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नवंबर 2025 में भारत का व्यापार घाटा कम हुआ: निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी

15-12-2025


नवंबर 2025 के महीने में भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है, जो दर्शाता है कि देश के निर्यात (Exports) में वृद्धि हुई है, जबकि आयात (Imports) में कमी आई है। यह सकारात्मक बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर है और यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश के बाह्य क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।

व्यापार घाटा क्या है?

व्यापार घाटा तब होता है जब किसी देश द्वारा आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य उसके द्वारा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से अधिक हो जाता है। घाटे में कमी का मतलब है कि आयात और निर्यात के बीच का अंतर कम हो गया है।

घाटे में कमी के मुख्य कारण

नवंबर 2025 में व्यापार घाटे में कमी मुख्य रूप से दो प्रमुख कारकों का परिणाम है:

1. निर्यात में वृद्धि (Boost in Exports)

भारतीय वस्तुओं के निर्यात में मजबूत वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि कई क्षेत्रों में हुई है, जिनमें शामिल हैं:

 * इंजीनियरिंग सामान: वैश्विक मांग में सुधार और भारतीय निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने के कारण इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में तेजी आई है।

 * पेट्रोलियम उत्पाद: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग और भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता का लाभ उठाते हुए, पेट्रोलियम उत्पादों (रिफाइंड उत्पादों) के निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

 * कृषि और समुद्री उत्पाद: कई प्रमुख बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग ने निर्यात वृद्धि में योगदान दिया है।

सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर सक्रियता से काम करने के प्रयासों ने भी निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद की है।

2. आयात में कमी (Contraction in Imports)

व्यापार घाटे को कम करने में आयात में कमी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आयात में गिरावट के मुख्य कारण ये हो सकते हैं:

 * कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी आने से भारत के आयात बिल में कमी आई है। तेल भारत के कुल आयात का एक बड़ा हिस्सा है।

 * घरेलू उत्पादन में वृद्धि: कुछ प्रमुख वस्तुओं, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विनिर्मित सामान, के घरेलू उत्पादन में वृद्धि होने से उनके आयात की आवश्यकता कम हुई है।

 * सोने का आयात: वैश्विक अनिश्चितताओं या उच्च घरेलू कीमतों के कारण सोने के आयात में कमी भी समग्र आयात बिल को कम करने में सहायक हुई होगी।

आर्थिक निहितार्थ (Economic Implications)

व्यापार घाटे में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई सकारात्मक प्रभाव डालती है:

 * चालू खाता घाटे (CAD) पर दबाव कम: व्यापार घाटा चालू खाता घाटे (CAD) का सबसे बड़ा घटक है। व्यापार घाटे में कमी सीधे तौर पर CAD पर दबाव कम करती है। एक निम्न CAD देश की बाहरी देनदारियों को प्रबंधित करने में मदद करता है।

 * रुपये की स्थिरता: कम व्यापार घाटा विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम करता है, जिससे भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत या स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।

 * आर्थिक लचीलापन: यह दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों का सामना करने और घरेलू मांग पर निर्भरता कम करते हुए बाहरी बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने की क्षमता रखती है।

संक्षेप में, नवंबर 2025 में व्यापार घाटे में कमी एक आशावादी संकेत है जो यह दर्शाता है कि भारत सरकार और उद्योग के प्रयास सही दिशा में हैं, और यह वैश्विक स्तर पर भारत के आर्थिक प्रदर्शन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

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