Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
चीन का अमेरिका पर 'सैंक्शंस स्ट्राइक': ताइवान हथियार सौदे के जवाब में 20 कंपनियों और 10 अधिकारियों पर
बीजिंग/वाशिंगटन | 27 दिसंबर 2025
चीन और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर कड़वाहट आ गई है। ताइवान को हथियारों की भारी आपूर्ति के विरोध में चीन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए 20 अमेरिकी रक्षा कंपनियों और 10 उच्च पदस्थ अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।
1. विवाद की जड़: $11.1 अरब का 'मेगा' हथियार सौदा
इस तनाव की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले सप्ताह ताइवान के लिए घोषित किया गया एक विशाल सैन्य सहायता पैकेज है।
* इतिहास का सबसे बड़ा सौदा: लगभग 11.1 अरब डॉलर (करीब 93,000 करोड़ रुपये) का यह सौदा अमेरिका और ताइवान के रक्षा संबंधों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है।
* क्या-क्या शामिल है: इस पैकेज में उन्नत 'हिमार्स' (HIMARS) रॉकेट सिस्टम, जैवलिन और TOW एंटी-टैंक मिसाइलें, मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें (ATACMS), हॉवित्जर तोपें और निगरानी ड्रोन शामिल हैं।
2. किन पर गिरी गाज? (प्रतिबंधित कंपनियों की सूची)
चीन ने उन कंपनियों को निशाना बनाया है जो सीधे तौर पर ताइवान को हथियारों की असेंबली या तकनीक प्रदान करती हैं। प्रतिबंधित 20 कंपनियों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
* बोइंग (सेंट लुइस डिफेंस ब्रांच): बोइंग की यह विशेष शाखा सैन्य विमानों और मिसाइलों के निर्माण के लिए जानी जाती है।
* नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन (Northrop Grumman): यह कंपनी रडार और एयरोस्पेस तकनीक की दिग्गज है।
* एल3हैरिस (L3Harris Maritime Services): समुद्री सुरक्षा और संचार प्रणाली प्रदाता।
* अन्य नाम: सूची में एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज, गिब्स एंड कॉक्स, वीएसई कॉरपोरेशन, और रेड कैट होल्डिंग्स जैसी नई पीढ़ी की रक्षा तकनीक कंपनियां भी शामिल हैं।
3. व्यक्तिगत प्रतिबंध: 10 अधिकारियों पर बैन
चीन ने केवल कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाया है जिन्हें वह इस सौदे का "मास्टरमाइंड" मानता है।
* इनमें पामर लकी (Palmer Luckey), जो एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक हैं, और एल3हैरिस व अन्य रक्षा फर्मों के 9 वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं।
* इन व्यक्तियों के चीन (हांगकांग और मकाऊ सहित) में प्रवेश पर स्थायी रोक लगा दी गई है।
4. प्रतिबंधों का स्वरूप और प्रभाव
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये प्रतिबंध 'एंटी-फॉरेन सैंक्शंस लॉ' के तहत तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं:
* संपत्ति फ्रीज: प्रतिबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की चीन के भीतर मौजूद सभी चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है।
* व्यापार पर रोक: किसी भी चीनी संगठन या नागरिक को इन कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का लेनदेन, निवेश या सहयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
* सांकेतिक या वास्तविक असर? विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि अधिकांश अमेरिकी रक्षा कंपनियों का चीन में सीधा व्यापार नहीं है, लेकिन यह कदम एक 'डिप्लोमैटिक वॉर्निंग' है। इससे इन कंपनियों के वैश्विक सप्लाई चेन में शामिल चीनी घटकों (components) पर असर पड़ सकता है।
5. चीन की 'रेड लाइन' और कड़ी चेतावनी
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने बयान में बेहद सख्त लहजे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "ताइवान मुद्दा चीन के राष्ट्रीय हितों का केंद्र है और यह चीन-अमेरिका संबंधों की वह 'रेड लाइन' है जिसे पार नहीं किया जा सकता।" बीजिंग का तर्क है कि अमेरिका की यह कार्रवाई 'वन-चाइना पॉलिसी' का खुला उल्लंघन है और चीन की संप्रभुता को चुनौती देती है। चीन ने चेतावनी दी है कि जो कोई भी ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करेगा या उसे हथियार देगा, उसे "भारी कीमत चुकानी होगी।"
6. अमेरिका का रुख
वाशिंगटन ने इन प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान को अपनी रक्षा के लिए साधन उपलब्ध कराना अमेरिकी कानून (Taiwan Relations Act) के तहत एक जिम्मेदारी है। अमेरिका ने चीन से अपील की है कि वह ताइवान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाने के बजाय सार्थक बातचीत का रास्ता चुने।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 के अंत में आया यह फैसला साल 2026 के लिए एक अस्थिर शुरुआत का संकेत है। दोनों महाशक्तियों के बीच यह 'टिट-फॉर-टैट' (जैसे को तैसा) की नीति वैश्विक रक्षा बाजार और प्रशांत क्षेत्र (Pacific Region) की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
