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शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक कृत्य: ओडिशा में 12 साल की मासूम से दरिंदगी, 4 शिक्षक और चपरासी गिरफ्तार

22-02-2026

शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक कृत्य: ओडिशा में 12 साल की मासूम से दरिंदगी, 4 शिक्षक और चपरासी गिरफ्तार

ओडिशा के केंद्रपाड़ा (Kendrapara) जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है जिसने गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली 12 साल की नाबालिग छात्रा के साथ उसी के चार शिक्षकों और एक चपरासी ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे राज्य में भारी जनाक्रोश है और लोग दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।

कैसे सामने आया घिनौना सच?

यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़िता की मां घर लौटी और उन्होंने अपनी बेटी को कमरे में अकेले बिलखते हुए पाया। बच्ची की मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखकर मां को अनहोनी की आशंका हुई।

 * बच्ची की आपबीती: शुरुआत में डरी-सहमी बच्ची कुछ भी बोलने से कतराती रही, लेकिन मां के भरोसे के बाद उसने जो बताया वह सुनकर सबके होश उड़ गए।

 * लगातार शोषण: बच्ची ने आरोप लगाया कि स्कूल के चार शिक्षक और एक चपरासी पिछले काफी समय से उसके साथ इस घिनौनी हरकत को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों ने उसे जान से मारने और स्कूल से निकालने की धमकी देकर उसका मुंह बंद कर रखा था।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: सभी आरोपी सलाखों के पीछे

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रपाड़ा पुलिस ने बिना देरी किए कार्रवाई की:

 * गिरफ्तारी: बच्ची की मां द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और स्कूल के चारों शिक्षकों तथा चपरासी को गिरफ्तार कर लिया है।

 * सख्त धाराएं: पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

 * मेडिकल जांच: पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके।

स्कूल प्रशासन पर सवाल और सुरक्षा की चिंता

यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

 * सुरक्षा ऑडिट का अभाव: जिस जगह माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित मानकर भेजते हैं, वहीं के स्टाफ का ऐसा व्यवहार प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

 * बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: क्या स्कूल प्रबंधन ने इन शिक्षकों और कर्मचारियों को काम पर रखने से पहले उनके चरित्र का सत्यापन किया था?

 * कठोर कार्रवाई की मांग: स्थानीय निवासी और अभिभावक संघ अब स्कूल का लाइसेंस रद्द करने और मामले को 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' में चलाने की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष: समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

केंद्रपाड़ा की यह घटना समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। बच्चों के साथ होने वाले इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए न केवल कड़े कानूनों की जरूरत है, बल्कि स्कूलों में 'गुड टच-बैड टच' की शिक्षा और एक पारदर्शी शिकायत तंत्र (Grievance Redressal) का होना भी अनिवार्य है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे पुख्ता सबूत जुटाकर आरोपियों को कानून की अधिकतम सजा दिलवाएंगे।


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