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खड़गे का 'न रिटायर्ड, न टायर्ड' मंत्र: राज्यसभा से 37 सांसदों की विदाई पर खास संदेश

18-03-2026

राज्यसभा में सांसदों की विदाई के अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान न केवल उनके राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है, बल्कि आने वाले चुनाव और सदन की बदलती तस्वीर की ओर भी इशारा करता है।

खड़गे का 'न रिटायर्ड, न टायर्ड' मंत्र: राज्यसभा से 37 सांसदों की विदाई पर खास संदेश

1. राजनीति में 'रिटायरमेंट' का कोई स्थान नहीं

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि एक जनसेवक के लिए उम्र केवल एक आंकड़ा है।

 * सक्रियता का संदेश: उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध शब्दों की याद दिलाते हुए कहा कि राजनीति में व्यक्ति न कभी 'रिटायर्ड' (सेवानिवृत्त) होता है और न ही 'टायर्ड' (थका हुआ)।

 * निरंतर सेवा: सदन से बाहर जाने का मतलब यह नहीं है कि वे जनता की सेवा छोड़ रहे हैं; बल्कि वे अब नए क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे।

2. खट्टा-मीठा अनुभव और पुरानी यादें

खड़गे जी ने सदन के भीतर होने वाली बहसों और नोकझोंक को लोकतंत्र की खूबसूरती बताया।

 * शरद पवार के साथ जुड़ाव: उन्होंने शरद पवार के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का एक मजबूत स्तंभ बताया।

 * विदाई नहीं, केवल अंतराल: उन्होंने उम्मीद जताई कि जो 37 सांसद आज विदा हो रहे हैं, उनमें से कई अपनी काबिलियत के दम पर जल्द ही दोबारा चुनकर सदन में वापस लौटेंगे।

3. राज्यसभा की नई संरचना (2026)

यह विदाई समारोह ऐसे समय में हो रहा है जब राज्यसभा के समीकरण बदल रहे हैं:

 * खाली हो रही सीटें: उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से कई दिग्गज नेता इस बार सदन से बाहर जा रहे हैं।

 * नए चेहरों का आगमन: हाल ही में हुए चुनावों में भाजपा और एनडीए ने अपनी संख्या बढ़ाई है, जिससे उच्च सदन में सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत होने वाली है।

4. मल्लिकार्जुन खड़गे का व्यक्तिगत दृष्टिकोण

80 वर्ष से अधिक की आयु में भी विपक्ष का नेतृत्व कर रहे खड़गे ने खुद को इस सिद्धांत का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन देश के लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए यह 'टायरलेस' (थकान रहित) काम जरूरी है।

निष्कर्ष: सदन की गरिमा और भविष्य

खड़गे जी का यह भाषण पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को कम करने वाला रहा। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे जहां भी रहें, संविधान की गरिमा को बनाए रखें। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है, खासकर उन युवाओं के बीच जो राजनीति में करियर बनाना चाहते हैं।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:

 * अवसर: राज्यसभा से 37 सांसदों की विदाई।

 * प्रमुख व्यक्तित्व: मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार।

 * मूल मंत्र: राजनीति में सक्रियता और निरंतरता।

 * संदेश: सदन से विदाई केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जनसेवा का अंत नहीं।


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