Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
अमेरिका का 51वां राज्य बनेगा ग्रीनलैंड? संसद में बिल पेश, ट्रंप के 'बल प्रयोग' की धमकी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन (Randy Fine) ने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में एक ऐतिहासिक और विवादित बिल पेश किया है, जिसका उद्देश्य ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना है।
अमेरिका का 51वां राज्य बनेगा ग्रीनलैंड? संसद में बिल पेश, ट्रंप के 'बल प्रयोग' की धमकी से बढ़ा तनाव
12 जनवरी 2026 को पेश किए गए इस बिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य" बता रहे हैं।
बिल की मुख्य बातें: 'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट'
* राष्ट्रपति को विशेष शक्ति: यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को अधिकार देता है कि वे डेनमार्क के साथ बातचीत करके या "किसी भी आवश्यक साधन" (Whatever steps necessary) का उपयोग करके ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र (Territory) के रूप में अधिग्रहित करें।
* 51वां राज्य: बिल में प्रावधान है कि अधिग्रहण के बाद राष्ट्रपति को कांग्रेस को एक रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां आधिकारिक राज्य बनाने के लिए जरूरी कानूनी बदलावों का खाका होगा।
* सुरक्षा का तर्क: रैंडी फाइन का कहना है कि ग्रीनलैंड कोई दूरस्थ चौकी नहीं बल्कि एक "महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति" है। उनके अनुसार, जो ग्रीनलैंड को नियंत्रित करेगा, वही आर्कटिक शिपिंग लेन और सुरक्षा ढांचे पर राज करेगा।
ट्रंप का रुख: 'आसान तरीका' या 'कठिन तरीका'
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में तेल और गैस अधिकारियों के साथ एक बैठक में बेहद सख्त रुख अपनाया है:
* "चाहे उन्हें पसंद हो या न हो": ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करेगा, चाहे वहां के लोग या डेनमार्क इसे पसंद करें या नहीं।
* रूस और चीन का डर: ट्रंप का तर्क है कि यदि अमेरिका ने इसे नहीं लिया, तो रूस या चीन इस पर कब्जा कर लेंगे, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
* सैन्य विकल्प: उन्होंने चेतावनी दी है कि वे समझौते के जरिए 'आसान तरीका' (Easy Way) पसंद करेंगे, लेकिन जरूरत पड़ने पर 'कठिन तरीका' (Hard Way - सैन्य कार्रवाई) अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया
इस बिल और ट्रंप के बयानों ने डेनमार्क और यूरोपीय संघ (EU) में भारी नाराजगी पैदा कर दी है:
* डेनमार्क का पलटवार: डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी अमेरिकी हमले का मतलब "NATO का अंत" होगा। डेनमार्क ने अपनी सेना को "पहले गोली मारने" के आदेश देने की बात भी कही है।
* ग्रीनलैंड का रुख: ग्रीनलैंड की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि "हम बिकाऊ नहीं हैं"। वहां के नेताओं ने अमेरिकी हस्तक्षेप को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
यह बिल अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की समितियों के पास जाएगा। यदि यह पारित होता है, तो यह आधुनिक इतिहास में किसी दूसरे देश के क्षेत्र को शामिल करने का सबसे बड़ा और विवादित प्रयास होगा। फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस हफ्ते डेनिश अधिकारियों से मिलने वाले हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि मामला कूटनीति से सुलझेगा या संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
