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अमेरिका में 'बर्फानी कयामत': भीषण ठंड और बिजली संकट से 40 की मौत, लाखों घरों में अंधेरा

28-01-2026

यह खबर वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मौसम की चरम स्थितियों (Extreme Weather) के भयानक प्रभाव को दर्शाती है। अमेरिका जैसे विकसित देश में भी प्रकृति के इस प्रकोप ने जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

अमेरिका में 'बर्फानी कयामत': भीषण ठंड और बिजली संकट से 40 की मौत, लाखों घरों में अंधेरा

वॉशिंगटन/टेक्सास: संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी और पूर्वी राज्य इस समय प्रकृति के सबसे क्रूर रूप का सामना कर रहे हैं। भीषण बर्फीले तूफान (Winter Storm), रिकॉर्ड तोड़ गिरते तापमान और ठप पड़ती बिजली आपूर्ति ने जनजीवन को 'फ्रीज' कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ठंड से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि सड़कों पर 8 से 15 इंच तक बर्फ जमी है, जिससे परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

दक्षिणी राज्यों में तबाही का मंजर

आमतौर पर अमेरिका के दक्षिणी राज्य (जैसे टेक्सास, अलबामा, मिसिसिपी) इतनी भीषण ठंड के लिए अभ्यस्त नहीं हैं। लेकिन इस बार 'आर्कटिक ब्लास्ट' ने यहाँ के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

 * मौतों का आंकड़ा: 40 से अधिक मौतों में से अधिकांश मौतें फिसलन भरी सड़कों पर हुए सड़क हादसों, अत्यधिक ठंड (Hypothermia) और बंद कमरों में हीटर चलाने के कारण होने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता के कारण हुई हैं।

 * बिजली का संकट: लाखों घरों में बिजली नहीं है। बर्फीली हवाओं और भारी बर्फबारी के कारण बिजली की लाइनें टूट गई हैं। बिना हीटिंग के ठंडे घरों में रहना लोगों के लिए जीवन-मौत का संघर्ष बन गया है।

 * पाइपलाइनों का फटना: अत्यधिक ठंड के कारण कई इलाकों में पानी की पाइपलाइनें फट गई हैं, जिससे पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो गया है।

जनजीवन पूरी तरह ठप: 'सब कुछ बंद'

जैसे-जैसे बर्फ की चादर मोटी होती जा रही है, प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सब कुछ बंद करने का फैसला किया है।

 * शिक्षा संस्थान: टेक्सास से लेकर टेनेसी तक के स्कूल और विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं। शिक्षा को ऑनलाइन मोड पर ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन बिजली और इंटरनेट की अनुपलब्धता ने उसे भी असंभव बना दिया है।

 * परिवहन: सड़कों पर 15 इंच तक बर्फ जमी होने के कारण हज़ारों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। राजमार्गों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जो बर्फ में धंसी हुई हैं। गवर्नर ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में घर से बाहर न निकलें।

 * आर्थिक प्रभाव: व्यापारिक प्रतिष्ठान और उद्योग बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों की डरावनी चेतावनी

नेशनल वेदर सर्विस (NWS) के वैज्ञानिकों का कहना है कि राहत की उम्मीद अभी दूर है। उनके विश्लेषण के अनुसार:

 * एक और तूफान की दस्तक: इस हफ्ते के अंत में 'पूर्वी तट' (East Coast) पर एक और शक्तिशाली शीतकालीन तूफान आने की प्रबल संभावना है। यह तूफान न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया और वाशिंगटन डीसी जैसे बड़े शहरों को अपनी चपेट में ले सकता है।

 * बर्फीली बारिश (Freezing Rain): विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बर्फबारी के साथ-साथ बर्फीली बारिश हो सकती है, जो सड़कों पर कांच जैसी फिसलन पैदा कर देगी। यह पैदल चलने वालों और ड्राइवरों के लिए घातक साबित हो सकती है।

 * जलवायु परिवर्तन का संकेत: वैज्ञानिकों का मानना है कि जेट स्ट्रीम में बदलाव के कारण ध्रुवीय हवाएं दक्षिण की ओर खिसक रही हैं, जो सीधे तौर पर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु असंतुलन का नतीजा है।

प्रशासन की तैयारी और चुनौतियां

अमेरिकी सरकार और स्थानीय प्रशासन ने आपातकाल (State of Emergency) घोषित कर दिया है। नेशनल गार्ड के जवानों को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है।

 * वार्मिंग शेल्टर: उन लोगों के लिए 'वार्मिंग सेंटर' खोले गए हैं जिनके घरों में बिजली नहीं है। हालांकि, कोविड-19 और अन्य फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच इन केंद्रों में भीड़ जमा होना एक नई स्वास्थ्य चुनौती पैदा कर रहा है।

 * ग्रिड की विफलता: टेक्सास जैसे राज्यों में पावर ग्रिड की विफलता ने बड़े सवाल खड़े किए हैं। यह बहस छिड़ गई है कि क्या अमेरिका का इंफ्रास्ट्रक्चर जलवायु परिवर्तन की इन चरम स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार है?

मानवीय दृष्टिकोण: एक साझा दर्द

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं—बर्फ से ढकी हुई कारें, जमे हुए फव्वारे और भोजन के लिए संघर्ष करते लोग। बुजुर्गों और बेघर लोगों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक कष्टदायक है। स्वयंसेवी संस्थाएं (NGOs) कंबल और गर्म भोजन बांटने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन खराब रास्तों के कारण उन तक पहुँचना मुश्किल हो रहा है।

निष्कर्ष: एक बड़ी चेतावनी

अमेरिका में जारी यह बर्फीला संकट केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक चेतावनी है। विकसित देशों की तकनीक और संसाधन भी प्रकृति के प्रकोप के सामने बौने साबित हो रहे हैं। 40 मौतों का यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों का दर्द है जिन्होंने अपनों को खोया है।

अगले 48 से 72 घंटे पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यदि दूसरा तूफान आता है, तो तबाही का मंजर और भी भयावह हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के बचाव कार्यों पर टिकी हैं।


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