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बांग्लादेश का ऐतिहासिक फैसला: 3 शीर्ष पुलिस अफसरों को मृत्युदंड
यह खबर बांग्लादेश के राजनीतिक और न्यायिक परिदृश्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर मोड़ है। 26 जनवरी 2026 को सुनाया गया यह फैसला न केवल उन अधिकारियों के लिए सजा है, बल्कि यह उस पूरे तंत्र पर एक कड़ा प्रहार है जिसने छात्र आंदोलन के दौरान बल प्रयोग किया था।
बांग्लादेश का ऐतिहासिक फैसला: 3 शीर्ष पुलिस अफसरों को मृत्युदंड
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (ICT-BD) ने सोमवार, 26 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ढाका के पूर्व पुलिस कमिश्नर सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों को "मानवता के खिलाफ अपराध" (Crimes Against Humanity) का दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला अगस्त 2024 में हुए उस छात्र विद्रोह से जुड़ा है, जिसने शेख हसीना के 15 साल के शासन का अंत कर दिया था।
1. सजा पाने वाले मुख्य अधिकारी
ट्राइब्यूनल ने जिन तीन अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई है, वे सभी उस समय ढाका की सुरक्षा व्यवस्था के मुख्य स्तंभ थे:
* हबीबुर रहमान: ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के पूर्व कमिश्नर।
* सुदीप कुमार चक्रवर्ती: पूर्व DMP जॉइंट कमिश्नर।
* मोहम्मद अखतरुल इस्लाम: पूर्व एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC)।
नोट: ये तीनों अधिकारी वर्तमान में फरार हैं और उन्हें उनकी अनुपस्थिति (In Absentia) में सजा सुनाई गई है। अदालत ने उनकी संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है।
2. घटना का मुख्य कारण: चानखारपुल हत्याकांड
यह मामला विशेष रूप से 5 अगस्त 2024 की घटना से संबंधित है। यह वही दिन था जब शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और ढाका की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का सैलाब उमड़ पड़ा था।
* आरोप: पुलिस ने ढाका के चानखारपुल इलाके में प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध और घातक हथियारों से फायरिंग की थी।
* परिणाम: इस गोलीबारी में 6 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। अदालत ने पाया कि इन वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल अपने अधीनस्थों को गोली चलाने का आदेश दिया, बल्कि उन्हें इसके लिए उकसाया भी।
अदालती कार्यवाही और अन्य सजाएं
जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल ने इस मामले में कुल 8 आरोपियों पर विचार किया था।
| पद / नाम | सजा | स्थिति |
| हबीबुर रहमान (कमिश्नर) | मौत की सजा | फरार |
| सुदीप कुमार चक्रवर्ती (जॉइंट कमिश्नर) | मौत की सजा | फरार |
| अखतरुल इस्लाम (ADC) | मौत की सजा | फरार |
| मोहम्मद इमरुल (असिस्टेंट कमिश्नर) | 6 साल जेल | फरार |
| अरशद हुसैन (इंस्पेक्टर) | 4 साल जेल | हिरासत में |
| सुजोन, इमाज और नासिरुल (कांस्टेबल) | 3-3 साल जेल | हिरासत में |
शेख हसीना और पूर्व मंत्रियों पर पहले ही गिर चुकी है गाज
यह ट्राइब्यूनल का दूसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले नवंबर 2025 में, इसी ट्राइब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदउज्जमां खान कमाल को भी मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी। शेख हसीना को इस पूरे दमन चक्र का "मास्टरमाइंड" करार दिया गया था।
इस फैसले के बड़े मायने:
* कमांड जिम्मेदारी (Superior Responsibility): अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अधीनस्थ अपराध करते हैं, तो उसके लिए शीर्ष अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
* चुनावों पर असर: यह फैसला 12 फरवरी 2026 को होने वाले बांग्लादेश के आम चुनावों से ठीक पहले आया है, जो देश की राजनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
* पुलिस बल में डर: इस तरह के कठोर फैसलों से बांग्लादेश के सुरक्षा बलों के बीच यह संदेश गया है कि राजनीतिक आकाओं के आदेश पर की गई हिंसा के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
निष्कर्ष
बांग्लादेश में वर्तमान में चल रही यह न्यायिक प्रक्रिया "जुलाई विद्रोह" के पीड़ितों को न्याय दिलाने की कोशिश है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने मृत्युदंड का विरोध किया है, लेकिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और प्रदर्शनकारी इसे देश के "राष्ट्रीय घाव" को भरने के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं।
