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चीन-ताइवान तनाव: 'जस्टिस मिशन 2025' और युद्ध की आहट के बीच दहकता ताइवान जलडमरूमध्य

30-12-2025

दिसंबर 2025 का अंत वैश्विक राजनीति के लिए एक अत्यंत संवेदनशील मोड़ लेकर आया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के चारों ओर 'जस्टिस मिशन 2025' नामक बड़े पैमाने पर लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। 29 दिसंबर 2025 को शुरू हुए इस युद्धाभ्यास ने ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिसके जवाब में ताइवान ने अपनी सेना को 'मैक्सिमम अलर्ट' पर रखा है।

'जस्टिस मिशन 2025': ड्रैगन की घेराबंदी

चीन के इस सैन्य अभ्यास का स्वरूप पहले के मुकाबलों की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक और व्यापक है। चीनी सेना की पूर्वी थिएटर कमान के अनुसार, इस अभियान में थल सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट बल की संयुक्त इकाइयों को तैनात किया गया है।

 * नकली नाकाबंदी: अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों—उत्तर में कीलुंग और दक्षिण में काऊशुंग—की पूर्ण नाकाबंदी का पूर्वाभ्यास करना है।

 * लाइव-फायर और रॉकेट फोर्स: पीएलए ने ताइवान के तट से महज 12 से 24 समुद्री मील की दूरी पर लाइव मिसाइलें और लंबी दूरी के रॉकेट दागे हैं।

 * हवाई अतिक्रमण: 30 दिसंबर की सुबह तक ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने 130 से अधिक चीनी लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और ड्रोन्स को अपने हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश करते हुए रिकॉर्ड किया है।

चीन के प्रवक्ता लिन जियान ने स्पष्ट शब्दों में इसे "अलगाववादी ताकतों के खिलाफ एक दंडात्मक और निवारक कार्रवाई" करार दिया है।

तनाव का तात्कालिक कारण: $11.1 बिलियन की डील

इस ताजा तनाव की जड़ें अमेरिका द्वारा हाल ही में घोषित किए गए रिकॉर्ड रक्षा सौदे में छिपी हैं। दिसंबर के मध्य में, अमेरिकी प्रशासन ने ताइवान को 11.1 अरब अमेरिकी डॉलर के उन्नत हथियार बेचने की मंजूरी दी थी। चीन ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और "रेड लाइन" पार करना बताया है।

इसके अलावा, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस हालिया बयान ने भी आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान पर किसी भी हमले की स्थिति में जापान सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है। चीन इन वैश्विक गठबंधनों को अपनी 'वन चाइना पॉलिसी' के लिए सीधा खतरा मानता है।

ताइवान की प्रतिक्रिया: 'हाई अलर्ट' और सुरक्षा उपाय

ताइवान की राष्ट्रपति और रक्षा मंत्रालय ने चीन की इस हरकत की कड़ी निंदा करते हुए इसे "क्षेत्रीय शांति को अस्थिर करने वाला एकतरफा उकसावा" बताया है।

 * सेना की तैनाती: ताइवान ने अपने एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम (HIMARS) और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस यूनिट्स को सक्रिय कर दिया है।

 * नागरिक प्रभाव: लाइव-फायर अभ्यास के कारण ताइवान के आसपास सात 'खतरनाक क्षेत्र' (Danger Zones) घोषित किए गए हैं। इसके चलते 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे लगभग 1 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं।

 * प्रति-अभ्यास: ताइवान की नौसेना और तटरक्षक बल ने भी 'रैपिड रिस्पांस' अभ्यास शुरू कर दिए हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित घुसपैठ का तुरंत जवाब दिया जा सके।

वैश्विक स्तर पर हलचल: अमेरिका और जापान की भूमिका

इस संकट को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिमी प्रशांत महासागर में अपने दो विमान वाहक पोत (Aircraft Carriers) और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप को तैनात किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर है कि चीन इन अभ्यासों की आड़ में ताइवान पर वास्तविक आक्रमण की योजना बना सकता है।

जापान ने भी अपनी समुद्री सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 में नैन्सी पेलोसी की यात्रा के बाद से यह चीन का छठा और अब तक का सबसे खतरनाक शक्ति प्रदर्शन है।

निष्कर्ष: क्या युद्ध अपरिहार्य है?

'जस्टिस मिशन 2025' केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि बीजिंग का एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी है। चीन यह संदेश देना चाहता है कि वह ताइवान को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काटने की क्षमता रखता है। जैसे-जैसे 2025 समाप्त हो रहा है, ताइवान जलडमरूमध्य की लहरें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े सवालिया निशान के रूप में उभर रही हैं।


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