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सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, कुल संख्या बढ़कर हुई 38

02-06-2026


भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। देश की सर्वोच्च अदालत को पांच नए न्यायाधीश मिल गए हैं। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की औपचारिक मंजूरी और वारंट जारी होने के बाद, इन सभी नवनियुक्त जजों ने पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक परिसर में आयोजित एक गरिमापूर्ण और भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सभी पांचों न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। इन नई नियुक्तियों के साथ ही अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित जजों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है, जो देश भर में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

शपथ लेने वाले पांच नए न्यायाधीशों का परिचय

शीर्ष अदालत में नियुक्त किए गए ये पांचों जज अपने-अपने उच्च न्यायालयों में एक लंबा और शानदार न्यायिक करियर पूरा कर चुके हैं। इनके व्यापक अनुभव का लाभ अब सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट को मिलेगा। शपथ लेने वाले न्यायाधीशों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है:

1. जस्टिस वेंकिता सुब्रमणि मोहन

जस्टिस वी.एस. मोहन अपनी निष्पक्षता, संवैधानिक मामलों की गहरी समझ और त्वरित निर्णय क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उच्च न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक और जनहित से जुड़े फैसले सुनाए हैं, जिन्होंने कानूनी गलियारों में एक नई नजीर पेश की।

2. जस्टिस शील नागु

जस्टिस शील नागु को सिविल और क्रिमिनल लॉ का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपने न्यायिक करियर में मानवाधिकारों की रक्षा और हाशिए पर खड़े लोगों को न्याय दिलाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। न्याय के सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें शीर्ष अदालत के लिए एक उत्कृष्ट चयन बनाती है।

3. जस्टिस श्रीचंद्रशेखर

जस्टिस श्रीचंद्रशेखर तकनीकी रूप से जटिल मामलों और कॉर्पोरेट तथा दीवानी विवादों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं। कानूनी बारीकियों को सरलता से समझने और उनका तार्किक समाधान निकालने की उनकी शैली की हमेशा सराहना की गई है।

4. जस्टिस संजीव सचदेवा

दिल्ली और अन्य उच्च न्यायालयों में अपने लंबे और बेदाग करियर के दौरान जस्टिस संजीव सचदेवा ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है। प्रशासनिक कानून और संवैधानिक व्याख्याओं पर उनका मजबूत नियंत्रण सुप्रीम कोर्ट की पीठों को और अधिक वैचारिक गहराई प्रदान करेगा।

5. जस्टिस अरुण पल्ली

जस्टिस अरुण पल्ली एक अन्य प्रतिष्ठित नाम हैं, जिनका न्यायशास्त्र में योगदान अद्वितीय रहा है। उन्होंने जटिल भूमि विवादों, श्रम कानूनों और जनहित याचिकाओं पर काम करते हुए न्यायपालिका की साख को और ऊंचा उठाया है।

सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ: समारोह की मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, बार काउंसिल के पदाधिकारी और नवनियुक्त जजों के परिवारजन उपस्थित थे।

• पारंपरिक औपचारिकताएं: समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए 'अपॉइंटमेंट वारंट' को पढ़कर सुनाया।

• पद की शपथ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक-एक कर सभी पांचों जजों को ईश्वर के नाम पर संविधान के प्रति निष्ठा रखने की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद सभी जजों ने आधिकारिक रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए और अपनी-अपनी कुर्सियां ग्रहण कीं।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या का गणित: अब तक का सबसे बड़ा कार्यबल

इन पांच नई नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 38 (37 जज + 1 मुख्य न्यायाधीश) तक पहुंच गई है। यह संख्या इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह देश की सर्वोच्च अदालत को अब तक की सबसे बड़ी और सुव्यवस्थित कार्यक्षमता प्रदान करती है।

न्यायिक महत्व: जजों की संख्या में बढ़ोतरी होने से सुप्रीम कोर्ट में अधिक संख्या में खंडपीठों और संवैधानिक पीठों का गठन किया जा सकेगा। इससे सालों से लंबित पड़े जटिल और बड़े मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई संभव हो पाएगी।

कॉलेजियम प्रणाली और सरकार के बीच बेहतर समन्वय

यह नियुक्तियां इस मायने में भी खास हैं कि यह सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को दर्शाती हैं। पिछले कुछ समय में न्यायिक नियुक्तियों को लेकर जो देरी देखी जाती थी, उसकी तुलना में इन पांच नामों पर राष्ट्रपति की मंजूरी बहुत ही सुचारू और तीव्र गति से मिली है।

1. कॉलेजियम की सिफारिश: सीजेआई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने इन जजों के नामों की सिफारिश उनके अनुभव, सत्यनिष्ठा और वरिष्ठता के आधार पर की थी।

2. कानून मंत्रालय की समीक्षा: केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इन नामों की समीक्षा कर अपनी फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन भेजी थी।

3. राष्ट्रपति की मुहर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन नियुक्तियों को हरी झंडी देकर न्यायपालिका की मजबूती का मार्ग प्रशस्त किया।

आम जनता और न्याय व्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट में जजों की कमी हमेशा से एक बड़ी चिंता का विषय रही है, जिसके कारण आम नागरिकों को 'न्याय में देरी' का सामना करना पड़ता है। इस ऐतिहासिक कदम से आम जनता को निम्नलिखित लाभ मिलने की उम्मीद है:

• लंबित मामलों में कमी: सर्वोच्च अदालत पर मुकदमों का जो भारी बोझ है, उसमें अब तेजी से कमी आने की संभावना है। बेल (जमानत) याचिकाओं और पारिवारिक विवादों जैसे मामलों की सुनवाई अब जल्दी हो सकेगी।

• विशेषज्ञता का लाभ: पांचों नए जज अलग-अलग विधाओं (क्रिमिनल, सिविल, टैक्स, कॉर्पोरेट) के विशेषज्ञ हैं। इनके आने से अलग-अलग श्रेणियों के मुकदमों को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार सुलझाया जा सकेगा।

• संवैधानिक पीठों की निरंतरता: बुनियादी अधिकारों और देश के भविष्य को तय करने वाले बड़े संवैधानिक मामलों की सुनवाई के लिए अक्सर जजों की उपलब्धता एक बाधा बनती थी, जो अब दूर हो जाएगी।

देश के कानूनी विशेषज्ञ और बार एसोसिएशन ने भी इस कदम की सराहना की है। सीजेआई सूर्यकांत के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट अब एक नई ऊर्जा और पूरी क्षमता के साथ देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय सुनिश्चित कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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