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होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, ब्रेंट और WTI क्रूड लुढ़के
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। मध्य पूर्व में रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद इस रूट पर महीनों से बना गतिरोध समाप्त हो गया है। आपूर्ति सुचारू होने के चलते आज सुबह वैश्विक बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट क्रूड दोनों के भाव में बड़ी गिरावट देखी गई।
ताजा कीमतें: $80 के स्तर से नीचे आए ब्रेंट और WTI क्रूड
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आज सुबह निम्नलिखित नरमी देखी गई:
• WTI क्रूड ऑयल : आज सुबह WTI क्रूड की कीमत 0.52% की गिरावट के साथ 72.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुकी है। जून की शुरुआत में यह 90 डॉलर के पार कारोबार कर रहा था।
• ब्रेंट क्रूड ऑयल : वैश्विक मानकों के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्रेंट क्रूड का भाव भी 0.53% की गिरावट के बाद 76.66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
यह गिरावट दर्शाती है कि बाजार में तेल की कमी या ब्लॉक होने का जो डर बना हुआ था, वह अब पूरी तरह से खत्म हो रहा है।
एक महीने में 23 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट
यदि बीते एक महीने के रुझानों पर नजर डालें, तो कच्चे तेल की कीमतों में संचयी रूप से 23 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिल चुकी है। फरवरी के अंत में जब इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा था, तब तेल की कीमतें तेजी से आसमान छूने लगी थीं, जिससे दुनिया भर में ईंधन आधारित महंगाई ) का खतरा पैदा हो गया था। लेकिन जून के मध्य में अमेरिका-ईरान वार्ता के सकारात्मक नतीजों और जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बाद कीमतें तेजी से नीचे आई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना क्यों है गेम-चेंजर?
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट्स' में गिना जाता है। वैश्विक तेल राजनीति और व्यापार में इसका महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
1. 20% वैश्विक व्यापार: दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और ईरान जैसे बड़े ओपेक उत्पादक देश इसी रूट से अपना तेल निर्यात करते हैं।
2. सप्लाई चेन में सुधार: भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों को जाने वाले तेल टैंकरों का रास्ता साफ होने से रिफाइनरियों को अब बिना किसी रुकावट के कच्चा तेल मिल पा रहा है।
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी की तरह है:
1. राजकोषीय घाटे में कमी
कच्चे तेल में 23% की गिरावट से भारत के आयात बिल में अरबों डॉलर की बचत होगी, जिससे देश का व्यापार घाटा कम होगा और भारतीय रुपया (INR) डॉलर के मुकाबले मजबूत स्थिति में आएगा।
2. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 70-75 डॉलर के दायरे में बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में देश की तेल विपणन कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर आम जनता को बड़ी राहत दे सकती हैं।
3. लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई का सस्ता होना
ईंधन सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होगी, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के सामानों, सब्जियों और एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा और देश में खुदरा महंगाई नियंत्रण में आएगी।
आगे की राह और बाजार का अनुमान
ऊर्जा विशेषज्ञों और 'यू.एस. एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन' के पूर्वानुमानों के अनुसार, हालांकि होर्मुज जलमार्ग से यातायात शुरू हो गया है, लेकिन शिपिंग कंपनियों के मन में अभी भी समुद्री बारूदी सुरंगों को लेकर थोड़ी सावधानी है। ईरान ने अगले 30 दिनों के भीतर इन रूट्स को पूरी तरह से साफ करने का वादा किया है।
जैसे-जैसे सुरक्षा का भरोसा और बढ़ेगा, खाड़ी देशों में फंसा हुआ लाखों बैरल तेल बाजार में आएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ओपेक+ देशों ने उत्पादन में कोई अचानक कटौती नहीं की, तो कच्चे तेल की कीमतें आने वाले समय में 70 से 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रह सकती हैं, जो वैश्विक आर्थिक सुधार के लिए एक बेहद शुभ संकेत है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलमार्ग से जहाजों का आवागमन सामान्य होना और कच्चे तेल की कीमतों का 23% तक टूटकर 72-76 डॉलर के स्तर पर आना इस बात का प्रमाण है कि कूटनीति से आर्थिक संकटों को टाला जा सकता है। यह गिरावट भारत सहित दुनिया भर के उपभोक्ता देशों के लिए महंगाई से राहत और औद्योगिक विकास की रफ्तार को तेज करने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आई है। वैश्विक बाजारों की नजर अब इस रूट पर सुरक्षा के स्थायी तौर पर बहाल होने और आगामी ओपेक बैठक के फैसलों पर टिकी रहेगी।
