Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
पूर्वोत्तर भारत में महसूस किए गए 5.2 तीव्रता के भूकंप के झटकों ने लोगों को सहमा दिया, हालांकि राहत क
आज सुबह पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए, जिससे जनजीवन में अफरा-तफरी मच गई। रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता वाले इस भूकंप ने मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को दहला दिया। गनीमत यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन झटकों ने लोगों के दिलों में डर जरूर पैदा कर दिया।
भूकंप का विवरण और केंद्र
भूकंप का केंद्र मणिपुर का कामजोंग जिला रहा। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप आज सुबह ठीक 5:59 बजे आया। इसकी गहराई जमीन से लगभग 62 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई थी।
भूकंप की तीव्रता मध्यम श्रेणी की थी, लेकिन इसकी गहराई और भौगोलिक स्थिति के कारण इसके झटके विस्तृत क्षेत्र में महसूस किए गए। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों से लेकर असम और अरुणाचल प्रदेश के मैदानी हिस्सों तक, सुबह की नींद में सोए हुए लोग अचानक आए झटकों के कारण घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए।
प्रभावित क्षेत्र और स्थिति
भूकंप के झटके मुख्य रूप से निम्नलिखित राज्यों में महसूस किए गए:
1. मणिपुर: केंद्र बिंदु होने के कारण यहां झटके अधिक तीव्रता के साथ महसूस हुए। कामजोंग और उसके आसपास के जिलों में लोगों में दहशत का माहौल रहा।
2. नागालैंड: राज्य के कई हिस्सों में कंपन महसूस किया गया, जिससे स्थानीय निवासियों में डर फैल गया।
3. असम: राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पहाड़ी इलाकों में लोगों ने झटकों को महसूस किया।
4. मेघालय: शिलांग और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने घरों की दीवारों को हिलते हुए महसूस किया।
5. अरुणाचल प्रदेश: राज्य के निचले और पहाड़ी क्षेत्रों में कंपन दर्ज किया गया।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने भूकंप के तुरंत बाद स्थिति का जायजा लिया। हालांकि कहीं से भी किसी बड़ी तबाही या इमारत गिरने की खबर नहीं है, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी कर दिया है।
पूर्वोत्तर भारत: भूकंप के प्रति संवेदनशील क्षेत्र
पूर्वोत्तर भारत का यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से विश्व के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र 'सीस्मिक जोन 5' के अंतर्गत आता है। इसका मुख्य कारण इस क्षेत्र की टेक्टोनिक प्लेट्स की स्थिति है।
• प्लेट विवर्तनिकी : भारतीय प्लेट का यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसना इस पूरे हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगातार भूकंपीय हलचल पैदा करता रहता है।
• अतीत का इतिहास: पूर्वोत्तर ने अतीत में 1897 और 1950 जैसे विनाशकारी भूकंपों को झेला है। इस कारण से यहां के निवासियों में भूकंप को लेकर हमेशा एक विशेष प्रकार की सतर्कता रहती है।
आपदा के समय सतर्कता और बचाव
आज की सुबह आई इस घटना ने एक बार फिर से भूकंप सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। जब भूकंप आता है, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है:
• 'ड्रॉप, कवर और होल्ड': भूकंप के झटके महसूस होते ही किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे छिप जाएं, अपने सिर को सुरक्षित रखें और कंपन रुकने तक वहीं रहें।
• ऊंचे स्थानों से बचें: यदि आप घर के अंदर हैं, तो भारी अलमारियों, कांच की खिड़कियों और झूमर जैसी चीजों से दूर रहें।
• खुले मैदान में आएं: यदि आप बाहर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर किसी खुले स्थान पर चले जाएं।
• लिफ्ट का उपयोग न करें: भूकंप के दौरान कभी भी लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बिजली जाने से आप उसमें फंस सकते हैं।
निष्कर्ष
भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसे न तो रोका जा सकता है और न ही इसकी सटीक भविष्यवाणी करना फिलहाल संभव है। आज की घटना में किसी प्रकार का जान-माल का नुकसान नहीं होना एक बड़ी राहत की बात है। हालांकि, यह घटना एक चेतावनी के रूप में भी है कि हमें आपदा-रोधी निर्माण कार्यों पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
