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म्यांमार में 5 साल बाद ऐतिहासिक आम चुनाव का पहला चरण शुरू
म्यांमार (ब्रह्मा) में आज 28 दिसंबर 2025 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। साल 2021 के सैन्य तख्तापलट और पांच साल के लंबे गृहयुद्ध के बाद, देश में लोकतंत्र की ओर लौटने के दावों के साथ आम चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हुआ। सैन्य शासन (जुंटा) द्वारा आयोजित यह चुनाव तीन चरणों में प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य देश में स्थिरता बहाल करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी वैधता को साबित करना है।
यहाँ इस ऐतिहासिक लेकिन विवादास्पद चुनाव की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
🗳️ चुनाव का स्वरूप और मतदान प्रक्रिया
म्यांमार के 'यूनियन इलेक्शन कमीशन' (UEC) के अनुसार, यह बहुदलीय आम चुनाव है।
* तीन चरणों में मतदान: पहला चरण आज 28 दिसंबर 2025 को 102 टाउनशिप में संपन्न हुआ। दूसरा चरण 11 जनवरी 2026 और तीसरा चरण 25 जनवरी 2026 को होगा।
* उम्मीदवार और सीटें: इस चुनाव में कुल 57 राजनीतिक दलों के लगभग 5,000 उम्मीदवार मैदान में हैं। ये उम्मीदवार 'पिथु हलुत्तो' (निचला सदन), 'अम्योथा हलुत्तो' (ऊपरी सदन) और क्षेत्रीय संसदों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
* इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग: पहली बार म्यांमार में 'म्यांमार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन' (MEVM) का उपयोग किया जा रहा है। जुंटा सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
🏛️ नई चुनावी प्रणाली: MMP सिस्टम
इस बार म्यांमार ने अपनी पुरानी चुनावी प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहाँ केवल 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' (FPTP) प्रणाली थी, अब 'मिक्स्ड मेंबर प्रोपोर्शनल' (MMP) सिस्टम अपनाया गया है।
* इस प्रणाली का उद्देश्य छोटे दलों और जातीय अल्पसंख्यकों को उनकी वोट हिस्सेदारी के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व देना है।
* हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सैन्य समर्थित 'यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी' (USDP) को फायदा पहुँचाने और किसी एक दल (जैसे पूर्व में आंग सान सू की की पार्टी) के पूर्ण बहुमत को रोकने के लिए किया गया है।
🚫 प्रमुख विपक्षी दल और नेता गायब
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा यह है कि म्यांमार की सबसे लोकप्रिय नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की (80 वर्ष) जेल में हैं और वे चुनाव नहीं लड़ सकतीं।
* NLD का विघटन: सू की की पार्टी, 'नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी' (NLD), जिसने 2020 के चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी, उसे सैन्य सरकार ने भंग कर दिया है।
* विपक्ष का बहिष्कार: अधिकांश विपक्षी समूहों और 'नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट' (NUG) ने इस चुनाव को 'ढोंग' करार देते हुए इसका बहिष्कार किया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल के बिना यह चुनाव केवल सैन्य तानाशाही को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश है।
⚔️ गृहयुद्ध और सुरक्षा की चुनौतियां
म्यांमार के कई हिस्से इस समय विद्रोही समूहों और जातीय सशस्त्र संगठनों के नियंत्रण में हैं।
* सीमित मतदान: चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि देश के 330 में से कम से कम 56 टाउनशिप में मतदान कराना संभव नहीं है क्योंकि वहाँ सैन्य संघर्ष जारी है।
* सैन्य किलेबंदी: यांगून और नेपीडॉ जैसे प्रमुख शहरों में मतदान केंद्रों के बाहर भारी सुरक्षा बल और बख्तरबंद गाड़ियाँ तैनात रहीं। मतदान के दौरान किसी बड़ी हिंसा की खबर नहीं मिली, लेकिन विद्रोहियों ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की चेतावनी दी है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विश्व समुदाय इस चुनाव को लेकर बंटा हुआ है:
* समर्थक: चीन और रूस ने इस चुनाव प्रक्रिया का समर्थन किया है। चीन इसे म्यांमार में स्थिरता लाने का सबसे अच्छा रास्ता मानता है।
* आलोचक: अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस चुनाव की निंदा की है। UN मानवाधिकार प्रमुख के अनुसार, म्यांमार में वर्तमान में स्वतंत्र अभिव्यक्ति या शांतिपूर्ण जमावड़े की कोई स्थिति नहीं है।
* भारत का रुख: भारत ने इस प्रक्रिया को ध्यान से मॉनिटर किया है और म्यांमार में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक स्थिरता की उम्मीद जताई है।
🏁 निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
इस चुनाव के नतीजे जनवरी 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है। चुनाव के बाद नई संसद एक नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगी, जो नई केंद्र सरकार का गठन करेगा। हालांकि, सू की की अनुपस्थिति और आधे देश में जारी गृहयुद्ध के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह चुनाव म्यांमार में वाकई शांति ला पाएगा या यह संकट को और गहरा कर देगा।
