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12 मई 2008: चीन के सिचुआन का वो काला दिन, जब कांप उठी थी रूह
इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें ऐसी दर्ज होती हैं, जिन्हें याद करते ही आज भी रूह कांप जाती है। 12 मई 2008 का दिन चीन के लिए एक ऐसा ही जख्म है, जो कभी नहीं भर सकता। चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन में दोपहर के 2 बजकर 28 मिनट पर प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते हंसते-खेलते शहर खंडहरों में तब्दील हो गए।
7.9 की तीव्रता वाले इस विनाशकारी भूकंप ने न केवल चीन को हिलाया, बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। इसे 'वेनचुआन भूकंप' के नाम से भी जाना जाता है।
1. भूकंप की भयावहता: जब धरती ने दिखाया रौद्र रूप
सिचुआन का यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके न केवल बीजिंग और शंघाई में महसूस किए गए, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान तक धरती कांप उठी थी।
• तीव्रता और केंद्र: रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.9 मापी गई थी। इसका केंद्र सिचुआन प्रांत के वेनचुआन काउंटी में जमीन से करीब 19 किलोमीटर नीचे था।
• फटने लगी जमीन: मंजर इतना खौफनाक था कि भूकंप के दौरान जमीन में कई जगहों पर 9 मीटर (करीब 30 फीट) तक गहरी और चौड़ी दरारें पड़ गईं। सड़क, पुल और रेल पटरियां किसी कागज के टुकड़े की तरह बिखर गए।
• इमारतों का ताश के पत्तों सा ढहना: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित इलाके की हर चौथी इमारत पूरी तरह जमींदोज हो गई थी। कुल मिलाकर करीब 50 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए थे।
2. आंकड़ों में तबाही: 90 हजार मौतें और चीखता सिचुआन
इस आपदा में जान-माल का जो नुकसान हुआ, वह अकल्पनीय था। यह चीन में 1976 के तांगशान भूकंप के बाद सबसे घातक प्राकृतिक आपदा थी।
सबसे दुखद पहलू यह था कि भूकंप उस समय आया जब स्कूल खुले हुए थे। सिचुआन के कई स्कूलों की इमारतें घटिया निर्माण के कारण ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, जिससे हजारों बच्चों की दबकर मौत हो गई। आज भी इसे 'सोयाबीन ड्रेग्स' निर्माण का नाम देकर याद किया जाता है, जिसने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी थी।
3. राहत और बचाव: मौत के साये में 'फरिश्ते'
भूकंप के तुरंत बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के करीब 1.3 लाख सैनिकों को बचाव कार्य में लगाया गया। दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण राहत कार्यों में भारी दिक्कतें आईं।
• राहतकर्मियों का बलिदान: रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान चुनौतियां इतनी बड़ी थीं कि करीब 200 राहतकर्मियों की भी मौत हो गई। भूस्खलन और मलबे के गिरने से बचाव दल को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
• अंतर्राष्ट्रीय मदद: चीन ने इस आपदा के बाद पहली बार विदेशी सहायता को स्वीकार किया। जापान, रूस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों के विशेषज्ञ दल बचाव कार्य में जुटे।
4. सिचुआन की भौगोलिक स्थिति और कारण
सिचुआन प्रांत लोंगमेनशान फॉल्ट पर स्थित है। यहाँ भारतीय विवर्तनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच होने वाले घर्षण के कारण ऊर्जा का भारी संचय होता है। 2008 में यही ऊर्जा अचानक मुक्त हुई, जिससे जमीन के अंदर इतनी भीषण हलचल हुई।
5. 'क्वेक लेक्स': एक नई मुसीबत
भूकंप के बाद सिचुआन के पहाड़ों से गिरे मलबे ने नदियों का रास्ता रोक दिया, जिससे लगभग 34 कृत्रिम झीलें बन गईं। इन्हें 'क्वेक लेक्स' कहा गया। सबसे खतरनाक 'तांगजियाशान' झील थी, जिसके फटने का खतरा पैदा हो गया था। यदि वह झील फटती, तो निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोग बाढ़ में बह जाते। चीनी इंजीनियरों ने बड़ी मशक्कत के बाद नहरें खोदकर इस पानी को सुरक्षित बाहर निकाला।
6. पुनर्निर्माण और आज का सिचुआन
आज 18 साल बाद, सिचुआन फिर से खड़ा हो गया है। चीन ने इस क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए खरबों डॉलर खर्च किए। पुराने शहरों के पास ही नए और आधुनिक भूकंपरोधी शहर बसाए गए हैं।
• वेनचुआन मेमोरियल: तबाही के निशान के तौर पर मलबे में तब्दील हुए कुछ स्कूलों और इमारतों को आज भी सुरक्षित रखा गया है, जो एक स्मारक के रूप में आने वाली पीढ़ियों को उस भयावह दिन की याद दिलाते हैं।
• मजबूत बुनियादी ढांचा: अब सिचुआन में बनी हर नई इमारत को सख्त 'भूकंपरोधी' मानकों के आधार पर बनाया जाता है।
निष्कर्ष
12 मई 2008 की वह दोपहर चीन के इतिहास का एक काला अध्याय है। 90 हजार लोगों की जान और लाखों के जख्म हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति के प्रकोप के आगे इंसान कितना बेबस है। लेकिन सिचुआन का पुनर्जन्म यह भी दिखाता है कि इंसानी जज्बा और एकजुटता किसी भी बड़ी से बड़ी आपदा को मात दे सकती है। आज जब दुनिया सिचुआन को देखती है, तो वह केवल तबाही को नहीं, बल्कि एक मलबे से उठकर फिर से मुस्कुराते हुए समाज को देखती है।
