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भारत पर 500% टैरिफ का खतरा: ट्रंप का 'रूस प्रतिबंध बिल' और भारत की चिंता
भारत पर 500% टैरिफ का खतरा: ट्रंप का 'रूस प्रतिबंध बिल' और भारत की चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद और कड़े द्विपक्षीय बिल को हरी झंडी दे दी है, जो रूस से तेल और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक का भारी-भरकम आयात शुल्क (Tariff) लगाने का प्रावधान करता है। 7 जनवरी 2026 को सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने इस बिल का समर्थन किया, जिसका सीधा उद्देश्य रूस की युद्ध लड़ने की आर्थिक क्षमता को खत्म करना है।
बिल के मुख्य बिंदु: 'सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025'
यह बिल अमेरिकी संसद (Congress) में अगले हफ्ते वोटिंग के लिए आ सकता है। इसकी प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
* अनिवार्य टैरिफ: यदि राष्ट्रपति यह निर्धारित करते हैं कि रूस शांति वार्ता से इनकार कर रहा है, तो अमेरिका उन देशों से आने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर कम से कम 500% टैरिफ लगाएगा जो रूस से पेट्रोलियम या यूरेनियम उत्पाद खरीदते हैं।
* टारगेट देश: इस बिल में विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील का नाम लिया गया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अनुसार, यह बिल इन देशों को रूस से "सस्ता तेल" खरीदने से रोकने के लिए एक "मजबूत दबाव" (Leverage) के रूप में काम करेगा।
* 90 दिनों की समीक्षा: राष्ट्रपति को हर 90 दिनों में यह आकलन करना होगा कि क्या कोई देश अभी भी रूस के साथ व्यापारिक संबंधों के जरिए उसके "युद्ध तंत्र" को पैसा पहुँचा रहा है।
भारत के लिए स्थिति क्यों है गंभीर?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध (Trade War) की स्थिति 2025 से ही बनी हुई है:
* मौजूदा टैरिफ: अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था (25% सामान्य शुल्क + 25% रूस से तेल खरीदने का दंड)।
* 500% का असर: यदि यह बिल पास होता है और लागू किया जाता है, तो भारतीय निर्यात (जैसे कपड़ा, दवाएं, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाएं) अमेरिकी बाजार में इतने महंगे हो जाएंगे कि उनकी मांग पूरी तरह खत्म हो सकती है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक बड़ा झटका होगा।
* तेल की निर्भरता: भारत अपनी जरूरतों का करीब 35-40% कच्चा तेल रूस से रियायती दरों पर खरीदता रहा है।
राजनयिक हलचल और भारत का रुख
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस प्रस्तावित टैरिफ को लेकर अमेरिकी सांसदों के सामने अपनी चिंता व्यक्त की है।
* भारत का तर्क: भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आम जनता को सस्ती बिजली-ईंधन उपलब्ध कराने के लिए स्वतंत्र विदेश नीति का पालन कर रहा है।
* बदलती रणनीति: आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 3 साल के निचले स्तर (1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन) पर आ गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों ने भी जनवरी 2026 के लिए रूसी तेल के ऑर्डर कम कर दिए हैं, जो यह संकेत देता है कि भारत दबाव के बीच अपने आपूर्तिकर्ताओं (जैसे सऊदी अरब और इराक) में विविधता ला रहा है।
आगे क्या होगा?
अगले हफ्ते अमेरिकी संसद में होने वाली वोटिंग निर्णायक होगी। हालांकि बिल में राष्ट्रपति को 'राष्ट्रीय हित' में 180 दिनों के लिए छूट (Waiver) देने का अधिकार भी दिया गया है, लेकिन 500% का आंकड़ा वैश्विक व्यापार में एक अभूतपूर्व और कठोर कदम माना जा रहा है।
