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भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता: 2026 से 'Zero Tariff' का नया युग और निर्यात की ऊँची उड़ान
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों के इतिहास में 1 जनवरी, 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। दोनों देशों के बीच हुए 'आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते' (Ind-Aus ECTA) के सफल तीन साल पूरे होने के अवसर पर ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। 1 जनवरी से भारत से ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने वाले 100% उत्पादों पर 'Zero Tariff' यानी शून्य सीमा शुल्क लागू हो जाएगा।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि यह समझौता "इरादे को प्रभाव (Intent into Impact)" में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
क्या है 'Zero Tariff' का गणित?
जब दो देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होता है, तो शुल्कों को धीरे-धीरे कम किया जाता है। दिसंबर 2022 में जब ECTA लागू हुआ था, तब ऑस्ट्रेलिया ने अपने लगभग 96% टैरिफ लाइनों (उत्पाद श्रेणियों) पर शुल्क हटा लिया था। अब, समझौते के तीन साल पूरे होने पर शेष उत्पादों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारतीय निर्यातक बिना किसी अतिरिक्त आयात शुल्क के अपना सामान ऑस्ट्रेलिया की मंडियों में बेच सकेंगे। इससे न केवल उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी होगी, बल्कि भारतीय छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए मुनाफे की नई राहें खुलेंगी।
इन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
शून्य शुल्क व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ भारत के 'श्रम-प्रधान' (Labour-intensive) क्षेत्रों को मिलेगा, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है:
* कपड़ा और परिधान (Textiles): भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए ऑस्ट्रेलिया एक बड़ा बाजार है। शून्य शुल्क होने से वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारतीय कपड़े सस्ते और सुलभ होंगे।
* रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery): साल 2025 में इस क्षेत्र के निर्यात में पहले ही 16% की वृद्धि देखी गई है। अब ड्यूटी-फ्री एक्सेस से भारतीय आभूषणों की मांग सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में और बढ़ेगी।
* कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य: भारत से निर्यात होने वाले फल, सब्जियां, समुद्री उत्पाद (Marine Products) और मसालों की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है। विशेष रूप से भारतीय कॉफी के निर्यात में पिछले तीन वर्षों में असाधारण वृद्धि देखी गई है।
* इंजीनियरिंग और फार्मास्युटिकल्स: भारतीय दवाएं और इंजीनियरिंग सामान अब ऑस्ट्रेलियाई मानकों पर कम लागत में उपलब्ध होंगे, जिससे 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक पहचान मिलेगी।
पिछले तीन वर्षों का रिपोर्ट कार्ड
पिछले तीन साल भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार के लिए क्रांतिकारी रहे हैं। व्यापार आंकड़ों के अनुसार:
* निर्यात में वृद्धि: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 8% की दर से बढ़ा है।
* व्यापार संतुलन: द्विपक्षीय व्यापार अब 24 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया है, जिससे भारत के व्यापार संतुलन (Trade Balance) में सुधार हुआ है।
* जैविक उत्पादों पर समझौता: हाल ही में दोनों देशों ने 'Mutual Recognition Arrangement (MRA)' पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों को ऑस्ट्रेलिया में बिना दोहरी प्रमाणन प्रक्रिया के आसानी से प्रवेश मिल सकेगा।
MSMEs और किसानों के लिए वरदान
यह समझौता केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए नहीं है। भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) जो अक्सर कम मार्जिन पर काम करते हैं, उनके लिए ऑस्ट्रेलिया जैसे उच्च-आय वाले बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश करना एक बड़ी जीत है। इसके साथ ही, भारतीय किसानों के लिए 'फ्रेश प्रोड्यूस' के निर्यात के नए अवसर खुले हैं। ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा देश है जहाँ उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति अधिक है, ऐसे में भारतीय प्रीमियम उत्पादों (जैसे आम, बासमती चावल और हस्तशिल्प) के लिए वहां अपार संभावनाएं हैं।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह
भारत और ऑस्ट्रेलिया की यह नजदीकी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वर्तमान में दोनों देश 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) पर बातचीत कर रहे हैं। ECTA एक 'अर्ली हार्वेस्ट' डील की तरह था, जबकि CECA इससे भी अधिक व्यापक होगा। इसमें सेवाओं (Services), निवेश और डिजिटल व्यापार जैसे जटिल मुद्दों को शामिल किया जाएगा।
निष्कर्ष
1 जनवरी, 2026 से शुरू होने वाला 'शून्य शुल्क' का यह दौर भारतीय निर्यातकों के लिए एक 'लॉन्चपैड' की तरह है। जहाँ दुनिया के कई बड़े देशों में संरक्षणवाद (Protectionism) बढ़ रहा है और व्यापारिक बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ यह साझेदारी भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करती है। अब गेंद भारतीय उद्यमियों के पाले में है कि वे गुणवत्ता और नवाचार के दम पर इस ऐतिहासिक अवसर का कितना लाभ उठाते हैं।
