉलर का जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जिससे कुल भंडार 693.318 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि न केवल रुपए को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि विदेशी निवेशकों के बीच भारत की साख को भी और ऊंचा करेगी।

1. भंडार में वृद्धि के मुख्य कारक

इस सप्ताह आई भारी बढ़त के पीछे कई महत्वपूर्ण घटक रहे हैं:

 * स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में भारी उछाल: इस सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका 'सोने' की रही। स्वर्ण भंडार की वैल्यू 2.62 अरब डॉलर बढ़कर 110.36 अरब डॉलर हो गई है। वैश्विक बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों और आरबीआई द्वारा निरंतर खरीदारी ने इसे मजबूती दी है।

 * विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA): भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी फॉरेन करेंसी एसेट्स, 1.64 अरब डॉलर बढ़कर 559.42 अरब डॉलर हो गया। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है।

 * SDR और IMF स्थिति: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे गए विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 8 मिलियन डॉलर और आईएमएफ के साथ देश की आरक्षित स्थिति में 95 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई।

2. क्यों महत्वपूर्ण है यह उछाल?

किसी भी देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसकी 'आर्थिक ढाल' की तरह काम करता है। इसके कई फायदे हैं:

 * रुपए की रक्षा: जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया गिरता है, तो आरबीआई अपने भंडार से डॉलर बेचकर रुपए की गिरावट को रोकता है। $693 अरब का फंड आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप करने की जबरदस्त शक्ति देता है।

 * आयात कवर (Import Cover): वर्तमान भंडार भारत के लगभग 11-12 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है। इसका मतलब है कि अगर कल को देश की कमाई रुक भी जाए, तो भी भारत एक साल तक अपनी जरूरत का कच्चा तेल और अन्य सामान विदेशों से खरीद सकता है।

 * निवेशकों का भरोसा: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) उन देशों में अधिक होता है जिनका विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित होता है।

3. वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति

वर्ष 2025 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। चीन की सुस्त रफ्तार और अमेरिका की व्यापार नीतियों के बीच भारत ने खुद को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य (Safe Haven) के रूप में स्थापित किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयानों के अनुसार, भारत का लक्ष्य अपनी बाहरी देनदारियों और वैश्विक झटकों के खिलाफ एक ऐसा 'बफर' तैयार करना है जो किसी भी संकट में देश को झुकने न दे।

4. भविष्य की चुनौतियां और रणनीति

भले ही हम $700 अरब के जादुई आंकड़े के बेहद करीब हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं:

 * कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है। यदि खाड़ी देशों में तनाव के कारण तेल महंगा होता है, तो भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

 * अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां: अमेरिका में ब्याज दरों में बदलाव सीधे तौर पर विदेशी फंड्स के भारत से बाहर जाने या आने को प्रभावित करता है।

निष्कर्ष: $693.3 अरब का यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती क्रय शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। जिस तरह से स्वर्ण भंडार $110 अरब के पार गया है, वह दर्शाता है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था का विविधीकरण (Diversification) बहुत सोच-समझकर कर रहा है।


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