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₹2000 के नोटों की वापसी: RBI का बड़ा खुलासा और वर्तमान स्थिति का विश्लेषण

04-01-2026

₹2000 के नोटों की वापसी: RBI का बड़ा खुलासा और वर्तमान स्थिति का विश्लेषण

भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली में 'मुद्रीकरण' और 'विमुद्रीकरण' (Demonetization) हमेशा से चर्चा के विषय रहे हैं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने एक बार फिर ₹2000 के 'गुलाबी नोटों' को सुर्खियों में ला दिया है। 19 मई 2023 को जब RBI ने इन नोटों को सर्कुलेशन से बाहर करने का फैसला लिया था, तब लक्ष्य इसे चरणबद्ध तरीके से बैंकिंग प्रणाली में वापस लाना था। लेकिन, दिसंबर 2025 के अंत तक के आंकड़े बताते हैं कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: क्यों आए और क्यों गए ₹2000 के नोट?

₹2000 के नोटों की शुरुआत नवंबर 2016 में हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹500 और ₹1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। उस समय अर्थव्यवस्था में नकदी की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए इन उच्च मूल्य वर्ग के नोटों को पेश किया गया था।

हालाँकि, RBI की 'क्लीन नोट पॉलिसी' (Clean Note Policy) के तहत, मई 2023 में यह निर्णय लिया गया कि इन नोटों को वापस लिया जाएगा। इसके पीछे मुख्य तर्क यह था कि ₹2000 के नोटों का उपयोग आम जनता के लेनदेन में कम और जमाखोरी (Hoarding) में अधिक होने की संभावना थी।

RBI का हालिया डेटा: क्या कहते हैं आंकड़े?

RBI के ताजा खुलासे के अनुसार, जब 19 मई 2023 को इन नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब बाजार में कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के ₹2000 के नोट मौजूद थे।

वापसी की वर्तमान स्थिति:

 * समय सीमा: 31 दिसंबर 2025 तक।

 * वापसी का प्रतिशत: 98.41% नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके हैं।

 * बाकी बची राशि: अभी भी 5,669 करोड़ रुपये मूल्य के नोट जनता के पास हैं।

यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि वापसी की प्रक्रिया शुरू हुए ढाई साल से अधिक का समय हो चुका है, फिर भी हजारों करोड़ रुपये अभी भी सिस्टम से बाहर हैं।

वापसी की 'धीमी रफ्तार' के पीछे के कारण

RBI ने स्वयं स्वीकार किया है कि वापसी की सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद अब इसकी रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:

 * अप्रवासी भारतीय (NRIs) और विदेशी धारक: कई भारतीय जो विदेशों में रह रहे हैं, उनके पास शायद अभी भी ये नोट मौजूद हों और वे इसे बदलने के लिए भारत नहीं आ पाए हों।

 * भूले हुए संचय: ग्रामीण इलाकों या बुजुर्गों के पास, जो अक्सर नकदी को आपातकालीन स्थिति के लिए घर में छिपाकर रखते हैं, ये नोट अभी भी पड़े हो सकते हैं।

 * कानूनी पेचदगियां: कुछ मामलों में, यह पैसा कानूनी विवादों, जांच एजेंसियों द्वारा जब्त की गई नकदी या अदालती मामलों में फंसा हो सकता है।

 * खोए हुए नोट: यह भी संभव है कि एक छोटा प्रतिशत नोट नष्ट हो गए हों या खो गए हों, जिनका डेटा कभी बैंक तक नहीं पहुंचेगा।

वापसी की प्रक्रिया: अब नोट कहाँ बदलें?

शुरुआत में, आम जनता को किसी भी बैंक शाखा में जाकर नोट बदलने या जमा करने की अनुमति थी। लेकिन वर्तमान में, यह सुविधा केवल सीमित स्थानों पर उपलब्ध है:

 * RBI के क्षेत्रीय कार्यालय: देशभर में स्थित RBI के 19 क्षेत्रीय कार्यालयों (जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, आदि) में जाकर ये नोट बदले जा सकते हैं।

 * भारतीय डाक (India Post): लोग डाक विभाग के माध्यम से भी अपने ₹2000 के नोट RBI के निर्गम कार्यालयों (Issue Offices) को भेज सकते हैं, जहां राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

₹2000 के नोटों की वापसी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मिला-जुला प्रभाव पड़ा है:

 * बैंकिंग लिक्विडिटी: 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंकों में वापस आने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी (Liquidity) बढ़ी है, जिससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता में सुधार हुआ।

 * डिजिटल भुगतान को बढ़ावा: उच्च मूल्य के नोटों के हटने से लोगों ने UPI और नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यमों को अधिक अपनाया है।

 * काले धन पर अंकुश: विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य के नोटों को वापस लेने से भ्रष्टाचार और काले धन के भंडारण पर कुछ हद तक लगाम लगी है।

आगे की चुनौती और निष्कर्ष

RBI के लिए चुनौती यह है कि वह उन शेष 5,669 करोड़ रुपयों का क्या करे? हालांकि 98% से अधिक की वापसी एक बड़ी सफलता है, लेकिन बचा हुआ 1.59% हिस्सा अभी भी एक महत्वपूर्ण राशि है।

क्या सरकार इन नोटों को पूरी तरह से 'शून्य' घोषित कर देगी? फिलहाल, RBI ने ऐसी कोई अंतिम तिथि (Dead-line) तय नहीं की है जिसके बाद नोट पूरी तरह बेकार हो जाएं, लेकिन सीमित काउंटरों और लंबी प्रक्रिया ने इसे आम जनता के लिए कठिन बना दिया है।

निष्कर्ष के तौर पर, ₹2000 के नोटों का युग अब अपने अंतिम चरण में है। 5,669 करोड़ रुपये की यह 'गुलाबी पहेली' कब सुलझेगी, यह आने वाले समय में RBI के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। आम जनता के लिए सलाह यही है कि यदि उनके पास अभी भी ये नोट हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द वैध माध्यमों से जमा करा देना चाहिए।


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